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बांग्लादेश-म्यांमार बॉर्डर पर 'आशा का स्वर्ग' बना पाताल लोक, यहां हर कदम पर बिछा है खतरा

म्यांमार लैंडमाइन के कारण होने वाली मौतों के मामले में दुनिया का सबसे खतरनाक देश है. उसने बांग्लादेश से लगने वाली सीमा पर ऐसे लैंडमाइंस हर कदम पर बिछा रखे हैं.

बांग्लादेश-म्यांमार बॉर्डर पर 'आशा का स्वर्ग' बना पाताल लोक, यहां हर कदम पर बिछा है खतरा
Bangladesh-Myanmar border: म्यामांर से लगे बांग्लादेश के जंगलों में छिपकर बैठी मौत
  • म्यांमार ने बांग्लादेश से लगी सीमा के घने जंगलों में लैंड माइंस लगा रखे हैं, जिससे स्थानीय लोगों की जान जा रही
  • बांग्लादेश के बंदरबन जिले के कई निवासी लकड़ी इकट्ठा करते समय विस्फोटों में गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं
  • म्यांमार लैंड माइंस के कारण होने वाली मौतों के लिहाज से दुनिया का सबसे खतरनाक देश बन चुका है
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गृहयुद्ध से पल-पल तबाह हो रहे म्यांमार के साथ लगी बांग्लादेश की सीमा पर मौजूद घने पहाड़ी जंगलों में लैंड माइंस (बारूदी सुरंगें) लगे हैं. बांग्लादेश के लोगों के लिए भले म्यांमार की जंग खुद की बनाई हुई नहीं है, लेकिन इन लैंड माइंस के कारण उनकी जानें जा रही हैं, या वे अपने अंगों को खो रहे हैं. कुछ ऐसा ही 40 साल के अली हुसैन के साथ हुआ है. अली हुसैन पिछले साल, यानी 2025 की शुरुआत में जलाने के लिए लकड़ी इकट्ठा कर रहे थे, जब एक विस्फोट ने उनकी जिंदगी तबाह कर दी.

न्यूज एजेंसी एएफफी की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने एएफपी की  बताया, "मैं गांव वालों के साथ जंगल में गया था. अचानक एक विस्फोट हुआ और मेरा पैर उड़ गया. दर्द इतना ज्यादा था कि मैं अपनी पूरी ताकत लगाकर चीख रहाथा." चीख को सुनने के बाद बहते खून को रोकने के लिए पड़ोसी दौड़ पड़े. उन्होंने कहा, "उन्होंने मुझे उठाया, मेरे कटे पैर को जमा किया और अस्पताल ले गए."

सीमा से लगे बांग्लादेश के बंदरबन जिले में एक छोटी सा गांव है आशाटोली, यानी "आशा का स्वर्ग". हालांकि यहां के लोगों के लिए विदेशी युद्ध के हथियारों (लैंड माइंस) ने जंगलों, खेतों और फुटपाथों को घातक बना दिया है.
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म्यांमार से लगती है बांग्लादेश की 271 किमी लंबी सीमा

म्यांमार के साथ बांग्लादेश की 271 किलोमीटर पूर्वी सीमा जंगलों से होकर गुजरती है. इस सीमा का अधिकांश भाग मार्क नहीं है, यानी यह बता पाना मुश्किल है कि कहां बांग्लादेश खत्म होता है और कहां म्यांमार शुरू है. जंगलों के साथ ही यहां नदियां भी हैं. सीमा के पास रहने वाले ग्रामीण हर दिन इस सीमा को पार करते हैं. उनके परिवार पीढ़ियों से लकड़ी इकट्ठा करने या छोटे व्यापार के लिए ऐसा करते आ रहे हैं.

वापस अली हुसैन पर आते हैं. जब उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया तो सर्जन ने उनके पैर घुटने के ऊपर से काट दिया. विस्फोट के बाद के महीनों को याद करते हुए उन्होंने अपने घर के चारों ओर खड़ी पहाड़ी की ओर इशारा करते हुए कहा, "मेरी पत्नी को मुझे अपनी पीठ पर ले जाना पड़ा था."

एक साल बाद, हुसैन एक नकली पैर और बैसाखी के साथ चलते हैं. हालांकि इस दुर्घटना के बाद वह रबर बागान में अपनी नौकरी पर नहीं लौट सके. उन्हें दवा के लिए प्रतिदिन 300 टका (222 रुपए) की आवश्यकता होती है. अब उनकी जगह उनके दो छोटे बेटे स्कूल के बाद जलाऊ लकड़ी इकट्ठा करने का खतरनाक काम करते हैं. यह कहानी सिर्फ अली हुसैन के साथ नहीं है.

47 साल के मोहम्मद अबू तालेब कहते हैं कि उनके पिता और पूर्वज जंगल से लकड़ी इकट्ठा करते थे और उन्होंने कोई अन्य व्यापार नहीं सीखा है. वह भी अनजाने में म्यांमार में घुस गए थे. अब बैसाखी के सहारा चलने वाले अबू तालेब ने कहा, "मैंने सूखी पत्तियों के ढेर पर पैर रखा और एक विस्फोट हो गया. इसने मेरी पूरी जिंदगी छीन ली."

अब उनका 10 साल का बेटे परिवार की मदद के लिए स्कूल छोड़ चुका है. तालेब ने कहा कि अपने नकली पैर की मरम्मत और मेडिकल जांच के लिए आने-जाने का खर्च लगभग 7 हजार भारतीय रुपए है. यह रकम जीवित रहने के लिए संघर्ष कर रहे एक परिवार के लिए असंभव बोझ है.

इसी तरह 23 साल के नुरुल अमीन ने एक गाय को सीमा पार लाने की कोशिश में अपना पैर खो दिया, दर्द के कारण उनकी यादें धुंधली हो गईं. उन्होंने एएफफी को बताया, "वे मुझे अपने कंधों पर उठाकर अस्पताल ले गए." अब वह इस बात से अधिक चिंतित हैं कि उनकी महीने की कमाई कम होकर 2-3 हजार तक आ गई है. उन्होंने कहा, "यह एक परिवार के लिए पर्याप्त नहीं है. मेरे पास जीवित रहने का कोई अन्य रास्ता नहीं है."

नवंबर में, बांग्लादेश बॉर्डर फोर्स के एक जवान की मौत हो गई जब एक लैंडमाइंस ने उसके दोनों पैर उड़ा दिए. बांग्लादेश पुलिस का कहना है कि 2025 में बारूदी सुरंगों से कम से कम 28 लोग घायल हुए.

जानलेवा है म्यांमार से लगी सीमा

इंटरनेशनल कैंपने फॉर बैन ऑन लैंडमाइंस के अनुसार, म्यांमार लैंडमाइन के कारण होने वाली मौतों के लिए दुनिया का सबसे खतरनाक देश है. इस संगठन ने पाया है कि म्यांमार में ऐसे लैंडमाइंस का बड़े पैमाने पर उपयोग बढ़ा है जिसे कई देशों ने बैन कर रखा है. 2024 में म्यांमार में लैंडमाइंस के कारण 2,000 से अधिक मौतें दर्ज की गईं और उसके पिछले वर्ष की रिपोर्ट की गई कुल संख्या से यह दोगुनी थी.

बांग्लादेश ने म्यांमार की सेना और प्रतिद्वंद्वी हथियारबंद बलों पर माइंस लगाने का आरोप लगाया है.

(इनपुट- एएफपी)

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