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This Article is From Jan 15, 2024

कनाडा विदेशी छात्रों की संख्या कम करने को क्यों मजबूर? भारतीयों पर क्या पड़ेगा असर?

कनाडा इस समय बढ़ती बेरोजगारी और घर के संकट से जूझ रहा है. इसकी बड़ी वजह दूसरे देशों से कनाडा आने वाले छात्रों को माना जा रहा है.

कनाडा विदेशी छात्रों की संख्या कम करने को क्यों मजबूर? भारतीयों पर क्या पड़ेगा असर?
4 करोड़ की आबादी वाले कनाडा में फिलहाल 9 लाख से अधिक विदेशी छात्र हैं.
  • कनाडा में 9 लाख से ज्यादा विदेशी छात्र
  • कनाडा ने इस साल 4.85 लाख प्रवासियों को लाने का रखा लक्ष्य
  • स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के मौके भी घटे
टोरंटो:

भारतीयों के लिए आगे की पढ़ाई और विदेश में सेटेल (Canada Immigration)होने के मामले में कनाडा पसंदीदा देशों में शामिल है. हर साल कम से कम 4 लाख भारतीय कनाडा (Indian Students in Canada) पढ़ाई या नौकरी के सिलसिले में जाते हैं. इस बीच कनाडा के इमिग्रेशन मिनिस्टर मार्क मिलर (Marc Miller)ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में विदेशी छात्रों की संख्या सीमित करने की बात कही है. आइए जानते हैं आखिर ऐसा क्या हुआ कि कनाडा विदेशी छात्रों की संख्या को कम करने पर विचार कर रहा है? साथ ही इस फैसले से भारतीय स्टूडेंट्स पर क्या असर पड़ेगा:-

पहले जानिए, कनाडा के मंत्री ने क्या कहा?
इमिग्रेशन मिनिस्टर मार्क मिलर ने कैनेडियन नेटवर्क को दिए इंटरव्यू में दावा किया कि सरकार इस साल की पहली और दूसरी तिमाही में घरों की मांग को कम करने के लिए विदेशी छात्रों पर एक सीमा निर्धारित करने की संभावना पर विचार कर रही है. मिलर ने वर्कफोर्स की औसत उम्र कम करने की जरूरत पर भी विचार करने पर जोर दिया.

रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिन ट्रूडो सरकार ने इस साल देश में 4.85 लाख प्रवासियों को लाने का लक्ष्य रखा है. साल 2025 और 2026 में 5-5 लाख लोगों को लाने की कोशिश होगी. बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में कनाडा ने रिकॉर्ड संख्या में 800,000 से ज्यादा विदेशी छात्रों को स्वीकार किया. ये संख्या पांच साल पहले की तुलना में 75 प्रतिशत ज्यादा है.

कनाडा में 9 लाख से ज्यादा विदेशी छात्र
4 करोड़ की आबादी वाले कनाडा में फिलहाल 9 लाख से अधिक विदेशी छात्र हैं. इनकी कनाडा की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका है. भारत से भी वहां बड़ी संख्या में लोग पढ़ने और रोजगार की तलाश में जाते हैं. कनाडा के कुल विदेशी छात्रों में भारत की हिस्सेदारी 37% है. वहां पिछले दो दशक में सिख आबादी दोगुनी से अधिक हो गई. ज्यादा विदेशियों के आने से घरों की डिमांड और कीमतों में काफी इजाफा हुआ है. स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के मौके भी घट गए.

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भारतीयों पर क्या पड़ेगा असर?
हर साल सैकड़ों भारतीय छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए कनाडा जाते हैं. कनाडा सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल सितंबर में कनाडा में 8 लाख अंतरराष्ट्रीय छात्रों में से लगभग 40 प्रतिशत भारतीय थे. इसलिए, अगर कनाडाई सरकार अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में कमी लाती है, तो वहां पढ़ने वाले भारतीय भी प्रभावित हो सकते हैं.

क्यों हो रही है घरों की दिक्कत?
बीते साल 4 अक्टूबर को कैनेडियन सेंटर फॉर पॉलिसी अल्टरनेटिव की एक रिपोर्ट आई थी. इसमें दावा किया गया कि कोविड के दौरान लगे लॉकडाउन यानी अप्रैल 2020 के बाद से हाउसिंग सेक्टर में निवेश काफी गिर गया. सिंगल फैमिली वाले घरों में निवेश 21 फीसदी गिरा, जबकि नए घरों के निर्माण की रेट कम से कम 8 फीसदी गिर गई है. वहीं, घरों के रेनोवेशन में 21 फीसदी और ओनरशिप ट्रांसफर में 28 फीसदी की गिरावट आई है.

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GDP नहीं बढ़ने से आई समस्या
रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि जनवरी से जुलाई 2023 तक कनाडा की वास्तविक जीडीपी बिल्कुल भी नहीं बढ़ पाई. इसका असर आवासीय निवेश पर पड़ा. मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कनाडा का ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्शन (GDP) घट गया. बीते साल जुलाई और अगस्त में कनाडा की जीडीपी ठहर गई.

बेघर हो रहे लोग
कनाडाई मीडिया में आवास संकट को लेकर पहले से चिंता जताई जा रही थी. लेकिन ट्रूडो सरकार ने इसपर ध्यान नहीं दिया, जिससे समस्या भयावह हो गई. रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा में बेघर लोगों की अनुमानित संख्या तीन लाख हो चुकी है. ये संख्या हर दिन बढ़ती जा रही है.

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रिपोर्ट के मुताबिक, 10 हजार बेघर लोगों के साथ टोरंटो टॉप पर है. कनाडा में सबसे ज्यादा बेघरों की उम्र सीमा 25 से 49 के बीच की है. बेघरों का 52 फीसदी इसी आयु वर्ग में है.    

विदेशियों के प्रॉपर्टी खरीदने पर लगा बैन
अब कनाडा में सरकार ने विदेशियों के लिए प्रॉपर्टी खरीदने पर बैन लगा दिया है. आवास की कमी का सामना कर रहे स्थानीय लोगों को अधिक घर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कनाडा में रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी (Canada Residential Property) खरीदने वाले विदेशियों पर प्रतिबंध लगाया गया है. ये प्रतिबंध रविवार (1 जनवरी) से प्रभावी हो गया है. 

स्थानीय लोगों को अधिक घर उपलब्ध कराने के मकसद से रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी खरीदने वाले विदेशियों पर बैन लगाया गया है. हालांकि, अधिनियम में कई अपवाद भी हैं. कनाडा सरकार ने यह भी साफ किया है कि ये प्रतिबंध केवल शहर के आवासों पर लागू होगा. ग्रीष्मकालीन कॉटेज जैसी प्रॉपर्टी पर ये प्रतिबंध लागू नहीं होगा.

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