अमेरिका और ईरान लंबे समय के बाद युद्ध खत्म करने पर राजी हो गए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जाएगा. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा 'दुनिया के जहाजों, अपने इंजन चालू करो, तेल को बहने दो!' ट्रंप ने अमेरिकी ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिकों की नाकेबंदी हटाने के लिए भी मंजूरी दे दी है. होर्मुज का खुलना भारत के लिए भी अहम माना जा रहा है. क्योंकि इससे बिना रोकटोक के जहाजों की आवाजाही होगी. यह फैसला भारत समेत वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरा माना जा रहा है.
होर्मुज बंद होने से महंगा हुआ था तेल
दरअसल, अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच शुरु हुए युद्ध के बाद समुद्री रास्ते होर्मुज को बंद कर दिया गया था. जिससे दुनियाभर के जहाजों के पहिए थम गए थे. जहाजों के रुकने से सप्लाई चेन पर असर पड़ा था. जिससे दुनिया भर के कई देशों में तेल की कीमतों में तेजी आई थी. तेल की कीमतों के आसमान छूने से शेयर बाजारों समेत कई देशों की करेंसी धराशायी हुई थी. लेकिन लंबे समय के बाद महज 30 किलोमीटर से कुछ ज्यादा चौड़े, लेकिन बेहद अहम इस चेकपॉइंट के खुलने से वैश्विक सप्लाई चेन के वापस पटरी पर लौटने की उम्मीद है. जिससे तेल की सप्लाई भी फिर से रफ्तार पकड़ेगी.
होर्मुज से गुजरता है दुनिया का 20 प्रतिशत तेल
दुनिया का 20 प्रतिशत तेल होर्मुज से गुजरता है. हालांकि जानकारों का कहना है कि होर्मुज फिर से खुलने के बाद भी हालात के पूरी तरह सामान्य होने में अगले साल तक का समय लग सकता है. लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस समझौते के परिणाम दूरगामी होंगे. क्योंकि होर्मुज के बंद होने से एशिया में फिलीपींस जैसे देशों ने राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल की घोषणा की थी. जबकि जबकि जापान और दक्षिण कोरिया ने संकट से निपटने के लिए अपने रिजर्व तेल का इस्तेमाल किया था. भारत का भी इस पर गहरा असर हुआ था. क्योंकि होर्मुज से गुजरने वाले भारतीय जहाजों को भी लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था.
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भारत समेत दुनिया सुधरेगी तेज सप्लाई चेन
पश्चिम में, ईंधन स्टेशनों और हवाई किराए में बढ़ोतरी के रूप में इसका असर महसूस किया गया. लेकिन दोनों देशों के बीच सिर्फ समझौते की घोषणा से ही दुनिया में उम्मीद जगी है. ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क, ब्रेंट क्रूड की कीमत 4.55 प्रतिशत गिरकर 83.36 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि एशियाई बाजारों में तेजी आई है. भारत में भी बाजार सोमवार के दिन तेजी के साथ खुला है. होर्मुज जैसे ही खुलेगा और बारूदी सुरंगें हटाने का काम पूरा होगा. तो फारस की खाड़ी में फंसे तेल, गैस और ईंधन से जुड़े अन्य उत्पादों के जहाज फिर से अपनी यात्रा शुरू करेंगे. इससे सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत और कतर जैसे बड़े सप्लायर्स से फिर से तेल सप्लाई चेन की प्रक्रिया को शुरू करेंगे. जिसका बड़ा हिस्सा एशियाई बाजारों में आएगा. इसमें भारत भी शामिल होगा.
क्या भारत में सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल
होर्मुज का खुलना एक तरह से भारत के लिए बड़ी खुशखबरी माना जा रहा है. क्योंकि इंडिया दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल के इंपोर्टर्स में से एक है. होर्मुज बंद होने की वजह से तेल की सप्लाई, ढुलाई की लागत बड़ी थी. जिससे तेल की कीमतों में तेजी आई थी. लेकिन अब सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और कतर जैसे प्रमुख सप्लायर्स से भारत को सप्लाई फिर से शुरू होने से हालात बेहतर होंगे. उम्मीद है कि शिपिंग इंश्योरेंस प्रीमियम और ढुलाई की दरें कम होंगी. इंडस्ट्री से जुड़े एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि 'सरकारी फ्यूल रिटेलर्स को एक तिमाही में उतना नुकसान हुआ, जितना उन्होंने पूरे साल में मुनाफा कमाया था. अगर समझौता कायम रहता है, तो एनर्जी की सप्लाई आसान हो जाएगी और कीमतें भी कम हो जाएंगी.' यानि पेट्रोल-डीजल के दामों में गिरावट आ सकती है.
