- बांग्लादेश और नेपाल में जेन जेड युवाओं ने सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन कर सत्ता परिवर्तन करवाया
- बांग्लादेश में छात्र नेताओं की नई पार्टी नेशनल सिटिजन पार्टी ने चुनाव में केवल पांच सीटें जीतीं
- नेपाल में जेन जेड ने कट्टरता से दूर रहकर पुराने राजनीतिक सिस्टम के खिलाफ नया नेतृत्व चुना
बांग्लादेश और नेपाल में सरकार के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व जेन जेड ने किया. ‘जेन जेड' 1997 से 2012 के बीच पैदा हुए युवाओं को कहा जाता है. दोनों ही देशों के युवाओं को अपनी सरकार में भरोसा नहीं दिखा और नतीजा सरकार को गद्दी छोड़नी पड़ी. अंतरिम सरकार बनी और उसके बाद चुनाव हुआ. बांग्लादेश में जेन जेड का नेतृत्व करने वाली पार्टी का सूपड़ा साफ हो गया, लेकिन नेपाल के रुझान बता रहे हैं कि जेन जे का नेतृ्त्व करने वाली पार्टी बहुमत से सरकार बना सकती है. आखिर बांग्लादेश और नेपाल के चुनाव में ये अंतर क्यों?
बांग्लादेश का हाल जानिए
बांग्लादेश में प्रदर्शन से उभरे छात्र नेताओं ने चुनाव से पहले नई पार्टी बनाई थी, जिसका नाम जातीय नागरिक पार्टी (JNP) रखा गया था. इसे नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के नाम से भी बांग्लादेश में जाना जाता है. प्रदर्शन में शामिल छात्रों को बांग्लादेश चुनाव में महज पांच सीटें मिलीं. यानी जिन छात्रों ने सड़कों पर उतरकर कई महीनों तक प्रदर्शन किया और सरकार को गिराने में अहम रोल निभाया, उन्हें चुनाव में इसका ज्यादा फायदा नहीं मिल पाया.
क्यों फेल हुए
बांग्लादेश में सत्ता को अपने हाथों से चलाने का दावा कर रहे छात्र नेताओं को चुनाव में नुकसान की सबसे बड़ी वजह नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) का चुनाव से ठीक पहले कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी के कुछ दलों के साथ हाथ मिलाना था. जमात के बहकावे में छात्र संगठन कट्टरता के रास्ते पर निकल गए थे. वे एक देश और एक धर्म को टारगेट करने लगे थे. वहीं विद्रोह के समय इनका निशाना सरकार की खामियां थीं. इसके कारण बांग्लादेश की आम जनता ने ज्यादा सेकुलर और संतुलित नजर आने वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को चुन लिया. तारिक रहमान को युवाओं का भी समर्थन मिला. कारण वो किसी एक देश और धर्म को बांग्लादेश की दुर्दशा का जिम्मेदार ठहराकर आवाम को गुमराह नहीं कर रहे थे, बल्कि सरकार को ठीक ढंग से चलाने का वादा कर रहे थे.
नेपाल में क्या हो रहा
नेपाल में छह महीने पहले हुए ‘जेन जेड' के विरोध प्रदर्शन और फिर सितंबर में केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार के गिरने के बाद हुए पहले आम चुनाव में शुक्रवार को जारी मतगणना के रुझानों के अनुसार पूर्व रैपर बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली नवगठित राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) भारी जीत की ओर बढ़ रही है. चुनाव आयोग के अनुसार, अपराह्न दो बजे तक जिन 94 निर्वाचन क्षेत्रों में मतगणना चल रही थी, उनमें से 70 में आरएसपी आगे चल रही है, जबकि नेपाली कांग्रेस, सीपीएन-यूएमएल और नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी छह निर्वाचन क्षेत्रों में आगे चल रही हैं.
नेपाल के युवा कैसे हुए पास
नेपाल के युवा किसी कट्टरता या देश के खिलाफ नफरत के जाल में नहीं फंसे. उन्हें अपनी तरक्की चाहिए थी और इसके लिए उन्होंने किसी देश या समुदाय को दुश्मन समझने की जगह पुराने पड़ चुके सिस्टम के खिलाफ लड़ाई शुरू की. वो न तो राजशाही की तरफ गए और न ही राजशाही के बाद सत्ता भोग रहे नेताओं के पास. उन्होंने अपना नेता एक नये चेहरे को चुना. बालेंद्र शाह पहले से ही नेपाल में युवा नेता के रूप में लोकप्रिय थे. जेन जेड ने उनको अपना नेता चुना तो उन्होंने बहुत सावधानी से चुनावी मोर्चे को संभाला. उनके चुनाव अभियान के दौरान किसी तरह की कट्टरता नहीं दिखी. वो सिर्फ और सिर्फ नेपाल की बेहतरी की बात करते दिखे और इसका नतीजा अब रुझानों में नजर आने लगा है.
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