जब पूरी दुनिया तेल संकट की मार झेल रही है, तेल व्यापार के लिए अहम होर्मुज के समुद्री रास्ते के खुलने का इंतजार कर रही है, उस समय एक फोन कॉल सबका ध्यान अपनी ओर खींच रहा है. ईरान और जर्मनी के विदेश मंत्रियों के बीच फोन पर बातचीत हुई है. इस बातचीत में होर्मुज में सुरक्षा और जारी संघर्ष को खत्म करने के तरीकों पर चर्चा हुई है. अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज की सुरक्षा तभी सुनिश्चित हो सकती है, जब अमेरिका अपने सैन्य अभियान रोके. उन्होंने अमेरिका पर ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी करने का भी आरोप लगाया.
अराघची ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह भी कहा कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होता है और इससे सुरक्षा या आर्थिक नुकसान होता है, तो इसके लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए. वहीं, जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने कहा कि उन्होंने अराघची से क्षेत्र के पड़ोसी देशों और अमेरिका के साथ बातचीत में रचनात्मक तरीके से शामिल होने की अपील की है. उनका कहना था कि इससे संघर्ष को खत्म करने में मदद मिल सकती है.
होर्मुज पर क्या है ईरान का प्लान
इससे पहले रविवार को ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति ने एक रणनीतिक योजना के मुख्य ढांचे को मंजूरी दी. इस योजना का मकसद फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में क्षेत्रीय सुरक्षा और लंबे समय तक विकास को मजबूत करना है. ईरान की सरकारी मीडिया प्रेस टीवी के मुताबिक, समिति के प्रवक्ता हसन काशकावी ने बताया कि सांसदों ने इस प्रस्ताव के मसौदे पर संबंधित सरकारी संगठनों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की.
काशकावी ने कहा कि समिति के सदस्यों ने संबंधित एजेंसियों से मिले मौखिक और लिखित सुझावों पर भी विचार किया. इसके बाद समिति ने योजना के मुख्य ढांचे को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी. इसके खिलाफ किसी ने वोट नहीं दिया. इस प्रस्ताव का आधिकारिक नाम “होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी की सुरक्षा और टिकाऊ प्रगति के लिए रणनीतिक कार्रवाई” है. इसे 13 जुलाई को आधिकारिक तौर पर ईरानी संसद में पेश किया गया था.
इससे एक दिन पहले शनिवार को अराघची ने कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित करने के कानूनी तरीके को लेकर ओमान के साथ समझौता लगभग पूरा होने वाला है. हालांकि, उन्होंने साफ किया कि इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को दोबारा खोलने के लिए कुछ और शर्तें पूरी करनी होंगी. इनमें अमेरिका से मुआवजा लेना भी शामिल है. ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया है.
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