- इराक की सरकार को हर महीने सरकारी वेतन, पेंशन और कल्याण के लिए छह से आठ अरब डॉलर की जरूरत होती है
- होर्मुज नाकेबंदी के कारण मार्च में इराक के तेल निर्यात में तेरह महीनों के मुकाबले 83 प्रतिशत की गिरावट आई है
- विशेषज्ञों के अनुसार होर्मुज जलमार्ग का ट्रैफिक कम से कम 2028 तक संघर्ष पूर्व स्तर से काफी नीचे ही बना रहेगा
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी अपना असर दिखाने लगी है. इराक की हालत तो ये हो गई है कि वो अपने सरकारी कर्मचारियों को सैलरी भी नहीं दे पा रहा है. पिछले लगभग तीन महीनों से, महमूद वलीद की सैलरी मिलने में लगातार देरी हो रही है. 38 साल के इस टीचर को इराकी शिक्षा मंत्रालय से सैलरी मिलती है, लेकिन क्योंकि इराक होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल एक्सपोर्ट नहीं कर पा रहा है, इसलिए सरकार के पास कैश की कमी हो रही है.
भविष्य को लेकर इराकी चिंतित
नतीजतन, वलीद जैसे हजारों इराकी लोगों को समय पर सैलरी नहीं मिल रही है. मोसुल के रहने वाले वलीद ने DW को बताया, "इस देरी का बहुत असर पड़ता है. ज्यादातर लोगों की तरह, हमारी भी कुछ आर्थिक जिम्मेदारियां और रोजमर्रा के जरूरी खर्चे होते हैं. हमें अब और ज्यादा यकीन हो गया है कि हमें खर्चे कम करने होंगे और इमरजेंसी के लिए कुछ पैसे बचाकर रखने होंगे. कम से कम तब तक, जब तक हालात सामान्य न हो जाएं. इससे बहुत चिंता और डर महसूस होता है."
उसी शहर के एक डॉक्टर अहमद, जिन्होंने निजी कारणों से DW को अपना पूरा नाम नहीं बताया, कहते हैं, "भविष्य और भी अनिश्चित लग रहा है. इस महीने हमारी सैलरी में 10 दिन से ज्यादा की देरी हुई. स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि सरकार के पास कैश फ्लो पर्याप्त नहीं है और इसी वजह से देरी हुई. लेकिन हमें नहीं पता कि अगली बार कितनी देरी होगी."
अगस्त की शुरुआत में, सैलरी में देरी को लेकर कई छोटे-मोटे विरोध प्रदर्शन हुए. देश भर की यूनिवर्सिटीज के स्टाफ और बिजली मंत्रालय के कर्मचारियों ने भी विरोध किया. इराक के राष्ट्रीय बजट का लगभग सारा हिस्सा यानी 85% से 90% के बीच उसके तेल के निर्यात से आता है.
हर महीने 6.5 अरब डॉलर की जरूरत
साथ ही, इराक में सरकारी क्षेत्र बहुत बड़ा है और लगातार बढ़ रहा है; काम करने की उम्र वाले लगभग 3 करोड़ इराकी लोगों में से दो-तिहाई लोग अपनी आजीविका के लिए सरकार पर निर्भर हैं. इसीलिए सरकारी बजट का ज्यादातर हिस्सा अब वेतन, पेंशन और सामाजिक कल्याण पर खर्च होता है; इन भुगतानों के लिए इराकी सरकार को हर महीने 6.5 अरब डॉलर (5.6 अरब यूरो) से 8.2 अरब डॉलर के बीच रकम की जरूरत होती है.
लेकिन हाल ही में यह पैसा जुटाना बहुत मुश्किल हो गया है.
फरवरी के आखिर में इजरायल और अमेरिका की तरफ से ईरान पर बमबारी किए जाने के बाद से ईरान ने होर्मुज को बंद कर दिया है. इराक का लगभग सारा तेल यानी 80% से 90% वहीं से भेजा जाता था, क्योंकि इस क्षेत्र के दूसरे देशों के उलट, इराक के पास कोई खास वैकल्पिक रास्ता नहीं है. इस नाकेबंदी के कारण, पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में मार्च में इराक के तेल निर्यात में लगभग 83% की कमी आई. मई तक, समुद्र के रास्ते होने वाला इराक का कच्चा तेल निर्यात 97% तक गिर गया.
देर से भी सैलरी देना ज्यादा लंबा संभव नहीं
इसका मतलब है कि इराक की राष्ट्रीय आय में भी भारी कमी आई है. सरकारी सूत्रों ने कई स्थानीय मीडिया संस्थानों को बताया कि मई और जून में इराक की मासिक आय 2 अरब डॉलर से 2.3 अरब डॉलर के बीच थी, जो जरूरत से बहुत कम है. इसी तरह की खबरों की वजह से हाल ही में घबराहट भरी अफवाहें फैलीं कि सरकारी कर्मचारियों को हर महीने के बजाय अब हर 45 दिन में सैलरी मिलेगी.
पिछले कुछ दिनों में इराकी सरकार ने कई बयान जारी किए. पहले तो उन्होंने 45 दिन वाली अफवाह का खंडन किया और फिर कहा कि उनके पास अभी भी 83 अरब डॉलर का रिजर्व है, साथ ही सोना और तेल के अलावा अन्य स्रोतों से होने वाली कमाई भी है. मंगलवार को सरकार ने कहा कि इसका मतलब है कि अगले 10 से 11 महीनों तक सैलरी दी जा सकती है.
2028 तक रह सकती है यही स्थिति
हालांकि, शायद इतना काफी न हो. यूके की एडवाइजरी फर्म 'ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स' की इस हफ्ते आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि होर्मुज से होने वाला समुद्री ट्रैफिक जल्द ही सामान्य होने की संभावना नहीं है. ग्लोबल मैक्रो रिसर्च के डायरेक्टर बेन मे ने एक बयान में कहा, "कम से कम 2028 तक, तनाव के उतार-चढ़ाव के साथ ट्रैफिक का स्तर भी ऊपर-नीचे होता रहेगा, जबकि औसत रूप से यह संघर्ष से पहले के स्तर से काफी नीचे ही बना रहेगा."
बगदाद स्थित थिंक टैंक 'अल बयान सेंटर' के लिए अगस्त में जारी एक रिपोर्ट में इराकी अर्थशास्त्री अली अल-रावी ने तर्क दिया कि यह एक गंभीर संकट है, जो "सिर्फ तेल क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है." उन्होंने कहा, "अब पूरी इराकी अर्थव्यवस्था... तेल से होने वाली कमाई की बंधक बन गई है."
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