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मंत्री जी के नाम के आगे ‘माननीय’ नहीं लिखा, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस को फटकारा, जानें पूरा मामला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने FIR में केंद्रीय मंत्री के नाम के आगे ‘माननीय’ शब्द न लिखे जाने पर कड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट ने इसे प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताते हुए पुलिस की जिम्मेदारी तय की और गृह विभाग से जवाब मांगा है.

मंत्री जी के नाम के आगे ‘माननीय’ नहीं लिखा, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस को फटकारा, जानें पूरा मामला
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एफआईआर में केंद्रीय मंत्री के नाम के आगे सम्मानजनक शब्द न होने पर कड़ी आपत्ति जताई
  • कोर्ट ने यूपी सरकार के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी से एफआईआर में ‘माननीय’ शब्द न जोड़ने का कारण स्पष्ट करने को कहा।
  • याचिकाकर्ताओं ने गिरफ्तारी रोकने और धोखाधड़ी की एफआईआर रद्द करने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा थाने में दर्ज आपराधिक धमकी और धोखाधड़ी के एक मामले में एफआईआर रद्द करने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर की. कोर्ट ने एफआईआर में एक केंद्रीय मंत्री के नाम के आगे ‘माननीय (Hon'ble)' और ‘श्री (Mr)' शब्द का प्रयोग न किए जाने पर कड़ी टिप्पणी की.

प्रोटोकॉल के पालन न होने पर कोर्ट की आपत्ति

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही लिखित शिकायत में शिकायतकर्ता द्वारा केंद्रीय मंत्री को गलत तरीके से बताया गया हो, फिर भी एफआईआर दर्ज करते समय पुलिस की जिम्मेदारी थी कि वह प्रोटोकॉल का पालन करती और सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग करती, चाहे वह कोष्ठक (Brackets) में ही क्यों न हो. डिवीजन बेंच ने यूपी सरकार के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (गृह) को आदेश दिया है कि वे एफिडेविट के जरिए से यह स्पष्ट करें कि एफआईआर में संबंधित केंद्रीय मंत्री के नाम के आगे आम तौर पर प्रयुक्त ‘माननीय' शब्द क्यों नहीं जोड़ा गया और एक स्थान पर केवल नाम का ही जिक्र क्यों किया गया.

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48 घंटे में आदेश की प्रति भेजने के निर्देश

कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस आदेश की प्रति रजिस्ट्रार (कम्प्लायंस) द्वारा 48 घंटे के भीतर एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (गृह) और मथुरा के सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस को चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, मथुरा के माध्यम से भेजी जाए. इस मामले में अब अगली सुनवाई छह अप्रैल को होगी। यह आदेश जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डिवीजन बेंच ने पारित किया है.

गिरफ्तारी पर रोक और FIR रद्द करने की मांग

इस मामले में याचिकाकर्ता हर्षित शर्मा और दो अन्य ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दाखिल कर अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगाने और एफआईआर रद्द करने की मांग की है. मामले के अनुसार, मथुरा के हाईवे थाने में 21 दिसंबर 2025 को याचिकाकर्ताओं के खिलाफ बीएनएस की धारा 351(2) (आपराधिक धमकी) और धारा 316(2) (धोखाधड़ी) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी.

केंद्रीय मंत्री से संबंध का दावा कर ठगी का आरोप

शिकायतकर्ता खजान सिंह ने एफआईआर दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता हर्षित शर्मा उसके पास आता‑जाता था और धीरे‑धीरे भरोसा जीतकर लेनदेन शुरू किया. इस मामले की शिकायत के अनुसार, हर्षित शर्मा ने एक केंद्रीय मंत्री से व्यक्तिगत संबंध होने का दावा करते हुए उनके मंत्रालय में नौकरी लगवाने का झांसा दिया.

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नौकरी के नाम पर 80 लाख रुपये हड़पने का आरोप

मामले में की गई एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि इस भरोसे के आधार पर शिकायतकर्ता, उसके मित्रों और सगे संबंधियों से करीब 80 लाख रुपये हड़प लिए गए. शिकायतकर्ता ने कई बार पैसे वापस मांगे, लेकिन रकम नहीं लौटाई गई.

फॉर्च्यूनर गाड़ी गिरवी रखने और चोरी के प्रयास का आरोप

एफआईआर के अनुसार, याचिकाकर्ता हर्षित शर्मा ने अपनी फॉर्च्यूनर गाड़ी शिकायतकर्ता को गिरवी रखने के उद्देश्य से दी थी और उसे शिकायतकर्ता के नाम कराने तथा पैसे लौटाने का भरोसा दिया था. ये भी आरोप है कि बाद में षड्यंत्र के तहत अन्य दो याचिकाकर्ताओं के माध्यम से गाड़ी चोरी करवाने का प्रयास किया गया, लेकिन शिकायतकर्ता ने दोनों को मौके पर पकड़ लिया.

जान से मारने की धमकी का भी आरोप

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इस दौरान उसे जान से मारने की धमकी भी दी गई. इसके बाद छल‑कपट, धोखाधड़ी और जबरन कॉलोनी में घुसकर गाड़ी चुराने के प्रयास को लेकर एफआईआर दर्ज कराई गई.

कोर्ट ने सरकार से मांगी गाड़ी के मालिक की जानकारी

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एजीए शशि शेखर तिवारी को निर्देश दिया कि वे सरकार से निर्देश लेकर यह बताएं कि फॉर्च्यूनर SUV का पंजीकृत मालिक कौन है, जैसा कि शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि यह गाड़ी पहले याचिकाकर्ता ने उसे दी थी.

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