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अब चीन चुपके से ईरान को दे रहा नए हथियार! US के दावे पर ट्रंप की धमकी-भुगतने को तैयार रहना

US-Iran War China News: चीन की ईरान को पीछे से मदद पहुंचाने के दावे पर अमेरिका के खुफिया विभाग के अधिकारियों ने ही मुहर लगाई है. ईरान को नए डिफेंस सिस्टम देने के बाद बौखलाए ट्रंप अगले महीने की शुरुआत में चीन दौरे पर भी जाने वाले हैं.

अब चीन चुपके से ईरान को दे रहा नए हथियार! US के दावे पर ट्रंप की धमकी-भुगतने को तैयार रहना
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  • इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल हो गई और कोई समझौता नहीं हुआ है
  • अमेरिकी खुफिया सूत्रों के अनुसार चीन आने वाले हफ्तों में ईरान को नया एयर डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी कर रहा
  • डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को चेतावनी दी है कि यदि उसने ईरान को हथियार मुहैया कराए तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे
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नई दिल्ली:

इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता विफल हो गई.उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि बुरी खबर है,ईरान-अमेरिका के बीच कोई समझौता नहीं हो पाया है.इस बीच अमेरिकी खुफिया सूत्रों ने बताया कि चीन आने वाले कुछ हफ्तों में ईरान को नए एयर डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी कर रहा है. वो भी तब जब चीन ने इसी सप्ताह ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध रोकने वाले संघर्षविराम समझौते में मध्यस्थता करने का दावा किया था. चीन की इस नई चाल की भनक लगते ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी चेतावनी दी है. ट्रंप ने सीधे शब्दों में कहा कि अगर चीन ने ऐसा कुछ किया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. 

चीन की इस चाल से ट्रंप भी नाराज 

चीन की ईरान को पीछे से मदद पहुंचाने के दावे पर अमेरिका के खुफिया विभाग के अधिकारियों ने ही मुहर लगाई है. ईरान को नए डिफेंस सिस्टम देने के बाद बौखलाए ट्रंप अगले महीने की शुरुआत में चीन दौरे पर भी जाने वाले हैं.खुफिया रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि ईरान इस संघर्षविराम का इस्तेमाल अपने हथियारों के भंडार को फिर से भरने के मौके के तौर पर कर सकता है,जिसमें उसे अपने प्रमुख विदेशी सहयोगियों से मदद मिल रही है.सीएनएन से बात करने वाले दो सूत्रों ने बताया कि संकेत मिले हैं कि बीजिंग इन हथियारों की खेप को तीसरे देशों के रास्ते भेजने पर काम कर रहा है,ताकि उनकी असली उत्पत्ति छिपाई जा सके.

ट्रंप ने चीन को भी सख्त चेतावनी दी कि यदि यह साबित हुआ कि उसने मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व वाले ईरान को हथियार मुहैया कराए हैं, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.रविवार सुबह ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के खिलाफ अपनी जीत की बात दोहराई और चीन को चेतावनी दी कि अगर उसने हथियार सप्लाई किए,तो इसके गंभीर नतीजे होंगे.

चीन ने ईरान को मदद देने की बात नकारी

सूत्रों के अनुसार,चीन जिन सिस्टम को ईरान को देने की तैयारी कर रहा है,वे कंधे से दागे जाने वाले हवा‑रोधी मिसाइल सिस्टम(Anti-Air Missile System) हैं, जिन्हें MANPADS कहा जाता है. इन प्रणालियों से कम ऊंचाई पर उड़ने वाले अमेरिकी सैन्य विमानों को बड़ा खतरा हो सकता है.पांच हफ्ते चले युद्ध के दौरान भी इस तरह का खतरा बना हुआ था और अगर संघर्षविराम टूटता है तो यह फिर से पैदा हो सकता है.

वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के एक प्रवक्ता ने कहा, “चीन ने इस संघर्ष में शामिल किसी भी पक्ष को कभी हथियार नहीं दिए हैं.इस मामले में दी जा रही जानकारी गलत है.” प्रवक्ता ने आगे कहा, “एक जिम्मेदार और बड़ा देश होने के नाते चीन हमेशा अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का पालन करता है.हम अमेरिका से आग्रह करते हैं कि वह बिना आधार के आरोप न लगाए,बेवजह बातें न जोड़े और सनसनी न फैलाए. हम उम्मीद करते हैं कि सभी संबंधित पक्ष तनाव कम करने के लिए अधिक प्रयास करेंगे.”इससे पहले इसी सप्ताह चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने CNN से कहा था कि अमेरिका, इजरायल‑ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से बीजिंग संघर्षविराम कराने और युद्ध समाप्त करने में मदद के लिए काम कर रहा है.

 यह भी पढ़ें-  अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत फेल, जेडी वेंस बोले- बिना डील के वापस जा रहे

ईरान को MANPADS जैसे हथियार भेजना,अमेरिका और इजरायल की ओर से फरवरी में संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किए जाने के बाद से ईरान के प्रति चीन के समर्थन में एक बड़ा इजाफा माना जाएगा.सूत्रों के अनुसार, चीनी कंपनियां अब भी ईरान को ऐसे तकनीकी उपकरण बेच रही हैं,जिनका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है.इन तकनीकों की मदद से ईरान अपने हथियारों का निर्माण जारी रख सकता है और अपनी नेविगेशन प्रणालियों को बेहतर बना सकता है,लेकिन अगर चीनी सरकार सीधे तौर पर हथियार सिस्टम भेजता है तो यह सहायता का एक बिल्कुल नया स्तर होगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अगले महीने बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने की संभावना है.व्हाइट हाउस ने बुधवार को बताया कि इस सप्ताह ईरान से जुड़े संघर्षविराम पर बातचीत के दौरान अमेरिका और चीन के बीच उच्च‑स्तरीय बातचीत भी हुई है.

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