- ब्रिटेन की परमाणु पनडुब्बी HMS Anson अरब सागर में तैनात, हॉर्मुज के पास तनाव बढ़ा.
- विश्व स्वास्थ्य संगठन ने परमाणु खतरे और हेल्थ डिजास्टर की चेतावनी दी.
- संयुक्त राष्ट्र संघ ने कहा- यह संकट कोविड के बाद की सबसे बड़ी वैश्विक मानवीय आपदा बन सकता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले से फिलहाल पीछे हट गए हैं पर पूरी दुनिया पर इस संकट का असर दिखने लगा है. खासतौर पर तेल, व्यापार, खाद्य सुरक्षा और जियो-पॉलिटिक्स पर इसका खासा असर पड़ रहा है. हालिया घटनाओं ने इस डर को और गहरा कर दिया है क्योंकि अब ब्रिटेन भी खुल कर इस समीकरण में उतरता दिख रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन की परमाणु पनडुब्बी HMS Anson अरब सागर में पहुंच चुकी है. बताया जा रहा है कि यह पनडुब्बी 6 मार्च को ऑस्ट्रेलिया के पर्थ से रवाना हुई थी और अब अरब सागर के उत्तरी हिस्से में हॉर्मुज स्ट्रेट के पास अपनी पोजिशन ले रही है. इससे हॉर्मुज स्ट्रेट पर सैन्य दबाव बढ़ने लगा है.
बता दें कि हॉर्मुज दुनिया के सबसे अहम ऑयल रूट में से एक है. यहां से हर दिन दुनिया की करीब 20% तेल सप्लाई गुजरती है. इसी बीच ईरान के सरकारी मीडिया इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग के पत्रकारों ने हॉर्मुज के बीच से रिपोर्टिंग की. उन्होंने दिखाया कि कई जहाजों ने अपने इंजन बंद कर दिए हैं और आगे बढ़ने के लिए इजाजत का इंतजार कर रहे हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि इस समुद्री रास्ते पर डर और अनिश्चितता बढ़ रही है.
इधर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के प्रमुख टेडरॉस अधानॉम गेब्रियेसस ने स्पष्ट कहा है कि मिडिल ईस्ट का यह संघर्ष अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है. उनका कहना है कि अगर परमाणु संवेदनशील ठिकानों पर हमले होते हैं, तो इससे न केवल युद्ध की विभिषिका बढ़ेगी बल्कि लोगों के सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए भी बड़ा खतरा पैदा होगा.
इसका मतलब क्या है?
अगर परमाणु ठिकानों पर कोई हमला होता है तो इससे रेडिएशन लीक का खतरा, बड़े स्तर पर बीमारी और मौत, पानी और हवा का जहरीला होना, वो सब होगा जो जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराने बाद हुआ था. यानी ऐसी किसी भी स्थिति में यह युद्ध मानव सभ्यता के अस्तित्व के लिए बहुत बड़ा संकट बन सकता है.
यूएन ने दी कोविड जैसी वैश्विक तबाही की चेतावनी?
संयुक्त राष्ट्र संघ और वर्ल्ड फूड प्रोग्राम ने भी गंभीर चेतावनी दी है. संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि अगर यह युद्ध जल्द ही नहीं रुका, तो दुनिया को कोविड के बाद की सबसे बड़ी मानवीय आपदा झेलनी पड़ सकती है. इसका संभावित असर खाद्यान की सप्लाई चेन टूटने पर पड़ेगा. इससे गरीब देशों में भूख संकट और इससे जुड़ी अन्य परेशानियां बढ़ेंगी. लोगों का पलायन होगा और वैश्विक स्तर पर शरणार्थियों की संख्या में तेजी से इजाफा होगा.
वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP) ने भी गंभीर चेतावनी देते हुए कहा कि पूरी दुनिया में 320 मिलियन लोग पहले ही भूख से जूझ रहे हैं, अब यह युद्ध 45 मिलियन और लोगों को भुखमरी की तरफ धकेल सकता है.
वहीं WHO ने कहा कि अगर परमाणु ठिकानों पर हमले होते हैं, तो इसका असर सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं रहेगा. इससे रेडिएशन का फैलाव होगा. कैंसर और गंभीर बीमारियां, पानी और हवा में प्रदूषण फैलेगा. इसके दुष्परिणाम कई पीढ़ियों देखने को मिलेंगे.
क्या-क्या हैं संभावित खतरे?
अगर हॉर्मुज बंद होता है, तो तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं. भारत जहां अब तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें महंगी नहीं हुई हैं, उसे भी इसका दंश झेलना पड़ेगा. और अगर तेल की कीमतें बढ़ीं, तो निश्चित तौर पर महंगाई बढ़ेगी. वहीं अगर गलती से भी कोई हमला परमाणु साइट पर हुआ, तो यह युद्ध एक क्षेत्र विशेष तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक त्रासदी में तब्दील हो सकता है.
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