- अमेरिका और इजरायल ने मिलकर फरवरी के अंत में ईरान पर हमला किया था
- ईरान ने खामेनेई की मौत के बाद मिडिल ईस्ट के कई देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमले कर युद्ध को और बढ़ा दिया है
- होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे कच्चे तेल की कीमत बहुत बढ़ गई
US-Israel and Iran War: अमेरिका-इजरायल ने मिलकर ईरान पर जो हमला किया था, उसे एक महीना हो गया है. अमेरिका-इजरायल का तर्क था कि ईरान परमाणु बम बना रहा है, जो दुनिया के लिए खतरनाक है. इस जंग के पहले दिन ही ईरान के तत्कालीन सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई मारे गए थे. इसके बाद जंग और भड़क गई. इन एक महीनों में न तो अमेरिका-इजरायल हार मानने को तैयार हैं और न ही ईरान अपनी जिद छोड़ने को तैयार है.
एक महीने की जंग के बाद अब ईरान में ग्राउंड ऑपरेशन की अटकलें भी तेज हो गई हैं. मिडिल ईस्ट में 20 साल में अमेरिका के सबसे ज्यादा सैनिक तैनात हैं. शनिवार को ही 3,500 मरीन लेकर यूएसएस त्रिपोली मिडिल ईस्ट पहुंच गया है.
वहीं, इस जंग में अब यमन के हूती विद्रोहियों की भी एंट्री हो गई है. हूती विद्रोहियों ने इजरायल के सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमला करने का दावा किया है.
यह भी पढ़ेंः ईरान में ग्राउंड ऑपरेशन की तैयारी? 3,500 मरीन और पहुंचे, 20 साल में मिडिल ईस्ट में US की सबसे बड़ी तैनाती
माना जा रहा था कि ईरान के साथ युद्ध बहुत ज्यादा लंबी नहीं चलेगी. लेकिन एक महीना गुजर चुका है. सीजफायर की कोई उम्मीद अभी नजर नहीं आ रही है. इस बीच अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का कहना है कि ईरान के साथ युद्ध कुछ और समय तक जारी रह सकता है. एक महीने की जंग में क्या-कुछ हुआ? जानते हैं.
जंग का एक महीना | 10 पॉइंट्स
1. 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला किया था. राजधानी तेहरान समेत ईरान के कई इलाकों में बमबारी की थी. इन हमलों में पहले ही दिन ईरान के तत्कालीन सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई मारे गए थे. खामेनेई के परिवार के और भी सदस्यों की इनमें मौत हो गई थी. उसी दिन ईरान के एक गर्ल्स स्कूल पर मिसाइल हमला हुआ था, जिसमें 170 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें से ज्यादातर छात्राएं थीं.

2. खामेनेई की मौत के बाद जंग और भड़क गई. ईरान ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, कुवैत, कतर, इराक समेत मिडिल ईस्ट के कई देशों पर हमले कर दिए. ये हमले इन देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए. इन हमलों में कइयों की मौत हो चुकी है.
3. अमेरिका-इजरायल के हमलों में खामेनेई के अलावा ईरान और उसकी सेना के 40 से ज्यादा टॉप कमांडर मारे जा चुके हैं. इन हमलों में इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर मेजर जनरल मोहम्मद पकपोर, ईरानी सेना के प्रमुख मेजर जनरल अब्दुल रहीम मोसावी समेत कइयों की मौत हो चुकी है. दो दिन पहले ही IRGC नेवी के कमांडर एडमिरल अलीरेजा तंगसिरी की भी मौत हो गई है.
यह भी पढ़ेंः ईरान की केवल एक तिहाई मिसाइलें तबाह कर पाया अमेरिका!
4. जंग शुरू होने के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को लगभग बंद कर दिया है. यह वही समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के 20% कच्चे तेल की सप्लाई होती है. होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनियाभर में संकट खड़ा हो गया है. ईरान ने साफ किया है कि वह दुश्मन देशों को यहां से एक लीटर तेल भी नहीं ले जाने देगा. हालांकि, उसका कहना है भारत समेत मित्र देशों के जहाज यहां से गुजर सकते हैं. अब तक 4 भारतीय जहाज होर्मुज को पार कर भारत पहुंच चुके हैं.

