Viral Video: सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से ट्रेंड कर रहा है, जिसमें एक युवक नीले रंग की सिंगल सीटर गाड़ी में बैठकर हवा में उड़ते हुए नजर आ रहा है. दिखने में ये बहुत छोड़ी सी है और इसमें पहियों के बजाय चारों तरफ कुल 8 पंखड़ियां लगी हुई हैं. इन्हीं की मदद से वो हरे भरे घास के मैदान के बीच से टैक ऑफ करता है और करीब 20 फीट की ऊंचाई पर रहते हुए पूरे ग्राउंड का चक्कर लगाकर वापस उसी जगह सुरक्षित लैंड कर लेता है. ठीक 1 मिनट 37 सेकंड के इस वीडियो को लोग खूब पसंद कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं कि सरकार मदद करे या न करे, लेकिन प्रतिभाएं गतिशील होकर अपना काम करती रहती हैं.
बिजली से चलती है ये गाड़ी, आर्मी हेलीपैड पर हुआ टेस्ट
जब इस वीडियो की पड़ताल की गई तो पता चला कि ये वीडियो गुरुवार सुबह उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में आर्मी हेलीपैड पर शूट किया गया है. जो शख्स इस उड़ने वाली गाड़ी को चला रहा है उसका नाम रवि टम्टा है, जो पेशे से हपिडा स्काई प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी का फाउंडर और सीईओ है. ये प्रोटोटाइप उन्हीं की कंपनी ने बनाया है, जिसका आज उन्होंने सफल परीक्षण किया है. रवि पिछले कई सालों से इसे बनाने में लगे थे, जो पूरी तरह बिजली से चले, एकदम सुरक्षित हो और मॉर्डन हो. यह टेस्ट पास होने से उनकी सालों की मेहनत रंग लाई है.
🇮🇳 Innovation takes flight from Uttarakhand!
— Kailash Vashi (@KailashVashi) August 7, 2026
Almora-based innovator Ravi Tamta has successfully tested the HAPIDA SKYNeX prototype, marking a major milestone in India's personal air mobility journey.
Developed with the vision of creating a safe, electric personal flying… pic.twitter.com/B9j3AoMhGl
'ये भारत में बना पहला पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल है'
रवि टम्टा ने ईटीवी भारत से बातचीत में बताया कि भारत में बना ये पहला पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल है. उनके मुताबिक जिस दूरी को सड़क मार्ग से तय करने में करीब 40 मिनट लगते हैं वही दूरी हवा के रास्ते इस वाहन से करीब 12 मिनट में पूरी की जा सकती थी. रवि का कहना है कि वे अभी इस मशीन को और ज्यादा सुरक्षित और ताकतवर बनाने के लिए आगे कई और टेस्ट करेंगे. उनका विजन है कि ऐसी तकनीक को विकसित करना है जिससे जिससे लोग छोटी दूरी के सफर के लिए सड़क के साथ-साथ हवाई रास्ते का भी इस्तेमाल कर सकें.
पहले भी कर चुके हैं कई प्रयोग
बताते चलें कि ये रवि टम्टा का पहला प्रयोग नहीं है. इससे पहले रवि ने एक स्टिक भी बनाई थी, जिसका इस्तेमाल आज उत्तराखंड फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में हो रहा है. यह स्टिक मोबाइल चार्ज करती है, टॉर्च का काम करती है. इतना ही नहीं, उन्होंने 2007 में बोतल के अंदर ही बैट्री बनाकर बल्ब जलाया था. इसके अलावा, साल 2019 में उन्होंने एक इलेक्ट्रोलाइट पंप मशीन बनाने का दावा किया था, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों को कम समय में चार्ज किया जा सकता था.
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