IND vs SL 1st Test: गॉल में श्रीलंका के खिलाफ 15 अगस्त से खेले जाने वाले पहले टेस्ट के लिए दूसरा पेसर यानी मोहम्मद सिराज का जोड़ीदार कौन होगा, यह तो समय ही बताएगा, लेकिन गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रेस कॉन्फ्रेंस में आए बॉलिंग कोच मॉर्न मॉर्कल ने साफ कर दिया कि भारत का स्पिन अटैक क्या होगा? मॉर्कल ने साफ-साफ बता दिया कि पहले टेस्ट में टीम इंडिया तीनों लेफ्टआर्म स्पिनरों के साथ मैदान पर उतरेगी. यानी ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) के दो और जोड़ी अफगानिस्तान के खिलाफ हाल ही में 'पंजा' जड़ने वाले मानव सुथार (Manav Suthar) और चाइनामैन कुलदीप यादव (Kuldeep Yadav) ही होंगे, लेकिन इन तीनों का नाम सामने आने के बाद भारत की रणनीति पर ही सवाल खड़े नहीं हो रहे, बल्कि इसने बड़ा सवाल बीसीसीआई के सामने भी खड़ा कर दिया है. चलिए डिटेल से आप समझिए और समझें की आखिर यह सवाल क्यों खड़ा हुआ है?

हाल ही में अफगानिस्तान के खिलाफ शानदार बॉलिंग और प्रतिभा को देखते हुए मानव सुथार की जगह बनती ही ती. वह खेलने जा रहे हैं गॉल में Photo Credit: @Akaran_1/X
एक ही शैली के 3 गेंदबाज?
मॉर्न मॉर्कल भले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह कहें कि तीनों लेफ्ट-आर्म अलग शैली के गेंदबाज हैं, लेकिन इसमें सच्चाई कम, बचाव ज्यादा है. अपनी कमी या बड़ी खामी का छुपाने जैसी बात ज्यााद है. बॉलिंग कोच ने कहा कि कुलदीप चाइनमैन हैं, जो कि सही है, तो मानव सुथार और जडेजा को भी अलग-अलग शैली का बॉलर उन्होंने बताया है. लेकिन यहां बड़ी लाइन यह है कि तीनों ही लेफ्टआर्म स्पिनर हैं. बता नहीं आखिरी बार किसने और कब भारत के लिए एक साथ तीन लेफ्टआर्म स्पिनरों को खेलते देखा था?
श्रीलंका टीम में दो ऑफ स्पिनर
भारत की टीम में ज्यादा लेफ्ट-ऑर्म बल्लेबाज नहीं हैं, लेकिन इसके बावजूद श्रीलंका ने दो ऑफ स्पिनरों को टीम में शामिल किया है. एक रमेश मेंडिस है, जो ऐतिहासिक रूप से गॉल में खासे सफल रहे हैं, तो वहीं दूसरे 25 साल के केशरा नुवांथा हैं, जिन्हें पहली बार टीम में जगह दी गई है. निश्चित तौर पर इनमें से कम से कम एक तो गॉल में श्रीलंकाई XI का हिस्सा बनने जा रहा है. और श्रीलंका टीम में दो ऑफ स्पिनरों का होना ही टीम इंडिया पर सवाल खड़ा नहीं करता, बल्कि इस सवाल की सबसे बड़ी वजह कुछ और ही है?
श्रीलंका XI में संभावित 3 लेफ्टी बल्लेबाज
गॉल टेस्ट में श्रीलंका की टीम में तीन लेफ्टी बल्लेबाजों को जगह मिलने की पूरी उम्मीद है. ये तीन लेफ्टी उप-कप्तान कमिंडु मेंडिस , तीन साल बाद टीम में वापसी करने वाले विकेटकीपर निरोशन डिकवेला और निचले क्रम के बॉलिंग ऑलराउंडर मिलान रत्नायके हैं. किसी भी देश की XI में खास तौर पर श्रीलंका जैसे टर्निंग ट्रैक और तुलनात्मक रूप से (भारत के मुकाबले) कहीं धीमी पिचों पर तीन लेफ्टी बल्लेबाजों का होना सामने वाली टीमों को आमंत्रण देना या ऑफ स्पिनर के लिए 'मुंह में लार' आने जैसा है क्यों खब्बू बल्लेबाज के लिए गेंद टप्पा पड़ने के बाद बाहर की ओर निकलती है. मतलब उसके लिए ऑफ स्पिनर की गेंद दाएं हाथ के बल्लेबाज जैसी लेग स्पिन की तरह काम करती है. लेकिन अगर इसके बावजूद भारतीय प्रबंधन XI में ऑफ स्पिनर को जगह नहीं देता, तो सवाल सारांश जैन से कहीं आगे निकलकर बीसीसीआई के पाले में चला जाता है.

(कैप्शन: सारांश जैन को प्रैक्टिस मैच में फेंके 15 ओवर में कोई विकेट नहीं मिला था स्रोत: सोशल मीडिया)
भरोसा नहीं जीत सके सारांश जैन!
श्रीलंका दौरे में टीम के साथ गए घरेलू क्रिकेट में चमकदार बॉलिंग से टीम में जगह बनाने वाले सारांश जैन टीम में इकलौते विशेषज्ञ ऑफ स्पिनर हैं. भारतीय प्रबंधन ने उन्हें तैयारी के लिए आयोजित वॉर्म-अप मैच में खिलाया. उन्होंने पहली पारी में 11 तो दूसरी पारी में 4 ओवर गेंदबाजी की, लेकिन सारांश एक भी विकेट नहीं चटका सके. अक्सर टर्निंग ट्रैक मिलने पर वॉर्म-अप मैच में विकेट न मिलने की एक बार को अनदेखी की जा सकती है, लेकिन ऐसा लगता है श्रीलंकाई टीम में 3 लेफ्टी (संभावना) बल्लेबाजों को देखने के बावजूद गौतम की 'गंभीर' नजर सारांश की ओर जाकर 'तीन लेफ्ट-आर्म' स्पिनरों पर ड्रिफ्ट कर गई. और नजर गई, तो सवाल बीसीसीआई के लिए भी खड़ा हो गया. ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या सारांश की नाकामी सहित प्रबंधन बाकी तमाम पहलुओं की अनदेखी कर उन्हें खिला सकता था? कहीं, यह प्रबंधन का ब्लडंर तो नहीं? या फिर यह सवाल सारांश जैन में भरोसे की कमी से ज्यादा जुड़ा है?
BCCI के लिए बन गया बड़ा सवाल
अब यह सवाल गौतम गंभीर एंड कंपनी नहीं, बल्कि BCCI के लिए भी है कि अगर गॉल टेस्ट में श्रीलंकाई टीम में 3 लेफ्टी बल्लेबाजों (संभावित) को देखते हुए अगर भारत के पास टीम में कोई स्तरीय ऑफ स्पिनर नहीं है, तो यह फिर चिंता की बात है. अगर हरभजन सिंह और रविचंद्रन अश्विन के बाद अगर देश में या घरेलू क्रिकेट में कोई ऐसा ऑफ स्पिनर टीम के लिए नहीं ही है, जो सामने वाली टीम में तीन लेफ्टी बल्लेबाजों के होते हुए XI का हिस्सा नहीं है, तो वास्तव में "दया कहीं न कहीं गड़बड़ नहीं, बहुत ही ज्यादा गड़बड़ है."
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