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भाई हम नहीं बचेंगे, वो आखिरी फोन कॉल, दिल्ली मालवीय नगर आग में CA विवेक अग्रवाल के परिवार के 8 लोगों की मौत

Delhi Malviya Nagar Fire Latest Update : दिल्ली के मालवीय नगर के एक होटल फ्लोरिश स्टे बीएंडबी में लगी आग में आठ लोगों की मौत हो गई है. विवेक अग्रवाल अपने परिवार के साथ बीमार पिता को देखने को गुरुग्राम से दिल्ली आए थे.

भाई हम नहीं बचेंगे, वो आखिरी फोन कॉल,  दिल्ली मालवीय नगर आग में CA विवेक अग्रवाल के परिवार के 8 लोगों की मौत
Delhi Malviya Nagar Fire: दिल्ली की आग में विवेक अग्रवाल का परिवार खत्म
  • दिल्ली के मालवीय नगर के होटल में लगी आग में 21 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 40 से ज्यादा लोगों को बचाया गया
  • विवेक अग्रवाल का परिवार गुरुग्राम से दिल्ली आया था अस्पताल में भर्ती बीमार पिता को देखने के लिए
  • चार्टर्ड अकाउंटेंट के परिवार के आठ सदस्यों की मौत इस अग्रिनकांड में, विवेक की पत्नी और दो बेटियों की भी मौत
नई दिल्ली:

दिल्ली में मालवीय नगर के हौज रानी इलाके के होटल फ्लोरिश स्टे बी एंड बी में लगी आग में 21 लोगों की मौत हो गई है. दूरदराज के इलाकों से अपने मरीजों के साथ तीमारदार उनके बेहतर इलाज और स्वस्थ जिंदगी की उम्मीद लेकर होटल में ठहरने आए थे. होटल के पास में ही दिल्ली के कई नामी अस्पताल हैं, जहां देश के दूसरे हिस्सों के साथ अफगानिस्तान, बांग्लादेश समेत विदेशों के मरीज भी आते हैं. इन्हीं में से एक बदनसीब चार्टर्ड अकाउंटेंट विवेक अग्रवाल भी हैं, जिनके परिवार के सात लोगों की इस हादसे में मौत हो गई.  

मालवीय नगर में आग से पूरा परिवार बर्बाद (Delhi Malviya Nagar Fire)

गुरुग्राम में रहने वाले सीए विवेक अग्रवाल के घर पर मातम पसरा दिखा. मालवीय नगर की आग ने पूरे परिवार को उजाड़ दिया. पूरा घर वीरान पड़ा था और बचे-खुचे लोग सिसकियां भर रहकर अपनों को याद कर रहे थे. सेक्टर 46 में विवेक अग्रवाल के खाली घर के बाहर आस पड़ोस के लोग जमा थे. वो कड़वी सच्चाई को स्वीकार नहीं कर पा रहे थे. विवेक अग्रवाल (48 साल) और उनकी पत्नी तरजिनी 47 साल की थीं. मां प्रेम लता और बेटी जीविसा, वारिया के साथ परिवार के आठ लोग आग में जान गंवा बैठे थे. परिवार का कोई करीबी रोने वाला भी नहीं बचा था. बंगले की पहली मंजिल पर मौजूद किरायेदार ने सवालों पर चुप्पी साध रखी थी.

Delhi Hotel Fire

Delhi Hotel Fire

प्राइवेट कंपनी में चार्टर्ड अकाउंटेंट थे विवेक अग्रवाल

एक पड़ोसी योगेंद्र ने बताया कि विवेक एक प्राइवेट कंपनी में चार्टर्ड अकाउंटेंट थे. उनकी पत्नी एक एनजीओ चलाती थीं. पोस्टमार्टम के बाद शव आज दिल्ली से गुरुग्राम पहुंचेंगे. करीबियों का कहना है कि हमें यकीन नहीं हो रहा कि पूरा परिवार आग में जलकर मारा गया. विवेक एक नेकदिल इंसान थे. सभी पड़ोसियों से अच्छे रिश्ते रखते थे. विवेक के रिश्तेदार पुनीत गुप्ता ने कहा कि आग के बीच विवेक का फोन कॉल आया था और कहा था भाई, शायद हम बच न पाएं. उन्होंने, विवेक अग्रवाल और अन्य लोगों को मुंह में रुमाल गीला करके चेहरा ढंकने की सलाह दी.लेकिन आग और धुएं के गुबार में पूरा परिवार मौत के आगोश में चला गया. पुनीत जब दिल्ली पहुंचे, तब तक कोई जिंदा नहीं बचा था. 

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विवेक अग्रवाल के परिवार में दो प्यारी बेटियां

रिश्तेदारों का कहना है कि विवेक के मामा अशोक और मामी कमला गोयल और एक अन्य रिश्तेदार झुमरी लाल गोयल भी मृतकों में शामिल थे, जो राजस्थान के किशनगढ़ जिले के रहने वाले हैं. विवेक ने मालवीय नगर के फ्लोरिश स्टे बीएंडबी होटल में 2 कमरे किराये पर लिए थे.विवेक के पिता राधे श्याम अग्रवाल पिछले कई दिनों से पास के मैक्स अस्पताल में इलाज करा रहे थे.विवेक की बेटी जीविसा भी एक दिन पहले ही बेंगलुरु से अपने दादा से मिलने अस्पताल आई थी.

Delhi Hotel Fire Video

Delhi Hotel Fire Video

परिवार में सिर्फ पिता जिंदा है

परिवार के आठ लोगों की मौत हो चुकी है और परिवार में सिर्फ एकमात्र जिंदा बचे विवेक के पिता राधे श्याम ही बचे हैं, जो अस्पताल में भर्ती हैं. दिल्ली के महावीर एन्क्लेव में विवेक के ससुर प्रेम बंसल रहते हैं. हादसे के वक्त विवेक की मां, बीवी, दो बेटियां, मामा-मामी और एक अन्य रिश्तेदार मौजूद थे. बुरी तरह झुलस गए और उनकी मौत हो गई.

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दिल्ली के मालवीय नगर के होटल में कैसे लगी आग

विवेक के रिश्तेदारों ने होटल की सिक्योरिटी पर सवाल उठाया. होटल मेन रोड पर था, लेकिन अंदर जाने का रास्ता संकरी गली से था. तंग गली के बीच आग से बचने का कोई इंतजाम नहीं था. बेहद संकरी गली में आग से बचने और इमरजेंसी निकासी का कोई रास्ता नहीं था. अभी तक पता नहीं चला है कि आग कैसे और किस कारण लगी थी.  

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एक रिश्तेदार ने कहा कि जानकारी पर वो तुरंत मैक्स अस्पताल पहुंचे तो कभी ऐसी हादसे की कल्पना भी उन्होंने नहीं की थी. शव बुरी तरह झुलस गए थे और तस्वीरें देखकर उन्हें पहचान नहीं जा सका. 
 

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