- मेलोनी युवाओं के बीच लोकप्रियता खो रही हैं, खासकर 35 साल से कम उम्र के वोटरों में
- मेलोनी के गठबंधन को युवा वोटरों में तीस प्रतिशत से कम समर्थन मिला है
- पुरुष युवा दक्षिणपंथी पार्टियों को प्राथमिकता देते हैं, जबकि महिला युवा वामपंथी पार्टियों की ओर हैं
इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी भारत में खूब लोकप्रिय हैं. मगर अब वो अपने ही देश में युवाओं के बीच अलोकप्रिय हो रही हैं. एक ओपिनियन पोल में ये नतीजा निकला है. इस ओपिनियन पोल से पता चलता है कि मेलोनी की सरकार युवा वोटरों के बीच तेजी से अलोकप्रिय हो रही है. यह ट्रेंड अगले साल होने वाले राष्ट्रीय चुनाव से पहले उनके लिए भारी पड़ सकता है.
किसे कितने युवा पसंद करते हैं
यूट्रेंड पोलिंग एजेंसी के प्रमुख लोरेंजो प्रेग्लियास्को ने रॉयटर्स को बताया, "युवा वोटर साफ तौर पर सेंटर-लेफ्ट की ओर झुक रहे हैं." मेलोनी के गठबंधन—जिसमें उनकी 'ब्रदर्स ऑफ इटली' पार्टी (FDI), माटेओ साल्विनी की 'लीग' और विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी की ज्यादा उदार 'फोरजा इटालिया' शामिल हैं—को अब 35 साल से कम उम्र के लोगों के बीच 30% से भी कम वोट मिल रहे हैं. इसके उलट, डेमोक्रेटिक पार्टी (PD), 5-स्टार मूवमेंट और लेफ्ट-ग्रीन एलायंस (AVS) के दबदबे वाले विपक्षी गुट को इसी उम्र के लोगों में लगभग 50% वोट मिल रहे हैं.
पुरुष राइट तो महिलाएं लेफ्ट वोटर
2023 में मेलोनी की लोकप्रियता जब चरम पर थी, तब Youtrend के पोल से पता चला कि युवाओं के बीच उनकी पार्टी को अकेले उतना ही समर्थन मिल रहा था, जितना आज पूरे सत्ताधारी गठबंधन को मिलता है. मिलान की बोकोनी यूनिवर्सिटी की पिछले साल की एक स्टडी (जो पोलिंग फर्म SWG के डेटा पर आधारित थी) के मुताबिक, दूसरे यूरोपीय देशों की तरह इटली के युवाओं में भी जेंडर गैप (स्त्री-पुरुष के बीच अंतर) दिखता है; यहां पुरुष ज्यादातर दक्षिणपंथी (right-wing) पार्टियों को वोट देते हैं, जबकि महिलाएं वामपंथी (left-wing) पार्टियों को पसंद करती हैं.
पार्टियों के बीच सबसे बड़ा अंतर तब दिखा जब 18 से 29 साल के पुरुषों में मेलोनी की पार्टी FDI को 15% समर्थन मिला, जबकि महिलाओं में यह सिर्फ 4.2% था. वहीं, 30 साल से कम उम्र की 18% महिलाओं ने '5-स्टार' पार्टी को समर्थन दिया, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा सिर्फ 5.1% था.
रोजगार के कम मौके भी वजह
रोम की लुइस यूनिवर्सिटी में पॉलिटिकल साइंस के प्रोफेसर लोरेंजो डी सियो ने कहा कि युवाओं में सरकार के प्रति नाराजगी की मुख्य वजह आर्थिक नीति को लेकर सरकार की सुस्ती है. उन्होंने कहा, "मेलोनी ने कोई खास आर्थिक सुधार नहीं किए हैं."
बैंक ऑफ इटली के अनुसार, जर्मनी में एक युवा ग्रेजुएट अपने इटैलियन साथी के मुकाबले औसतन 80% ज्यादा कमाता है, और हर साल हजारों युवा इटैलियन बेहतर मौकों की तलाश में देश छोड़कर चले जाते हैं.
कानून-व्यवस्था की सख्ती खटक रही
चार साल पहले मेलोनी के पहले कानूनी आदेश में रेव पार्टियों पर रोक लगाने के बाद, सरकार ने 'लाइट' कैनबिस (हल्के नशे वाले गांजे) के उत्पादन, सड़कों पर होने वाले उपद्रवी विरोध-प्रदर्शनों, अवैध कब्ज़े और नाबालिगों द्वारा किए जाने वाले अपराधों को रोकने के लिए कदम उठाए हैं. पिछले साल नवंबर में 'नो मेलोनी डे' के नाम से हुए देशव्यापी छात्र विरोध-प्रदर्शन में हजारों छात्रों ने सुरक्षा आदेशों, शिक्षा बजट में कटौती और गाजा में इजरायल को मेलोनी के समर्थन के खिलाफ मार्च किया. सरकार ने हाल ही में एक कदम उठाते हुए पिछले महीने नाबालिगों की आपराधिक जिम्मेदारी से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए एक बिल पेश किया.
14 से 17 साल की उम्र के जो किशोर अपराध करेंगे, उन्हें पूरी तरह जिम्मेदार माना जाएगा, जब तक कि इसके उलट कुछ साबित न हो जाए. यह मौजूदा नियमों के ठीक उलट है, जिनके तहत जज को यह साबित करना होता था कि किशोरों को अपने कामों के नतीजों की समझ थी.
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