भारतीय के इन सेक्टर्स में राहत की उम्मीद
तेल की कीमतों में लगातार गिरावट से भारत का इंपोर्ट बिल कम होगा, रुपये को सहारा मिलेगा, करंट अकाउंट डेफिसिट यानि चालू खाता घाटा भी कम होगा और महंगाई का दबाव घटेगा. फ्यूल की कम लागत से ट्रांसपोर्टेशन का खर्च कम हो सकता है, मैन्युफैक्चरर्स पर दबाव कम हो सकता है और खाने-पीने की चीजों से लेकर कंस्ट्रक्शन मटीरियल तक की कीमतें कम करने में मदद मिल सकती है. इसका फायदा एविएशन, पेट्रोकेमिकल्स, फर्टिलाइजर्स, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टर्स को खास तौर पर हो सकता है, क्योंकि ये सभी एनर्जी सेक्टर के उतार-चढ़ाव से सीधे प्रभावित होते हैं.
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वैश्विक स्थिरता जरूरी
हालांकि जानकारों का कहना है कि होर्मुज खुलने से फायदा तभी होगा जब जियोपॉलिटिकल स्थिरता बनी रहेगी. जहाजों को होर्मुज से बिना रोकटोक गुजरने दिया जाएगा. क्योंकि तय समय से जब जहाज अपनी मंजिल पर पहुंचेंगे तो इसका असर दिखना शुरू होगा. लेकिन अगर मिडिल ईस्ट में संघर्ष फिर से शुरू हो जाता है, तो हालात फिर से वहीं पहुंच जाएंगे जहां से शुरू हुए थे. वहीं इस युद्ध के बाद दुनिया में शिपिंग के वैकल्पिक रास्तों की खोज की गई है. सबसे जरूरी और अहम बात यह है कि तेल और अन्य जरूरी संसाधनों व मटीरियल की सप्लाई से जुड़े हालात बदल गए हैं. ऐसे में होर्मुज खुलने के बाद भी इन्हे पटरी पर लौटने में समय लगेगा.
खाद की सप्लाई भी होगी बहाल
तेल के अलावा होर्मुज बंद होने से फर्टिलाइजर की सप्लाई भी प्रभावित हुई थी. भारत इसका भी बड़ी मात्रा में इंपोर्ट करता है. ऐसे में अरब के देशों से फर्टिलाइजर की सप्लाई फिर से शुरू होगी. दरअसल, फर्टिलाइजर की सप्लाई का असर एशिया में मई-जुलाई के बीच बुवाई के मौसम पर पहले ही पड़ चुका है. लेकिन अगर और रुकावटें आती हैं तो फिर फसलों की पैदावार और कम सकती है. एशियन डेवलपमेंट बैंक के चीफ इकोनॉमिस्ट अल्बर्ट पार्क ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया है कि इसका असर देर से दिखेगा, यानी उत्पादन में कमी का सबसे बुरा असर शायद साल के आखिर में ही देखने को मिलेगा. लेकिन अच्छी खबर यह है कि अब सप्लाई फिर से शुरू हो सकती है.
होर्मुज खुलने के बाद भी हालात देर से होंगे सामान्य
ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से होर्मुज लंबे समय से बंद था. ऐसे में भले ही होर्मुज खुलने वाला है. लेकिन हालात सामान्य होने में समय लगेगा. एनर्जी कंसल्टेंसी 'वुड मैकेंज़ी' में एशिया पैसिफिक के वाइस चेयरमैन जोशुआ एनगु ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि 100 दिनों से ज्यादा दिन तक चली लड़ाई की वजह से आर्थिक दिक्कतें पैदा हुई हैं, जिनका हल कम समय में नहीं हो सकता है. मार्च में हमने तेल की जो कीमत $100 देखी थी, उसका पूरा असर तीन से छह महीने बाद ही दिखेगा. यानि साल के आखिर तक ही दामों में गिरावट की संभावना बन रही है. एकदम से दाम कम होने की संभावना नहीं है.
ट्रैफिक शुरू होने में लगेगा समय
टफ्टस यूनिवर्सिटी के फ्लेचर स्कूल में मैरीटाइम स्टडीज़ के प्रोफ़ेसर रॉकफ़ोर्ड वेट्ज़ ने अल जजीरा को बताया कि होर्मुज से होकर गुजरने वाला समुद्री ट्रैफिक पहले जैसा होने में महीनों का समय लग सकता है. उन्होंने बताया कि शिपिंग में यह रुकावट किसी की उम्मीद से कहीं ज्यादा लंबी रही है. शिपिंग इंडस्ट्री शुरू में पूरी तरह से काम शुरू करने में हिचकिचाएगी. इसके अलावा युद्ध में कतर, सऊदी अरब और कुवैत समेत कई खाड़ी देशों में तेल और गैस दोनों के प्रोडक्शन प्लांट को नुकसान पहुंचा है. जिन्हें ठीक होने में समय लगेगा. ऐसे में एक्सपर्ट का मानना है कि सप्लाई शुरू तो होगी. लेकिन हालात पटरी में देर से ही आ सकते हैं.
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