- नेपाली युवाओं ने भारतीय आर्मी में अग्निवीर योजना के तहत भर्ती के लिए पोखरा में रैली निकाली है
- भारतीय सेना में गोरखा भर्ती महामारी के बाद से रुकी हुई है और नेपाल ने 2022 में भर्ती पर रोक लगाई है
- नेपाल सरकार का तर्क है कि अग्निवीर योजना त्रिपक्षीय समझौते के प्रावधानों के खिलाफ होने के कारण रोक लगी है
नेपाल के पश्चिमी शहर पोखरा में बुधवार, 12 अगस्त को नेपाली युवाओं और भारतीय सेना के पूर्व सैनिकों के परिवारों ने रैली निकालकर मांग की कि नेपाली युवाओं को भारतीय सेना की अग्निवीर योजना के तहत अग्निवीर के रूप में भर्ती होने की अनुमति दी जाए. भारतीय सेना में गोरखा भर्ती वर्ष 2019 से रुकी हुई है. शुरुआत में यह प्रक्रिया कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित हुई थी. लेकिन इसके बाद भारत द्वारा 2022 में अग्निवीर योजना शुरू किए जाने के बाद नेपाल ने नेपाली युवाओं की भर्ती पर रोक लगा दी.
नेपाल ने ऐसा क्यों किया?
अग्निवीर योजना के तहत भर्ती होने वाले जवानों में से अधिकतम 25 प्रतिशत को चार वर्ष की सेवा के बाद स्थायी नियुक्ति दी जाती है. बाकी 75 प्रतिशत जवानों को एकमुश्त राशि देकर सेवा से मुक्त कर दिया जाता है और उन्हें पेंशन या अन्य दीर्घकालिक सेवा लाभ नहीं मिलते. नेपाल सरकार का तर्क है कि यह योजना भारत, नेपाल और ब्रिटेन के बीच 1947 में हुए त्रिपक्षीय समझौते के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है, इसलिए नेपाली युवाओं की भारतीय सेना में भर्ती रोक दी गई.
नेपाल में रोजगार के सीमित अवसरों के कारण अब भी कई युवा अग्निवीर योजना के तहत भारतीय सेना में शामिल होने के इच्छुक हैं. हालांकि, नेपाल सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने की अनुमति नहीं दी है. इसी मांग को लेकर नेपाली युवाओं के एक समूह ने पश्चिमी नेपाल के प्रमुख पर्यटन शहर पोखरा में रैली निकाली और सरकार से अपना रुख बदलकर अग्निवीर योजना के तहत भर्ती की अनुमति देने की मांग की.
उनका कहना था कि नेपाली युवाओं को खाड़ी देशों में रोजगार तलाशने के लिए मजबूर करने के बजाय भारतीय सेना में अग्निवीर के रूप में शामिल होने का अवसर दिया जाना चाहिए. सोशल मीडिया पर शेयर की गई अपनी प्रमुख मांगों में उन्होंने कहा कि अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया को तुरंत बहाल किया जाए, क्योंकि यह नेपाली युवाओं के रोजगार के अवसरों की सुरक्षा और गोरखा सैनिकों की पहचान तथा परंपरा को बनाए रखने के लिए जरूरी है.
प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि पूर्व सैनिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले और अपने नाम में 'एक्स-सर्विसमेन' शब्द रखने वाले संगठनों के पंजीकरण पर रोक नहीं लगाई जानी चाहिए. उनका कहना था कि ऐसे संगठन पूर्व सैनिकों की गरिमा, अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए आवश्यक हैं. पोखरा स्टेडियम से शुरू हुई यह रैली जिला प्रशासन कार्यालय तक पहुंची, जहां बड़ी संख्या में मौजूद लोगों की उपस्थिति में आयोजकों ने कास्की जिले के मुख्य जिला अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा.
(इनपुट- IANS)
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