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बांग्लादेश के प्रधानमंत्री का दिल्ली दौरा! अगल हफ्ते PM मोदी और तारिक रहमान की हो सकती है मुलाकात

तारिक रहमान की भारत की दो दिवसीय यात्रा की योजना द्विपक्षीय भागीदारी के रूप में बनाई जा रही है. हालांकि, कार्यक्रम की ज्यादा जानकारी अभी सामने नहीं आई है.

प्रधानमंत्री बनने के बाद तारिक रहमान का यह पहला भारत दौरा होगा. (Photo: IANS/X/@BNPBdMediaCell)
  • बांग्लादेश के PM तारिक रहमान अगले हफ्ते भारत के दौरे पर आ सकते हैं.
  • PM मोदी और रहमान के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा और सीमा प्रबंधन पर बातचीत होगी.
  • अगस्त 2024 में हसीना सरकार गिरने के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव पैदा हो गया था.
नई दिल्ली:

दिल्ली और ढाका के सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया कि बांग्लादेशी प्रधानमंत्री तारिक रहमान अगले हफ्ते नई दिल्ली के दौरे पर हो सकते हैं. दोनों देशों की राजधानियों में तैयारी पहले से ही चल रही है. अगर यात्रा योजना के मुताबिक आगे बढ़ती है, तो यह बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में रहमान की पहली भारत यात्रा होगी और दोनों पड़ोसियों के बीच संबंधों में एक ऐतिहासिक क्षण साबित हो सकती है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक मीटिंग रहमान की इस यात्रा का हिस्सा है. दोनों नेताओं के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, सीमा प्रबंधन और क्षेत्रीय सुरक्षा सहित कई द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है.

जानकारों का कहना है कि दो दिवसीय यात्रा की योजना द्विपक्षीय भागीदारी के रूप में बनाई जा रही है.

फरवरी में पदभार संभालने के तुरंत बाद भारत ने तारिक रहमान को नई दिल्ली आने का निमंत्रण दिया था. नई दिल्ली ने सितंबर में राजधानी में होने वाले ब्रिक्स आउटरीच सत्र के लिए बांग्लादेश को भी आमंत्रित किया है.

पीएम मोदी-तारिक रहमान की पहली मुलाकात

पीएम मोदी और रहमान की होने जा रही मुलाकात पर नई दिल्ली और ढाका दोनों की नजर रहेगी. रहमान की सत्ता में वापसी ने बांग्लादेश में सियासी समीकरण बदल दिया है और भारत को ढाका के प्रति अपने नजरिए को फिर से व्यवस्थित करने के लिए मजबूर किया है. अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से दोनों देशों के संबंधों में गंभीर तनाव आ गया है. तब से, नई दिल्ली और ढाका के बीच कई मतभेद रहे हैं, जिनमें भारत में हसीना की मौजूदगी और बांग्लादेश द्वारा उसके प्रत्यर्पण के अनुरोध भी शामिल है.

लेकिन नई बीएनपी सरकार ने कहा है कि वह भारत के साथ काम करना चाहती है. हाल के दिनों में नए सिरे से राजनयिक संपर्क के कुछ संकेत मिले हैं. बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने अप्रैल में नई दिल्ली का दौरा किया और विदेश मंत्री एस जयशंकर से बातचीत की. भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने 10 अगस्त को ढाका में तारिक रहमान से मुलाकात की और दोनों पक्षों ने हाल ही में दोनों देशों के बीच माहौल को बेहतर बनाने के तरीकों पर चर्चा की.

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शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग, एक बड़ा मुद्दा

शेख हसीना 5 अगस्त, 2024 को बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं और तब से यहीं हैं. बांग्लादेश के एक ट्रिब्यूनल द्वारा मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाए जाने के बाद, ढाका ने नई दिल्ली से उनके प्रत्यर्पण की औपचारिक मांग की. भारत ने कहा है कि इस गुजारिश पर उचित कानूनी और राजनयिक माध्यमों से विचार किया जा रहा है.

शेख हसीना मौजूदा वक्त में भारत में मौजूद हैं.

शेख हसीना मौजूदा वक्त में भारत में मौजूद हैं.
Photo Credit: IANS

यह विवाद इस महीने की शुरुआत में तब फिर से उठ खड़ा हुआ, जब शेख हसीना ने नई दिल्ली में पत्रकारों से वर्चुअल बातचीत की. ढाका ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बांग्लादेश के खिलाफ सियासी गतिविधियों के लिए भारतीय जमीन का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. नई दिल्ली ने इस कार्यक्रम के आयोजन में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया है.

सूत्रों के मुताबिक, तारिक रहमान और भारतीय उच्चायुक्त के बीच हाल ही में हुई बैठक में भी प्रत्यर्पण का मुद्दा उठा था. दोनों सरकारों को इस विवाद पर चर्चा करने का ऐसा तरीका खोजना होगा, जिससे उनके व्यापक संबंधों पर कोई बुरा असर न पड़े.

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पानी, व्यापार और सीमा से जुड़े मुद्दे

कई व्यावहारिक समस्याएं भी हैं, जिन्हें हल करने की जरूरत है. बातचीत में व्यापार और ट्रांजिट, ऊर्जा सहयोग, सीमा प्रबंधन और कनेक्टिविटी पर ध्यान दिए जाने की उम्मीद है. भारत और बांग्लादेश के बीच लंबी जमीनी सीमा है और मजबूत आर्थिक व परिवहन संबंध हैं, इसलिए सियासी रिश्तों में सुधार का असर इन क्षेत्रों में जल्द ही महसूस किया जाएगा.

एक और अहम मुद्दा पानी के बंटवारे का हो सकता है. साल 1996 में हुई गंगा जल बंटवारा संधि दिसंबर में खत्म होने वाली है और समय सीमा नजदीक आने के साथ ही इसके नवीनीकरण पर चर्चा तेज होने की उम्मीद है.

ढाका ने कई आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर भारत से ज्यादा सहयोग की मांग भी की है. नई दिल्ली के लिए बांग्लादेश के साथ रिश्तों में स्थिरता अहम है, न सिर्फ इसलिए कि दोनों देशों की सीमाएं जुड़ी हैं, बल्कि इसलिए भी कि बांग्लादेश की रणनीतिक स्थिति और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से उसके संबंध महत्वपूर्ण हैं.

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