- दौलतराम कॉलेज की छात्रा ने कहा कि चुनाव में थार-फॉर्च्यूनर से तेज म्यूजिक बजाते हुए नेता गुजरते हैं.
- छात्रा ने बताया कि डर लगता है कहीं कुचल न दें.
- लॉ फैकल्टी के छात्र ने बताया कि रिट के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर पानी की व्यवस्था हुई थी.
दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव में हॉस्टल, कैंपस में साफ पीने लायक पानी, खराब इन्फ्रास्ट्रक्चर, छात्रों के लिए मेट्रो किराए में रियात, बढ़ती फीस, लाइब्रेरी में कम जगह जैसे तमाम मुद्दों के साथ छात्राओं की सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा है. NDTV.in के साथ बातचीत में छात्राओं ने बताया कि वे चुनाव के दौरान क्या महसूस करती हैं. चुनाव प्रचार के दौरान छात्र नेता किस तरह से बड़ी और महंगी गाड़ियों से आते हैं और तेज आवाज में गाने बजाते हुए गुजरते हैं. ऐसी स्थिति में डीयू की छात्राओं को बेहद असुरक्षित महसूस होता है. वे शाम को अकेले बाहर निकलने में डरती हैं.
'हमारी बैंड बज जाती है...'
दौलतराम कॉलेज में बीए पॉलिटिकल साइंस की थर्ड ईयर की स्टूडेंट तनु सिंह कहती हैं कि चुनाव के वक्त तो हम बहुत डरे होते हैं. हमारी बैंड बज जाती है. हमें नहीं पता होता कि हम थार और फार्च्युनर के नीचे कब कुचल दिए जाएंगे.


तनु सिंह,

'कोई छात्रों के मद्दों पर बात नहीं करता...'
लॉ फैकल्टी में थर्डर ईयर के छात्र शीबू सिंह कहते हैं, "छात्र संगठन ढंग के मुद्दों पर बात नहीं करते हैं. अभी हाल ही में ABVP और NSUI में फाइट हुई है. यही सब चल रहा है. जब मैं फर्स्ट ईयर में था, उसी वक्त कुछ काम हुआ था, उसके बाद मुझे कुछ नहीं दिखा. लोग झुंड में आते है, दो-चार फोटो खिंचवाते है और चले जाते हैं. सब अपनी ताकत दिखाने में लगे होते हैं. मोटिवेशन में भले ही बड़ी-बड़ी बातें कर दी जाएं लेकिन असल में कोई छात्रों के मुद्दों पर बात नहीं करता है."
लॉ फैकल्टी में फाइनल ईयर के स्टूडेंट अजहर कमल कादरी कहते हैं, "कैंपस में ड्रिंकिंग वॉटर बड़ा मुद्दा है. यहां पीने के पानी की बड़ी समस्या है. DUSU के पूर्व अध्यक्ष रौनक खत्री ने कैंपस में पानी की सुविधा के लिए रिट फाइल की थी. हाई कोर्ट से ऑर्डर आने के बाद पानी की व्यवस्था हुई थी. एक महीने बाद फिर वही स्थिति हो गई."
ये भी पढ़ें: सिर फोड़ा, गाड़ी तोड़ी; DUSU चुनाव से पहले नॉर्थ कैंपस में बवाल, ABVP और NSUI ने लगाए एक-दूसरे पर आरोप
एमए फाइनल ईयर की छात्रा दीपा कहती हैं, "Gen Z इस देश की नींव है. देश की दिशा और दशा बदलने में इनका बहुत बड़ा हाथ है. यह Gen Z की ताकत है, जो हर नेता आज यह शब्द (Gen Z) बोलने को मजबूर है. मैं चाहती हूं कि 'सत्य निकेतन' जैसी घटना दोबारा न हो और इस पर कुछ ठोस फैसला लिया जाए. कम फीस में हॉस्टल्स ज्यादा से ज्यादा छात्रों को प्रोवाइड करवाए जाने चाहिए."
छात्र संगठनों से छात्रा की अपील...
तनु सिंह सिंह कहती हैं, "हमें चुनाव लड़ने वाले संगठन के नेताओं से कहना है कि डीयू एक पूरा परिवार है. इससे नहीं फर्क पड़ना चाहिए कि कौन से बच्चे ने किसको वोट किया. अगर आप जीतकर आ रहे हैं और आपको ऑफिस में बैठने का मौका मिल रहा है, तो आपकी सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए कि हर छात्र की बात सुनी जानी चाहिए. इससे नहीं मतलब होना चाहिए कि संबंधित छात्र किस कॉलेज का है, किस देश का है, किस राज्य का है. क्योंकि कभी-कभी क्षेत्रवाद भी असर कर जाता है."
ये भी पढ़ें: DUSU Election: ABVP या NSUI, वोटिंग से पहले डीयू के छात्रों ने बताई अपने मन की बात
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं