भारत और कनाडा ने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए एक व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) करने का फैसला किया है. दोनों देशों ने इस दिशा में सोमवार को बातचीत की प्रक्रिया शुरू की, और इसे जल्दी अंतिम रूप देने का फैसला किया.
दोनों देशों के बीच आधिकारिक दस्तावेजों का आदान-प्रदान
भारत-कनाडा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के संदर्भ की शर्तों (Terms of Reference) पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और कनाडा के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू ने सोमवार को हस्ताक्षर किए. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत दौरे पर आये कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की मौजूदगी में इन दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया गया.
ट्रंप की आर्थिक नीतियों के बीच कनाडा का भारत पर भरोसा
इन वार्ताओं में वस्तुओं, सेवाओं और पारस्परिक रूप से सहमति के अन्य नीतिगत क्षेत्रों में व्यापार शामिल होगा. दरअसल, कनाडा भारत के साथ द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मज़बूत करना चाहता है. इसकी एक बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की आर्थिक और टैरिफ नीतियों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता है, जिससे कनाडा पिछले कई महीनों से जूझ रहा है.
पीएम मोदी ने तय किया भविष्य का बड़ा लक्ष्य
हैदराबाद हाउस में एक भव्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा,"द्विपक्षीय व्यापार को वर्ष 2030 तक 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. प्राथमिकता आर्थिक सहयोग की पूर्ण संभावनाओं को साकार करना है, जिसके लिए भारत और कनाडा ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) को शीघ्र अंतिम रूप देने का निर्णय लिया है".
कनाडा के पीएम मार्क कार्नी का बड़ा बयान
इस मौके पर कनाडा के प्रधानमंत्री कार्नी ने कहा, "यह दो आत्मविश्वासी देशों के बीच ऐसी साझेदारी है जो अपने भविष्य की दिशा स्वयं निर्धारित कर रहे हैं".
2.34 ट्रिलियन डॉलर के बाजार तक भारत की पहुंच
वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, "कनाडा 4.16 करोड़ लोगों और 2.34 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का बाजार प्रस्तुत करता है. व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने और विस्तारित करने की महत्वपूर्ण क्षमता है, जो वित्त वर्ष 2024-25 में 8.66 अरब अमेरिकी डॉलर (निर्यात: 4.22 अरब अमेरिकी डॉलर; आयात: 4.44 अरब अमेरिकी डॉलर) था.
भारत से निर्यात होने वाले प्रमुख सामान
भारत से कनाडा सबसे ज़्यादा निर्यात होने वाले सामानों में दवाएं और फार्मास्यूटिकल्स, लोहा और इस्पात, समुद्री भोजन, सूती वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक सामान और रसायन प्रमुख हैं. भारत द्वारा कनाडा से आयात की जाने वाली प्रमुख सामानों में दाल, मोती और अर्ध-कीमती पत्थर, कोयला, उर्वरक, कागज और कच्चा पेट्रोलियम शामिल हैं.
सर्विस सेक्टर में विकास की नई संभावनाएं
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, भारत से कनाडा निर्यात की जाने वाली सेवाओं के प्रमुख क्षेत्रों में दूरसंचार, कंप्यूटर और सूचना सेवाएं और अन्य व्यावसायिक सेवाएं शामिल हैं. इन क्षेत्रों में भविष्य में विकास की नयी संभावनाएं हैं, और व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) पर बातचीत फाइनल होने के बाद इनमें द्विपक्षीय व्यापार का और विस्तार होने की उम्मीद है.
भारतीय प्रवासियों और छात्रों के लिए बेहतर भविष्य
इसके साथ ही, कनाडा में 425,000 से अधिक छात्र और भारतीय समुदाय के लोग रहते हैं. इस आर्थिक समझौता के फाइनल होने पर दोनों देशों के बीच जनसंबंध भी और मजबूत होने की उम्मीद है.
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