5. लेबनान में इजरायल लगातार हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले कर रहा है. दक्षिणी लेबनान में इजरायल ग्राउंड ऑपरेशन करने जा रही है. दावा किया जा रहा है कि 10 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि इजरायली हमलों में 1,094 लोगों की मौत हुई है, जबकि 3,119 लोग घायल हो चुके हैं. मरने वालों में 81 महिलाएं और 121 बच्चे शामिल हैं.
6. ईरान में जारी युद्ध के कारण दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमत बढ़ गई है. जंग शुरू होने से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल थी. अब इसकी कीमत बढ़कर 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है. विश्लेषकों का मानना है कि अगर जंग जून तक चलती है तो कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच जाएगी.
यह भी पढ़ेंः होर्मुज से हाहाकार, 'बाब अल-मंदेब' स्ट्रेट बंद हुआ तो क्या होगा? समझें- ईरान का गेमप्लान
7. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ दिन पहले ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर पहले 5 दिन तक हमला न करने की बात कही थी. हालांकि, बाद में उन्होंने इसे बढ़ाकर 10 दिन कर दिया और दावा किया कि उनकी ईरान के साथ बात चल रही है. हालांकि, ईरान ने इन प्रस्तावों को एकतरफा बताते हुए खारिज कर दिया है. जंग रोकने के लिए ईरान की अपनी शर्तें हैं, जिनमें इंटरनेशनल गारंटी के साथ-साथ युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई की मांग भी शामिल है.

8. इजरायल डिफेंस फोर्सेस (IDF) ने दावा किया कि अगले कुछ दिनों में ईरान के सभी मिलिट्री इंडस्ट्री साइट को निशाना बनाने का काम पूरा कर लिया जाएगा. वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने शनिवार को कहा है कि युद्ध कुछ और समय तक जारी रहेगा, ताकि ईरान बहुत लंबे समय के लिए बेअसर हो जाए. उनका कहना है कि युद्ध का मकसद ईरान को बहुत लंबे समय के लिए बेअसर करना है.
यह भी पढ़ेंः ईरान के बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र में स्थिति लगातार बिगड़ रही है, रोसाटॉम का दावा
9. इस जंग में अब ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों की भी एंट्री हो गई है. हूतियों ने शनिवार को इजरायल पर मिसाइल हमला करने का दावा किया है. हालांकि, इजरायल का कहना है कि उसने इस हमले को नाकाम कर दिया. हूती विद्रोहियों की एंट्री से जंग और खतरनाक हो सकती है, क्योंकि वे बाब अल-मंडेब स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बना सकते हैं. स स्ट्रेट से 12% जहाज गुजरते हैं.

10. मिडिल ईस्ट में पहले से ही 50 हजार अमेरिकी सैनिक तैनात हैं. इस बीच शनिवार को और 3,500 मरीन मिडिल ईस्ट पहुंच गए हैं. यह 20 साल में मिडिल ईस्ट में अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती है. वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि पेंटागन ईरान में कई हफ्तों तक चलने वाले ग्राउंड ऑपरेशन की तैयारी कर रहा है. हालांकि, यह ग्राउंड ऑपरेशन 'फुल स्केल वॉर' नहीं होगा.
जंग में किसे कितना नुकसान?
इस महीनेभर की जंग में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. ईरान का कहना है कि अब तक की जंग में 1,900 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. इजरायल में 19 लोग मारे गए हैं. वहीं, लेबनान में लगभग 1,100 लोग की मौत हुई है. इराक में सिक्योरिटी फोर्सेस के 80 लोग मारे गए हैं. खाड़ी देश भी इस जंग से प्रभावित हुए हैं और अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है. इस जंग में 13 अमेरिकी सैनिकों की भी मौत हुई है.
यह भी पढ़ेंः यमन के हूती कौन हैं और इजरायल‑ईरान युद्ध में उनकी एंट्री क्यों खतरनाक है? अमेरिका की राह और दुश्वार
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं