- यह मामला 2013 में ढाका में हिफाजत-ए-इस्लाम की विरोध रैली पर पुलिस की कार्रवाई से संबंधित है
- ट्रिब्यूनल ने फरार आरोपियों के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं, जिनमें सेना प्रमुख और अन्य अधिकारी शामिल हैं
- शेख हसीना को पिछले साल इसी ट्रिब्यूनल ने मौत की सजा सुनाई थी जो छात्र विरोध प्रदर्शन को दबाने से जुड़ी थी
बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) के अभियोजन पक्ष ने सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और 40 अन्य लोगों के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध का मामला दर्ज किया. यह मामला 2013 में ढाका में एक रैली पर पुलिस की कार्रवाई से जुड़ा है. मई 2013 में, जब हसीना की अवामी लीग सत्ता में थी, तब इस्लामी समूह 'हिफाजत-ए-इस्लाम' की विरोध रैली पर पुलिस की कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर कई लोग मारे गए थे. ये आरोप सोमवार को ICT के रजिस्ट्रार के पास जमा किए गए.
क्या है मामला
मुख्य अभियोजक अमीनुल इस्लाम ने पत्रकारों को बताया कि ट्रिब्यूनल ने 'हिफाजत-ए-इस्लाम' की विरोध रैली के दौरान (राजधानी के) शापला चत्तर में हुई हत्याओं के मामले में हसीना और 40 अन्य लोगों के खिलाफ आरोपों पर संज्ञान लिया है. ट्रिब्यूनल ने फरार लोगों के लिए गिरफ्तारी वारंट भी जारी किए, जिनमें तत्कालीन सेना प्रमुख, अन्य राजनेता और सुरक्षा अधिकारी शामिल हैं. अभियोजन पक्ष के अनुसार, पूर्व मंत्रियों, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और पत्रकारों सहित नौ हाई-प्रोफाइल आरोपी मुकदमे का सामना करने के लिए जेल में हैं.
पहले एक केस में मिली है मौत की सजा
78 वर्षीय हसीना को पिछले साल नवंबर में इसी ट्रिब्यूनल ने मौत की सजा सुनाई थी. यह सजा उन्हें छात्र-नेतृत्व वाले उस विरोध प्रदर्शन को दबाने में मुख्य भूमिका निभाने के लिए 'इन एब्सेंशिया' (उनकी अनुपस्थिति में) सुनवाई के बाद सुनाई गई थी, जिसके कारण 2024 में उनकी अवामी लीग सरकार गिर गई थी. वह भागकर भारत आ गईं और 5 अगस्त, 2024 से वहीं रह रही हैं. 5 मई, 2013 को 'हिफाजत-ए-इस्लाम' ने अपनी 13 सूत्रीय मांगों को लेकर शहर के बीचों-बीच पुलिस की इजाजत से एक बड़ी रैली की. उनकी मुख्य मांग थी कि इस्लाम और सम्मानित हस्तियों का अपमान करने वालों को कड़ी सजा देने के लिए ईशनिंदा कानून बनाया जाए.
दो पूर्व राष्ट्रपतियों के खिलाफ शिकायतें मिलीं
बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) के मुख्य अभियोजक के कार्यालय को देश के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के खिलाफ शिकायतें मिली हैं. स्थानीय मीडिया के अनुसार, यह शिकायतें उनके राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के महज दो दिन बाद दर्ज कराई गईं. रविवार को बांग्लादेश आजादी पार्टी और राष्ट्र संवाद फोरम ने अलग-अलग शिकायतें दाखिल कीं. वहीं, आजादी पार्टी ने पूर्व राष्ट्रपति एम. अब्दुल हमीद के खिलाफ भी एक अतिरिक्त शिकायत दर्ज कराई. बांग्लादेशी अखबार प्रोथोम आलो के अनुसार, शिकायत सौंपने के बाद पत्रकारों से बातचीत में आजादी पार्टी के संयोजक हासिनुर रहमान ने कहा कि दोनों पूर्व राष्ट्रपति 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित अपराधों पर चुप रहे. उनका दावा था कि उनकी यह चुप्पी उन घटनाओं के प्रति समर्थन के समान थी. वहीं, राष्ट्र संवाद फोरम ने अपनी शिकायत में मोहम्मद शहाबुद्दीन को अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का करीबी सहयोगी बताया और 2024 के प्रदर्शनों से जुड़ी हिंसा में उनकी कथित भूमिका की जांच की मांग की.
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