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चाहे जितना भी एडवांस हो आपका सिस्टम, आ रहा है AI का ऐसा शातिर मॉडल जो कुछ भी कर लेगा आसानी से हैक

AI पर काम करने वाले बगैर सोचे समझे इसके साथ प्रयोग कर रहे हैं और अनजाने में हैकर्स के लिए रास्ता आसान बना रहे हैं.

चाहे जितना भी एडवांस हो आपका सिस्टम, आ रहा है AI का ऐसा शातिर मॉडल जो कुछ भी कर लेगा आसानी से हैक
  • AI पर काम करने वाले बगैर सोचे समझे इसके साथ प्रयोग कर रहे हैं.
  • इससे अनजाने में वो हैकर्स के लिए रास्ता आसान बना रहे हैं.
  • एंथ्रोपिक Mythos पर काम कर रहा है. यह इसी साल बड़े स्तर पर साइबर हमलों की संभावनाएं बढ़ा सकता है.
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AI की बड़ी कंपनियों और अमेरिकी सरकार के बड़े अधिकारियों ने बताया है कि एंथ्रोपिक, Open AI और अन्य बड़ी टेक कंपनियां जल्द ही ऐसे नए मॉडल लॉन्च करने पर विचार कर रही हैं जो एडवांस सिस्टम को भी आसानी से हैक करने में काफी हद तक माहिर होंगे. एंथ्रोपिक ने सरकार के शीर्ष अधिकारियों को ये बताया है कि वो अभी एक मॉडल Mythos पर काम कर रही है, जो पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है, पर यह इसी साल बड़े स्तर पर साइबर हमलों की संभावनाएं बढ़ा सकता है.

यह मॉडल AI एजेंट्स को इस कदर एडवांस बना देता है कि वे खुद ही बहुत सटीक और स्मार्ट तरीके से काम कर सकते हैं. ये कॉरपोरेट वर्ल्ड हो या सरकारी सिस्टम, सभी जगह आसानी से घुस सकते हैं. किसी हैकर के लिए ये उसके सपनों के हथियार जैसा हो सकता है. इसमें यह भी जानकारी दी गई है कि इस साल बड़े पैमाने पर कोई साइबर हमला हो सकता है. जिसमें कई कंपनियां आसानी से इसका शिकार हो सकती हैं. 

बात अगर Mythos की करें तो Fortune को Anthropic के कुछ ऐसे ब्लॉग पोस्ट मिले हैं जिसमें इसके बारे में बताया गया है. इस पोस्ट में कहा गया है कि यह मॉडल अभी साइबर क्षमताओं के मामले में किसी भी दूसरे AI मॉडल से कहीं आगे है.

अनजाने में हैकर्स के लिए बना रहे रास्ता आसान

इसमें बताया गया है कि AI पर काम करने वाले बगैर सोचे समझे इसके साथ प्रयोग कर रहे हैं और अनजाने में हैकर्स के लिए रास्ता आसान बना रहे हैं. पिछले साल ही एंथ्रोपिक्स ने पहली बार जब पहली बार यह बताया था कि AI खुद साइबर हमले कर रहे हैं. फिर एक चीन से जुड़ा ग्रुप AI एजेंट्स के इस्तेमाल से करीब 30 ग्लोबल टारगेट्स को हैक कर रहा था, तब वहां भी करीब-करीब 90 फीसद काम AI ने खुद ही किया था. ये तो तब कि बात है जब ये AI एजेंट्स इतने अधिक एडवांस भी नहीं हुए थे और लोगों ने इनके साथ एक्सपेरिमेंट करना शुरू ही किया था. 

लेकिन कुछ ही दिनों में AI के नए टूल्स, नए मॉडल्स आए जो पहले से भी अधिक पावरफुल हैं. ये एजेंट्स खुद ही सोच सकते हैं, समझ सकते हैं, काम कर सकते हैं और जरूरत के मुताबिक काम करने के नए तरीके भी निकाल सकते हैं. ये न थकते हैं, न रुकते हैं. यानी इनकी कोई लिमिट नहीं है.  

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एक अकेला 'विलेन' देगा बड़े हमले को अंजाम

इसे ऐसे समझिए कि आने वाले वक्त में एक ऐसी जगह पर भरे होंगे वैसे खतरनाक और स्मार्ट अपराधी, जो कभी सोते नहीं, हर वक्त कुछ नया सीखते रहते हैं और तब तक नहीं रुकते जब तक कि उनका काम सफलतापूर्वक पूरा न हो जाए. फर्क बस इतना होगा कि इनकी संख्या अनंत होगी क्योंकि गलत इरादों के साथ कंप्यूटिंग की पावर रखने वाले शातिर अपने हमलों को इतना बड़ा बना देंगे जिसकी कल्पना तक नहीं की जा सकती है. और सबसे दिलचस्प तो ये कि इसके लिए किसी बड़ी टीम की जरूरत तक नहीं होगी, एक अकेला 'विलेन' भी इसे अंजाम दे सकता है. 

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डीपफेक से भी बड़ा खतरा

कई बार ये AI एजेंट्स अनजाने में कंपनियों के अंदरूनी सिस्टम से जुड़ जाते हैं, जो साइबर अपराधियों को एक नया रास्ता दे देता है. टेक इंडस्ट्री में इसे Shadow AI कहा जाता है. साइबर सिक्योरिटी न्यूज साइट डार्क रिडिंग की एक सर्वे में 48% साइबर एक्सपर्ट्स ने माना कि 2026 में साइबर अटैक के लिए सबसे अधिक एजेंटिक एआई का इस्तेमाल होगा, जो डीपफेक से भी बड़ा खतरा है.

AI के साथ क्या न करें?

यानी किसी भी कंपनी में काम कर रहे हर व्यक्ति को यह समझना जरूरी है कि AI एजेंट्स का इस्तेमाल करना और उसके साथ किसी भी सेंसेटिव डेटा को शेयर करना कितना खतरनाक हो सकता है. कंपनियों के लीडर्स को इसे गंभीरता से लेना होगा. क्या इसका मतलब ये है कि कंपनियां AI के साथ काम करना बंद कर दें, तो इसका जवाब है बिल्कुल नहीं. AI एजेंट्स के साथ सुरक्षित एक्सपेरिमेंट कर सकते हैं पर बड़े पैमाने पर कुछ भी शेयर करने से बचना चाहिए और कंपनियों को इसके लिए सख्त नियम बनाने होंगे.

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