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Artificial intelligence अब खुद अपना ‘सक्सेसर’ बनाएगा, AI पर एंथ्रोपिक ने जो बताया वो बेहद चौंकाने वाला

एंथ्रोपिक के सह-संस्थापक जैक क्लार्क और एंथ्रोपिक इंस्टीट्यूट की प्रमुख मरीना फावारो ने एक ब्लॉग पोस्ट में लिखा है कि AI अब उस चरण में पहुंच रहा है, जहां वह सिर्फ इंसानों का टूल नहीं रहेगा. AI धीरे-धीरे खुद अपने अगले वर्जन को बनाने में सक्षम हो सकता है.

Artificial intelligence अब खुद अपना ‘सक्सेसर’ बनाएगा, AI पर एंथ्रोपिक ने जो बताया वो बेहद चौंकाने वाला
एंथ्रोपिक का कहना है कि अगर AI की कंप्यूटिंग ताकत बढ़ा दी जाए, तो वो खुद-ब-खुद अपने अगले युग के AI को डिजाइन और डेवलप करने में सक्षम होंगे
Anthropic
  • AI केवल टेक्नोलॉजी अपग्रेड नहीं कर रहा, इसके पूरे स्ट्रक्चर में ही बदलाव आ रहा है.
  • AI खुद ही खुद को बेहतर बनाने की क्षमता की ओर बढ़ रही हैं.
  • AI खुद अपना सक्सेसर बनाने लगे, तो यह मानव इतिहास की सबसे बड़ी तकनीकी छलांग और सबसे बड़ी चुनौती भी हो सकती है.

दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI जिस रफ्तार से आगे बढ़ रहा है, उसने टेक्नोलॉजी की पूरी परिभाषा बदल कर रख दी है. लेकिन AI की इस बढ़ती रफ्तार के बीच लगातार ऐसे संकेत भी मिल रहे हैं जो एक बड़े बदलाव की चेतावनी भी हैं. दरअसल, AI इंसानों का मोहताज नहीं रह जाएगा, क्योंकि जिस तेजी से उसमें डेवलपमेंट आ रहा है, वो खुद ही अपना सक्सेसर बनाने की दिशा में बढ़ रहा है. एंथ्रोपिक ने एक ब्लॉग में लिखा है कि वो खुद ही सिस्टम को अपने काम का एक बड़ा हिस्सा सौंप रहे हैं, जिससे उनका काम जल्दी हो रहा है.

एंथ्रोपिक का यह भी मानना है कि अगर इस ट्रेंड को और आगे ले जाया जाए और AI की कंप्यूटिंग ताकत बढ़ा दी जाए, तो वो खुद-ब-खुद अपने अगले युग के AI को डिजाइन और डेवलप करने में सक्षम होंगे.

अगर AI खुद के वर्जन को बनाने में सक्षम हो गया तो यह टेक्नोलॉजी के इतिहास में एक बहुत बड़ी उपलब्धि होगी. इसके साइंस, हेल्थकेयर और अन्य क्षेत्रों को जहां बहुत फायदा पहुंच सकता है. वहीं AI सिस्टम पर इंसानों का कंट्रोल खोने का जोखिम भी बढ़ सकता है. तो अगर सिस्टम अपने अगले वर्जन या सक्सेसर को पूरी तरह खुद ही बनाने में सक्षम हो जाएं तो उन्हें सुरक्षित रखना, उनकी निगरानी करना और वो किस तरह काम करें उसे आकार देना बेहद अहम होगा.

इसे रिकर्सिव सेल्फ इम्फ्रूवमेंट कहा गया है, यानी AI का खुद को लगातार बेहतर बनाते जा रहा है. रिपोर्ट ने स्पष्ट तौर पर यह बताया है कि यह बदलाव बहुत तेजी से हो रहा है, जिसके लिए शायद पूरी दुनिया तैयार ही नहीं है.

AI अब सिर्फ मददगार नहीं, खुद बन रहा है डेवलपर

कुछ साल पहले तक AI का रोल बहुत सीमित था. इंसान कोड लिखते थे और AI सिर्फ सुझाव देता था.

2023 से पहले तक AI सिर्फ छोटे कोड स्निपेट्स बनाने तक सीमित था. फिर 2023 से 2025 के बीच चैटबोट्स ने डेवलपर्स की मदद शुरू की. वे कोड लिखने, सुधारने और समझाने लगे.

2025 से 2026 आते आते AI एजेंट्स ने पूरे पूरे कोड फाइल को लिखना शुरू कर दिया. अब स्थिति उससे और आगे बढ़ चुकी है, जहां AI खुद कोड रन करता है. कई बार दूसरे AI एजेंट्स को टास्क भी सौंप देता है.

एंथ्रोपिक के अंदर इस्तेमाल हो रहे क्लाउड जैसे सिस्टम्स अब डेवलपमेंट प्रोसेस का बड़ा हिस्सा खुद संभाल रहे हैं.

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Photo Credit: artificial intelligence

अब AI लिख रहा है 80% कोड

रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला दावा है कि एंथ्रोपिक में अब 80% से ज्यादा कोड AI लिख रहा है.

पहले इंजीनियर्स खुद कोड लिखते थे. अब उनका काम बदल गया है. वो गोल तय करते हैं और AI को निर्देश देते हैं, फिर AI जो काम करके देता है उसके आउटपुट को वो रिव्यू करते हैं.

इस बदलाव का असर काम करने की क्षमता पर भी दिख रहा है. रिपोर्ट कहती है कि इंजीनियर्स अब पहले के मुकाबले करीब 8 गुना अधिक कोड को अंतिम रूप दे रहे हैं.

मतलब साफ है कि AI ने सिर्फ काम आसान नहीं किया, बल्कि काम की गति और पैमाने दोनों को बदल दिया है.

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Photo Credit: Artificial Intelligence future

AI कैसे तेजी से सीख रहा है?

एंथ्रोपिक की रिपोर्ट के अनुसार AI की क्षमता इस समय महीने-दर-महीने बहुत तेजी से बढ़ रही है.

पहले AI सिर्फ कुछ मिनट के टास्क कर सकता था. फिर कुछ घंटे के टास्ट आने लगे. अब AI ऐसे कामों को बड़ी आसानी से कर रहा है जो एक इंसान कुछ घंटे का कुछ दिनों में पूरा किया करते थे.

रिपोर्ट में कहा गया है कि गूढ़ से गूढ़ मुश्किलों, कोडिंग को पूरा करने की उसकी क्षमता हर महीने करीब चार गुना तेज हो रही है.

मुश्किल सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग टेस्ट में कुछ साल पहले AI का प्रदर्शन सिंगल डिजिट में हुआ करता था, लेकिन अब वह करीब-करीब एकदम सटीक प्रदर्शन कर रहा है.

कोर बेंच जैसे रिसर्ट टेस्ट में 20% के पहले के प्रदर्शन को AI अब 100% पर ले आया है.

मैंने करीब एक साल पहले क्लाउडिफाइंग पर जोर देना शुरू किया था. जबरदस्त अनुभव रहा. अब करीब 5 महीने हो गए मैंने खुद कोई कोड नहीं लिखा है.

एंथ्रोपिक के एक कर्मचारी

खुद ही प्रयोग भी कर रहा है AI

पहले AI निर्देशों को फॉलो किया करता था लेकिन अब वह उससे कहीं आगे बढ़ चुका है.  अब AI खुद ही एक्सपेरिमेंट को डिजाइन कर रहा है, कोड रन कर रहा है, रिजल्ट को जांच रहा है उसका विश्लेषण कर रहा है और अगले स्टेप्स क्या होंगे यह भी तय कर रहा है.

