- अमेरिका और इजरायल के एक महीने के युद्ध में ईरान की एक तिहाई ही बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन नष्ट हुए हैं
- ईरान के मिसाइल भंडार का अधिकांश हिस्सा भूमिगत है, जिससे उसकी क्षमताओं का सटीक आकलन करना मुश्किल है
- यमन के हूती समर्थकों ने ईरानी समर्थन में इजरायली ठिकानों पर मिसाइल हमले कर युद्ध में सक्रिय भागीदारी दिखाई है
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका-इजरायल की तरफ से 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध के एक महीने बाद भी ईरान की एक तिहाई बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन जखीरा नष्ट हो पाए हैं. वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावा कर रहे हैं कि ईरान बर्बाद हो चुका है. उसकी मिसाइल और परमाणु बम बनाने की क्षमता एक महीने के युद्ध में खत्म कर दी गई है. इजरायल भी लगभग ऐसे ही दावे कर रहा है, लेकिन थोड़ा बचते हुए. कारण ट्रंप जल्द युद्ध खत्म करना चाहते हैं और इजरायल अभी लंबा युद्ध खिंचना चाहता है.
यमन से हूतियों के हमलों ने भी चौंकाया
अमेरिकी खुफिया जानकारी से परिचित पांच लोगों पर आधारित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान की अधिकांश मिसाइलें तत्काल पहुंच से बाहर हैं, फिर भी उसके पास मिसाइलों का एक बड़ा भंडार मौजूद है. शनिवार को ही यमन से ईरान के समर्थन में हूती समर्थकों ने इजरायली सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले करके ईरान युद्ध में एंट्री कर ली. यह डोनाल्ड ट्रंप के गुरुवार के उस बयान के विपरीत है, जिसमें उन्होंने कहा था कि तेहरान के पास "बहुत कम रॉकेट बचे हैं", और अन्य अमेरिकी अधिकारियों के उन बयानों के भी विपरीत है, जिनमें कहा गया था कि युद्ध ने उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को खत्म कर दिया है.
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अमेरिका-इजरायल ने पूरी ताकत झोंक दी
ईरानी अधिकारी अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को अपनी सबसे मजबूत ताकत के रूप में देखते हैं. ट्रंप ने बृहस्पतिवार को कहा, “जलडमरूमध्य की समस्या यह है: मान लीजिए कि हमने बहुत अच्छा काम किया. हमने कहा कि हमने उनकी 99% मिसाइलों को नष्ट कर दिया. 1% भी अस्वीकार्य है, क्योंकि 1% का मतलब है कि वो कभी भी एक अरब डॉलर के जहाज को मार सकता है.” ईरान में अपने हवाई अभियानों में इजरायल ने बैलिस्टिक मिसाइल डिपो और लॉन्चरों को मुख्य लक्ष्य बनाया है. इजरायल का कहना है कि उसने तेहरान के 335 या 70% मिसाइल लॉन्चरों को निष्क्रिय कर दिया है. ईरान ने इजरायली हवाई हमलों से बचने के लिए अपने लॉन्चरों को पूरे देश में फैला रखा है.

ईरान की ताकत भी नहीं तौल पा रहे
इजराइल और अमेरिका द्वारा बमबारी अभियान जारी रखने के कारण ईरान के नये मिसाइल टेस्ट करने की संख्या में कमी आई है, लेकिन इंटरसेप्टर की कमी के कारण मिसाइलें अब भी इजरायल और खाड़ी देशों को निशाना बना रही हैं. इजरायल, अमेरिका और खाड़ी देशों ने ईरानी मिसाइल हमलों को रोकने के लिए अरबों डॉलर खर्च किए हैं और अपने महत्वपूर्ण इंटरसेप्टर भंडार को खत्म कर दिया है. नाम न बताने की शर्त पर एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ईरान के मिसाइल भंडार का आकलन करना असंभव होगा, क्योंकि इसका अधिकांश हिस्सा भूमिगत रखा गया है. उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता कि हमें कभी सटीक संख्या मिल पाएगी या नहीं."
अमेरिका कर चुका है बहुत ज्यादा खर्च
संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ईरान ने गुरुवार को संयुक्त अरब अमीरात पर 15 मिसाइलें और 11 ड्रोन दागे. अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि सुरंगों का विशाल जाल ईरान के मिसाइल भंडार को नष्ट करने में एक अतिरिक्त चुनौती पेश करता है, लेकिन उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना इसके बावजूद अपना अभियान जारी रखेगी. उन्होंने इस महीने की शुरुआत में कहा था, "हम उनका व्यवस्थित, निर्दय और व्यापक रूप से पीछा कर रहे हैं, जैसा कि दुनिया की कोई अन्य सेना नहीं कर सकती, और परिणाम स्वयं ही सब कुछ बयां करते हैं." पेंटागन की पूर्व अधिकारी एलेन मैककुस्कर ने अनुमान लगाया है कि अकेले पहले तीन हफ्तों में युद्ध में हुए नुकसान और उसकी भरपाई की लागत अमेरिका को 1.4 अरब डॉलर से लेकर 2.9 अरब डॉलर तक हो सकती है. चौथे सप्ताह का तो अब तो आकलन ही नहीं हो पाया है. जाहिर है अमेरिका को इस युद्ध में ईरान से ज्यादा खर्च करना पड़ गया है.
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