उत्तर प्रदेश में विधानसभा की नौ सीट पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सीत सीट पर जीत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक स्थिति को और मजबूत बना दिया. वहीं कांग्रेस के चुनाव न लड़ने और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के फिर से खराब प्रदर्शन ने समाजवादी पार्टी (सपा) को एक बार फिर राज्य में प्रमुख विपक्षी दल के रूप में स्थापित कर दिया.
भाजपा गठबंधन ने विधानसभा की जिन सात सीट पर जीत हासिल की, उनपर जीत हासिल करने वाले उम्मीदवार इस बात पर एकमत थे कि आदित्यनाथ और (हिंदू) एकता के उनके आह्वान ने जीत में बड़ी भूमिका निभाई. निर्वाचन आयोग के नतीजों की आधिकारिक पुष्टि किए जाने से पहले ही आत्मविश्वास से लबरेज आदित्यनाथ ने शनिवार अपराह्न साढ़े तीन बजे लखनऊ में पार्टी कार्यालय पहुंचकर ‘एक हैं तो सेफ हैं, बंटेंगे तो कटेंगे' के महत्व को दोहराया.
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भाजपा के एक नेता ने ‘पीटीआई-भाषा' से कहा, “संवाद के दौरान हमने लोगों से जाति के आधार पर न बंटने और एकजुट होकर मतदान करने का आग्रह किया. हमारे नेताओं द्वारा लगाए गए ‘बटेंगे तो कटेंगे' और ‘एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे' के नारों ने संदेश को जल्दी से घर-घर पहुंचाने में मदद की.”
उपचुनावों में भाजपा का प्रचार अभियान मुख्यतः “राम और राष्ट्र” के इर्द-गिर्द घूमता रहा और आदित्यनाथ ने कार्यालय में अपने संक्षिप्त संवाद के दौरान कुंदरकी में भाजपा की जीत को “राष्ट्रवाद” की जीत करार दिया.
कुंदरकी से भाजपा नेता ने ‘पीटीआई-भाषा' से कहा, “वहां 11 मुस्लिम उम्मीदवारों की मौजूदगी ने भी विपक्षी सपा की मदद नहीं की. इसलिए जब उनका वोट बंटा तब हम अपना वोट सुरक्षित रख पाए और इस चतुराई से तैयार किए गए एकता के नारे ने इस जीत में बड़ी भूमिका निभाई.”
मीरापुर विधानसभा सीट पर सपा ने मुस्लिमों की अच्छी खासी मौजूदगी के बावजूद हार का सामना किया. मीरापुर सीट पर सपा के पूर्व सांसद कादिर राणा की बहु सुम्बुल राणा को राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के प्रत्याशी मिथिलेश को हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा.
इस सीट पर भी मुस्लिम मतों के बंटवारे का खामियाजा सपा को भुगतना पड़ा क्योंकि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के एक उम्मीदवार सहित दो मुस्लिम उम्मीदवारों को 41000 वोट मिले, जो भाजपा की जीत के अंतर से भी ज्यादा है. अंबेडकरनगर की कटेहरी विधानसभा सीट पर 1991 के बाद भाजपा की यह पहली जीत थी.यह ऐसी सीट थी, जिसकी जिम्मेदारी आदित्यनाथ ने संभाली थी और इसलिए इस जीत का भी अपना महत्व था.
आदित्यनाथ ने संवाददाताओं से कहा, “अगर आप देखें, तो सीसामऊ में सपा की जीत का अंतर लगभग 8000 वोट है, जो 2022 में 12000 वोट की जीत से काफी कम है. करहल सीट पर इस बार जीत का अंतर 14000 मत है, जो पिछले विधानसभा चुनाव में 67000 था.”उन्होंने कहा, “अगली बार जैसा कि केशव (उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य) ने कहा, हम करहल भी जीतेंगे.”
प्रदेश की लगभग सभी नौ सीट पर उपचुनाव में सीधा मुकाबला भाजपा बनाम सपा काथा, जिसका मतलब यह है कि सपा का विपक्षी दल के रूप में दबदबा बना रहेगा.इसके अलावा, कांग्रेस की अनुपस्थिति और बसपा के फीके प्रचार अभियान के कारण यह चुनाव दो दलों के बीच सिमटकर रह गया.
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं