- चीन की पहली पूरी तरह AI से बनी फीचर फिल्म सानक्सिंगडुई ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर कमाई में बड़ा घाटा उठाया है
- सानक्सिंगडुई फिल्म की कहानी असंबद्ध और बिखरी हुई होने के कारण दर्शकों की दिलचस्पी कम हुई है
- एलन मस्क की कंपनी xAI ने AI वीडियो-जनरेशन टूल से द ओडिसी का पहला हिस्सा जारी किया, जिसे आलोचना मिली
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मतलब एआई से हर कोई डरा हुआ है. अगर इंसानों के लिए खतरे की बात छोड़ भी दें तो हर कामकाजी व्यक्ति तो इससे डरा ही हुआ है. इससे हॉलीवुड से लेकर बॉलीवुड और तमाम देशों के सिनेमाई हस्तियां बेचैन हैं. इस बीच चीन की तरफ से एक सुपर महंगी एआई फिल्म आई. मगर, इस फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों की निराशाजनक प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा है.
कितने में बनी और कितनी हुई कमाई
'सानक्सिंगडुई' (Sanxingdui) पूरी तरह से AI द्वारा बनाई गई चीन की पहली फीचर फिल्म है. इसे देश में स्क्रीनिंग की अनुमति भी मिली थी. ये 23 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने के बाद से ही घरेलू बॉक्स ऑफिस पर संघर्ष कर रही है.चीनी टिकटिंग प्लेटफॉर्म 'माओयान' के अनुसार, गुरुवार तक इस फिल्म की कुल बॉक्स ऑफिस कमाई लगभग 1.42 मिलियन युआन (213,000 डॉलर) रही, जबकि सिनेमाघरों में दर्शकों की उपस्थिति (ऑक्यूपेंसी रेट) गिरकर 0.2 प्रतिशत तक आ गई है. करोड़ों युआन की अनुमानित प्रोडक्शन लागत के मुकाबले, सिनेमाघरों से हुई कमाई रिपोर्ट किए गए बजट के दसवें हिस्से से भी कम रही है. इससे बड़े पर्दे पर AI-जनरेटेड कंटेंट लाने से जुड़े कमर्शियल जोखिम सामने आते हैं.
एलन मस्क का प्रयोग कैसे फेल हुआ
इस बीच, एलन मस्क की कंपनी xAI द्वारा विकसित AI वीडियो-जनरेशन टूल 'ग्रोक इमेजिन' (Grok Imagine) ने अपनी सीरीज 'द ओडिसी' (The Odyssey) का पहला सात मिनट का हिस्सा मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जारी किया है. यह प्रोजेक्ट तब सामने आया जब मस्क ने होमर के महाकाव्य 'द ओडिसी' पर आधारित क्रिस्टोफर नोलन की आने वाली लाइव-एक्शन फिल्म की सार्वजनिक रूप से आलोचना की. मस्क का आरोप था कि फिल्म में 'पॉलिटिकल करेक्टनेस' के चक्कर में ऐतिहासिक सच्चाई से समझौता किया गया है.
मस्क ने कहा है कि उनकी योजना 2026 के अंत तक एक पूरी फीचर-लेंथ AI फिल्म बनाने की है, जो होमर की मूल रचना की भावना के प्रति सच्ची होगी. लेकिन इसके पहले एपिसोड को इसके विजुअल्स और कहानी कहने के तरीके को लेकर आलोचना झेलनी पड़ी; विदेशी मीडिया ने तो इसे "बेजान और घटिया काम" तक करार दे दिया.
हालांकि ये दोनों प्रोजेक्ट्स अपने पैमाने, सांस्कृतिक संदर्भ और वितरण के मामले में अलग-अलग हैं, लेकिन इनमें आ रही एक जैसी मुश्किलें यह बताती हैं कि AI फिल्म निर्माण के सामने केवल इमेज क्वालिटी सुधारने या ज्यादा वास्तविक दिखने वाले डिजिटल किरदार बनाने से कहीं बड़ी और बुनियादी समस्या है.
