उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनावों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई. मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने इस प्रक्रिया में सहयोग के लिए एमिकस क्यूरी (अदालत का मित्र) नियुक्त किया है. इसके साथ ही पिछड़ा वर्ग आयोग के अधिवक्ता की ओर से भी कोर्ट में जवाब दाखिल कर दिया गया है.
याचिकाकर्ताओं की मांग और प्रमुख मुद्दे
यह सुनवाई याचिकाकर्ता इम्तियाज हुसैन और दशरथ यादव द्वारा दायर की गई अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ की जा रही है. इम्तियाज हुसैन ने राज्य में पंचायत चुनाव समय पर न कराने के खिलाफ याचिका दाखिल की है, जबकि दशरथ यादव ने प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के सरकारी आदेश को अदालत में चुनौती दी है.
14 अगस्त को अगली सुनवाई
इस पूरे मामले की सुनवाई जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिवीजन बेंच कर रही है. इससे पहले 13 मार्च को अदालत ने ग्राम पंचायत चुनाव 2026 को लेकर राज्य चुनाव आयोग से विस्तृत रूपरेखा मांगी थी.
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वैसे इससे पहले उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव को लेकर यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया था. ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों को छह महीने के लिए प्रशासक बनाने के बाद जिला पंचायतों में भी यही व्यवस्था लागू करने का फैसला किया गया था. जिला पंचायत अध्यक्षों को अंतरिम प्रावधानों के तहत संबंधित जिला पंचायतों का प्रशासक बनाया गया था.
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