एंथ्रोपिक की रिपोर्ट में इसका एक उदाहरण दिया गया. AI को रिसर्च से जुड़ी एक समस्या दी गई. उसने उसके संभावित जवाब के लिए कई प्रयोग चलाए और अंत में करीब-करीब पूरे समाधन तक पहुंच गया. इसमें इंसानी भूमिका उसे केवल निर्देश देने तक सीमित रह गई.

रिपोर्ट में एक भविष्य की स्थिति का जिक्र है जिसे क्लोजिंग द लूप कहा गया है. इसका मतलब है कि AI खुद मॉडल डिजाइन करेगा, उसे ट्रेनिंग देगा और फिर उसी से बेहतर मॉडल बनवाएगा.

यानी AI भविष्य के अपने वर्जन को लगातार बेहतर से बेहतर बनाता रहेगा.

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इंसान नहीं हैं तैयार

एंथ्रोपिक का कहना है कि इसके लिए इंसान इस समय तैयार नहीं है. रिपोर्ट इशारा करती है कि AI की ये ताकत गवर्नेंस, रेगुलेशन और सेफ्टी सिस्टम से बहुत तेजी से आगे निकल रही है.

इस ब्लॉग में लिखा गया है कि दुनिया ने दूसरी जटिल टेक्नोलॉजी (जैसे, इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेस ट्रीटी) के लिए वेरिफिकेशन सिस्टम बनाए हैं, लेकिन उन सिस्टम को भरोसे लायक बनाने में दशकों लगें. AI के मामले में हमारे पास उतना समय नहीं है.

इस ब्लॉग में लिखा गया है कि जिस तरह परमाणु हथियारों पर अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण लगाया गया था, वैसा ही कुछ एआई के साथ भी करना होगा. हालांकि, उनका मानना है कि एआई रोकने के लिए एक सिस्टम विकसित करना मिसाइलों को रोकने से कहीं ज्यादा कठिन है.

हालांकि, समस्या यह नहीं है कि AI क्या कर सकता है, बल्कि यह है कि इंसान उसे कितना समझ पाएगा और क्या उस पर नियंत्रण कर सकेगा?

बेशक, आज जो सिस्टम हैं वे उस गति के लिए नहीं बने हैं जिस गति से AI खुद में तेजी से बदलाव ला रहा है. उसे उतनी ही तेजी से बदलना होगा जिस तेजी से AI खुद में खुद ही बदलाव ला रहा है.

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AI बनाने लगेगा खुद का सक्सेसर

जब AI खुद का सक्सेसर बनाने लगेगा तब दुनिया का बैलेंस बदल सकता है.  इंसान केवल गोल सेट करने वाला बन कर रह जाएगा. लेकिन जिस तेजी से AI खुद में बदलाव ला रहा है, खतरा ये है कि उसे बनाने का पूरा सिस्टम ही मशीन संचालित हो सकता है.

तो होगा ये कि, तब AI केवल अपनी गति ही नहीं बढ़ाएगा बल्कि निर्णय लेने वाला भी बन सकता है. यही वो समय होगा जिसे लेकर सबसे अधिक खतरे की आशंका जताई जा रही है.

तो क्या हमारे हाथ से कंट्रोल निकल जाएगा?

यह सवाल रिपोर्ट का सबसे गंभीर हिस्सा है. अगर AI लगातार खुद को सुधार करता रहा और इंसान सिर्फ उसे निर्देश देने तक सीमित रह गया, तो उसे कंट्रोल करने का केंद्र भी धीरे-धीरे इंसान से हट कर खुद AI के हाथों में जाने का खतरा है. यानी भविष्य में AI खुद ही तय करेगा कि उसे क्या करना है और क्या नहीं.

एंथ्रोपिक की रिपोर्ट कहती है कि AI अब किसी टास्ट को करने से आगे बढ़कर उसकी योजना और उसे बेहतर बनाने में भी शामिल हो रहा है.

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