देखें 'द ओडिसी' का वीडियो
Watch Episode 1 of our Odyssey series made with Grok Imagine. Let us know in the comments if you'd like a full breakdown of how it was done! Creative collaboration with @WonderStudiosX and director Dev Walker @glumlot_ https://t.co/xpgpkqSCpq
— Grok Imagine (@imagine) October 23, 2026
क्यों फेल हुए दोनों प्रोजेक्ट
- बीजिंग के रहने वाले झांग नाम के एक दर्शक ने 'ग्लोबल टाइम्स' को बताया कि सिनेमाघर में पहली बार AI फिल्म देखना एक नया अनुभव था. झांग ने कहा, "लेकिन 'सानक्सिंगडुई' फिल्म में AI का प्रभाव बहुत ज्यादा था, और इसकी कहानी बिखरी हुई और असंबद्ध थी."
- AI प्रोडक्शन स्टूडियो चलाने वाले निर्देशक फेंग अनरोंग ने गुरुवार को 'ग्लोबल टाइम्स' से कहा, "असली समस्या तकनीक में नहीं, बल्कि कंटेंट और बाजार के बीच के तालमेल की कमी में है." फेंग का तर्क था कि दोनों फिल्मों में तकनीकी नवीनता पर बहुत अधिक जोर दिया गया, जबकि लोकप्रिय मनोरंजन की बुनियादी जरूरतों—जैसे कि एक सुसंगत कथानक, दिलचस्प पात्र और भावनात्मक जुड़ाव—को नजरअंदाज कर दिया गया. उन्होंने कहा, "दर्शक सिनेमाघर में एक संपूर्ण, आकर्षक और भावनात्मक रूप से जोड़ने वाली कहानी देखने जाते हैं, न कि तकनीक का प्रदर्शन देखने."
- 'सानक्सिंगडुई' दक्षिण-पश्चिम चीन के सिचुआन प्रांत की प्राचीन सानक्सिंगडुई संस्कृति पर आधारित है, जो अपने विशिष्ट कांस्य मुखौटों और अन्य कलाकृतियों के लिए जानी जाती है. यह स्थल अब एक प्रमुख सांस्कृतिक पर्यटन स्थल बन गया है और चीन की पुरातात्विक विरासत को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने के प्रयासों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है.
- फेंग ने कहा, "इस फिल्म ने उस सांस्कृतिक आकर्षण को AI-आधारित फिल्म निर्माण के साथ जोड़ने की कोशिश की, लेकिन इसकी बिखरी हुई कहानी और आपस में ठीक से न जुड़े कथानक ने दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखने की इसकी क्षमता को कमजोर कर दिया."
फिल्में तभी चलेंगी जब उनमें...
इसके विपरीत, मस्क की 'द ओडिसी' दुनिया की सबसे कालजयी साहित्यिक कृतियों में से एक पर आधारित है. फिर भी, इसमें आने वाली मुश्किलें यह बताती हैं कि ऐतिहासिक बारीकियों के प्रति अत्यधिक निष्ठा को कलात्मक व्याख्या के विकल्प के रूप में देखना जोखिम भरा हो सकता है.
झांग ने कहा, "तकनीक कमजोर कहानी कहने की कमी को पूरा नहीं कर सकती." उन्होंने तर्क दिया कि केवल जानी-पहचानी दृश्यात्मक शैलियों को दोहराने पर केंद्रित दृष्टिकोण से तकनीकी रूप से बेहतरीन तस्वीरें तो बन सकती हैं, लेकिन उनमें एक विशिष्ट रचनात्मक दृष्टिकोण की कमी होती है. झांग ने कहा, "दर्शक किसी पात्र से सिर्फ इसलिए जुड़ाव महसूस नहीं करते कि उसे किसी असली इंसान ने निभाया है. वे उस पात्र के फैसलों, उसके बलिदानों और उसकी नियति से जुड़ाव महसूस करते हैं."
विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे तात्कालिक चुनौती यह है कि AI फिल्म निर्माण में अभी तक फीचर-लेंथ (लंबी) फिल्मों के लिए कोई पुख्ता प्रोडक्शन मॉडल तैयार नहीं हो पाया है.
छोटे वीडियो अक्सर आकर्षक दृश्यों, खास माहौल या किसी नए विजुअल स्टाइल के जरिए लोगों का ध्यान खींच सकते हैं. लेकिन 90 मिनट से ज्यादा लंबी फीचर फिल्म के लिए एक निरंतर कहानी, सुसंगत चरित्र-चित्रण, सही गति (पेसिंग) और प्रभावशाली भावनात्मक उतार-चढ़ाव की जरूरत होती है.
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