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सिर्फ आर्य समाज मंदिर का सर्टिफिकेट काफी नहीं, हिंदू शादी की मान्यता के लिए रस्में भी जरूरी: HC 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा- केवल आर्य समाज मंदिर के सर्टिफिकेट से शादी को वैध नहीं माना जा सकता. कानून की नजर में शादी तभी वैध होगी जब हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान और सप्तपदी पूरे किए गए हों.

सिर्फ आर्य समाज मंदिर का सर्टिफिकेट काफी नहीं, हिंदू शादी की मान्यता के लिए रस्में भी जरूरी: HC 
आर्य समाज मंदिर के मैरिज सर्टिफिकेट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला.
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल आर्य समाज मंदिर द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र से शादी की वैधता साबित नहीं होती
  • कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सात फेरों और हिंदू धार्मिक अनुष्ठान के बिना शादी कानूनी रूप से मान्य नहीं मानी जा सकती
  • रोहित पांडे ने दावा किया कि उनकी शादी हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार नहीं हुई थी, जिसे महिला ने भी स्वीकार किया

आर्य समाज मंदिर के विवाह प्रमाणपत्र को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सवाल खड़े कर दिए हैं. एक मामले की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा- केवल आर्य समाज मंदिर द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र से यह सिद्ध नहीं हो सकता कि शादी हिंदू विवाह अधिनियम के तहत वैध है. सप्तपदी यानी सात फेरों और हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार आवश्यक धार्मिक अनुष्ठान के साथ हुई शादी को ही कानूनी तौर पर वैध माना जा सकता है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राजीव सिंह की बेंच ने सशस्त्र सीमा बल (SSB) के एक अधिकारी को सेवा से हटाए जाने के आदेश को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की. 

याचिकाकर्ता रोहित पांडे के खिलाफ एक शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्‍होंने साल 2007 में आर्य समाज मंदिर में सुचेता तिवारी (शिकायतकर्ता) से शादी की थी. इस आरोप की जांच के बाद एसएसबी अधिकारियों ने माना कि रोहित पांडे ने ज्वाइनिंग के समय अपनी वैवाहिक स्थिति के बारे में झूठी जानकारी दी, जिसके तहत उन्‍हें दोषी ठहराते हुए 28 अप्रैल 2022 को नौकरी से बर्खास्त कर दिया. 

हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार नहीं हुई थी

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता रोहित पांडे ने अदालत में तर्क दिया कि हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार उसकी शादी नहीं हुई थी. शिकायतकर्ता महिला ने भी यह स्वीकार किया था कि शादी हिंदू रीति-रिवाजों और सप्तपदी के अनुसार संपन्न नहीं हुई थी. हालांकि, विभागीय जांच के दौरान में आर्य समाज मंदिर के पुजारी और नोटरी प्रमाण पत्र के आधार पर अधिकारियों ने माना था कि शादी हुई थी. इसके बाद रोहित पांडे ने 2015 में दूसरी महिला (साधना तिवारी) से शादी कर ली थी, जिसे विभाग ने अयोग्य आचरण माना था. 

शादी अवैध तो बर्खास्त करने का आधार नहीं 

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले 'प्रिया बाला घोष बनाम सुरेश चंद्र घोष (1971)' का हवाला देते हुए कहा-  केवल किसी आर्य समाज मंदिर का प्रमाण पत्र पेश कर देने के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के अनुसार हुआ था.

अदालत ने माना कि 2007 का कथित विवाह बिना आवश्यक धार्मिक अनुष्ठानों और सात फेरों के हुआ था, इसलिए कानून तौर पर इसे शादी नहीं माना जा सकता. शादी कानूनी रूप से अमान्य थी, तो जवान को नौकरी से बर्खास्त करने का आधार ही खत्म हो जाता है. 

नौकरी पर बहाल करने का आदेश

हाईकोर्ट ने 28 अप्रैल 2022 को जारी रोहित पांडे की बर्खास्तगी के आदेश को अवैध मानते हुए रद्द कर दिया. साथ ही, एसएसबी अधिकारियों को निर्देश दिए कि रोहित पांडे को तुरंत प्रभाव से सेवा में वापस लिया जाए. हालांक‍ि, कोर्ट ने 'नो वर्क, नो पे' (काम नहीं, वेतन नहीं) का नियम लागू किया है. आदेश के तहत 28 अप्रैल 2022 से कोर्ट के आदेश तक पांडे को वेतन नहीं दिया जाएगा. कोर्ट ने आदेश में यह भी साफ किया इस अवधि को सेवा में व्यवधान नहीं माना जाएगा, याचिकाकर्ता की सर्विस निरंतर मानी जाएगी. 

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