- यमन के हूती विद्रोही ईरान-इजरायल संघर्ष में सक्रिय होकर मध्य पूर्व की जटिल सुरक्षा स्थिति को और बढ़ा रहे हैं
- हूती समूह ज़ैदी शिया इस्लाम मानने वाला सैन्य और राजनीतिक आंदोलन है जो यमन के उत्तरी हिस्सों में सक्रिय है
- हूतियों ने मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए सऊदी अरब और यूएई के महत्वपूर्ण तेल ठिकानों को निशाना बनाया है
ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले से पहले ही मिडिल ईस्ट सुलग रहा है. ऊपर से अब यमन के रेगिस्तान से दागी गई एक मिसाइल ने मिडिल ईस्ट की जंग में नई लकीर खींच दी है. अब तक परदे के पीछे रहे हूती विद्रोहियों ने ईरान की जंग में कूदकर साफ संकेत दे दिया है कि इजरायल‑ईरान युद्ध उनके लिए सिर्फ दूर की लड़ाई नहीं रहा. असल में यह एक ऐसा कदम है, जिसने इजरायल की रणनीति को और जटिल बना दिया है. वहीं अमेरिका के लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी है, जो जंग जरूर लड़ रहा है लेकिन उसके लक्ष्य क्या है उसके साफ मकसद का किसी को कुछ अता-पता नहीं है. इस बीच सवाल यह नहीं कि हूती ताकत रखते हैं या नहीं, बल्कि यह है कि अगर वे पूरी तरह मैदान में उतरे, तो जंग की आग कितनी दूर तक फैल जाएगी.
यमन के हूती कौन हैं
हूती एक सैन्य, राजनीतिक और धार्मिक आंदोलन है, जिसका नेतृत्व हूती परिवार करता है और जो यमन के उत्तरी हिस्सों में सक्रिय है. यह समूह ज़ैदी शिया इस्लाम को मानता है. साल 2011 के अरब स्प्रिंग के बाद यमन में अस्थिरता का फायदा उठाते हुए हूतियों ने अपनी ताकत बढ़ाई और साल 2014 में राजधानी सना पर कब्जा कर लिया. इसके बाद सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 2015 में उनके खिलाफ सैन्य हस्तक्षेप किया. सालों की लड़ाई के बाद 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से किसी तरह से संघर्षविराम हुआ, जो अब तक लागू है.
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हूती की ताकत: मिसाइल, ड्रोन और लंबी दूरी का खतरा
हूतियों ने पिछले सालों में मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं का प्रदर्शन किया है. वे सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में तेल ठिकानों और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले कर चुके हैं. अक्टूबर 2023 में गाजा युद्ध शुरू होने के बाद, हूतियों ने लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को निशाना बनाया और इजरायल की ओर ड्रोन व मिसाइल दागीं. इन हमलों के जवाब में इजरायल और अमेरिका ने हूती ठिकानों पर हमले किए थे. बाद में अक्टूबर 2025 में इजरायल‑हमास संघर्षविराम के बाद हूतियों ने हमलों पर ब्रेक लगा दिया था.
अब तक युद्ध में क्यों नहीं उतरे थे हूती
मार्च की शुरुआत में हूती नेता अब्दुल मलिक अल‑हूती ने एकदम साफ लहजे में कहा था कि उनका संगठन किसी भी वक्त कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार है. इसके बावजूद, उन्होंने लेबनान के हिज्बुल्लाह या इराकी सशस्त्र गुटों की तरह युद्ध में शामिल होने की औपचारिक घोषणा नहीं की थी. एक्सपर्ट के मुताबिक, हूती ईरान के ‘Axis of Resistance' का हिस्सा माने जाते हैं, लेकिन वे ईरान के सर्वोच्च नेता के सीधे आदेशों के तहत काम नहीं करते. उनका मुख्य एजेंडा यमन की घरेलू राजनीति से जुड़ा रहा है.
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यमन से मिसाइल का संदेश
मिडिल ईस्ट संकट के बीच हालिया मिसाइल लॉन्च के बाद, हूतियों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और तेज हुई या लाल सागर का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए किया गया, तो वे इसमें हस्तक्षेप कर सकते हैं. उनकी यह चेतावनी बताती है कि हूती सिर्फ इजरायल ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं.
इजरायल और अमेरिका के लिए चेतावनी क्यों
हूतियों की भागीदारी से अरब प्रायद्वीप के आसपास समुद्री रास्तों पर बड़ा खतरा पैदा हो सकता है. जहां लाल सागर और बाब‑अल‑मंदेब जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार के लिए अहम हैं. जबकि पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य के लगभग बंद होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था दबाव में आ चुकी है. अगर हूती इन समुद्री मार्गों को फिर निशाना बनाते हैं, तो यह संघर्ष को क्षेत्रीय से वैश्विक संकट में बदल सकता है.
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