- ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच चल रही जंग एक महीने से जारी है और अभी तक इसका कोई समाधान नहीं हुआ है.
- ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर वैश्विक तेल व्यापार को प्रभावित किया था, जिससे तेल की कीमतें बढ़ीं.
- ईरान ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट बंद करने की धमकी दी है, जो वैश्विक तेल सप्लाई के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है.
Iran-Israel-US War: ईरान का इजरायल और अमेरिका के साथ चल रहे जंग का एक महीने हो गया है. ईरान में भारी तबाही के साथ-साथ अमेरिका और इजरायल के अरबों रुपए स्वाहा होने के बाद भी इस जंग के थमने के आसार नहीं दिख रहे हैं. जंग के शुरुआती दिनों में भी ईरान ने वैश्विक तेल व्यापार के अहम रास्ते 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को बंद कर दिया. होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) बंद होने के कारण कई देशों में तेल-गैस की सप्लाई चरमरा गई. इंटरनेशनल स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमत नई ऊंचाईयों पर पहुंच गई. इसका असर दुनिया के कई देशों पर पड़ा. अब ईरान ने एक और ऐसी धमकी दे दी है कि जिससे पूरी दुनिया नई टेंशन में आ गई है.
ईरान ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को बंद करने की दी धमकी
ईरान ने अब बाब अल-मंदेब स्ट्रेट (Bab al-Mandeb) को भी बंद करने की धमकी दी है. दरअसल ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजरायल ने उसके द्वीपों, खासतौर पर खार्ग द्वीप पर हमला किया तो वह बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को बंद कर सकता है. ईरान के इस बयान ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है. क्योंकि बाब अल-मंदेब वैश्विक तेल सप्लाई का एक अहम रास्ता है.
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यमन के पास स्थित बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से होकर गुजरते बड़े जहाज. (फाइल फोटो)
बाब अल-मंदेब स्ट्रेट तेल शिपिंग का अहम रास्ता
बाब अल-मंदेब स्ट्रेट भूमध्य सागर और अरब सागर के बीच एक जरूरी समुद्री रास्ता है, जो यूरोप को अफ्रीका और उससे आगे के महासागरों में एशिया से जोड़ता है. इसी स्ट्रेट से पार कर बड़ी जहाजे आगे स्वेज नहर की ओर जाती है. इसकी चौड़ाई 32 किलोमीटर है. दुनिया भर में समुद्र के रास्ते भेजे जाने वाले तेल का लगभग 12 फीसदी हिस्सा लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाले इसी जलमार्ग से होकर गुज़रता है, जिससे यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा शिपिंग मार्ग बन जाता है.

बाब अल-मंदेब के पास ईरानी समर्थक हूती गुट का ठिकाना
यूं तो बाब अल-मंदेब स्ट्रेट ईरान से करीब 2 हजार किलोमीटर दूर यमन के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है. लेकिन यहां ईरान समर्थित हूती गुट का ठिकाना है. ऐसे में ईरान के कहने पर हूती गुट इस युद्ध में एक नया मोर्चा खोलने को तैयारी है. तस्नीम न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के एक सैन्य सूत्र ने चेतावनी दी है कि अगर ईरानी क्षेत्र या उसके द्वीपों पर हमला होता है, तो वह बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में नया मोर्चा खोल सकता है.
इसका मतलब यह है कि अमेरिका-इजरायल के ईरान पर हमलों के खिलाफ हूती विद्रोहियों की एंट्री हो गई है. इसके संकेत दो दिन पहले ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी तस्नीम ने सूत्रों के हवाले से दी थी.

बाब अल-मंदेब यमन के पास है, जहां ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का दबदबा है.
बाब अल-मंदेब बंद हुआ तो क्या होगा?
अगर ईरान ने होर्मुज की तरह बाब अल-मंदेब को बंद कर दिया तो इसका पूरी दुनिया पर बुरा असर पड़ सकता है. बाब अल-मंदेब बंद होने पर जहाजों को अफ्रीका के ‘केप ऑफ गुड होप' के रास्ते लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा. इससे सामानों की डिलीवरी में 15-20 दिन की देरी और लागत में भारी बढ़ोतरी होगी. जानकारों के मुताबिक अल-मंडेब स्ट्रेट बंद होने पर दुनिया की 30 फीसदी से ज्यादा तेल-गैस सप्लाई पर असर पड़ सकता है.
इससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है. बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के करीब पहले ही ईरान समर्थित हूती विद्रोही कई बार व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाते रहे हैं.

शनिवार को हूती विद्रोहियों ने इजरायल पर शुरू किया मिसाइल हमला
शनिवार को ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच एक महीने से चल रहे इस जंग के बीच हूती विद्रोहियों ने इजरायल पर पहला मिसाइल हमला किया है. समूह ने कहा कि उसने दक्षिणी वेस्ट बैंक में स्थित इजराइली सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार की. हूती समूह ने अपने बयान में कहा कि यह हमला लेबनान, ईरान और फिलिस्तीन में बुनियादी ढांचे पर हमलों और नागरिकों की मौत के जवाब में किया गया है.
यह भी पढ़ें - यमन के हूती कौन हैं और इजरायल‑ईरान युद्ध में उनकी एंट्री क्यों खतरनाक है? अमेरिका की राह और दुश्वार
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