विज्ञापन

अगर ऐसे अपराध को जारी रहने दिया गया तो सभ्य समाज में रहना मुश्किल हो जाएगा: हनीट्रैप पर इलाहाबाद हाईकोर्ट

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि यह एक ऐसा मामला है जो समाज में बहुत खराब हालात को दिखाता है. यहां पहली याची, तीसरे प्रतिवादी यानी शिकायतकर्ता तक उसके WhatsApp पर पहुंची और मीठी-मीठी बातें करके उसे हनीट्रैप में फंसा लिया.

अगर ऐसे अपराध को जारी रहने दिया गया तो सभ्य समाज में रहना मुश्किल हो जाएगा: हनीट्रैप पर इलाहाबाद हाईकोर्ट
हनीट्रैप को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी
NDTV
प्रयागराज:

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक युवक को महिला द्वारा हनीट्रैप में फंसाकर ब्लैकमेल किए जाने के मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए कड़ी टिप्पणी की है. हाईकोर्ट ने कहा है कि यह एक बहुत ही गंभीर मामला है और ऐसे मामलों की गहन जाँच किया जाना जरूरी है. कोर्ट ने मेरठ जोन के पुलिस महानिरीक्षक को जांच के आदेश दिए है. कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा है कि ज़ोन के सभी ज़िला पुलिस प्रमुखों को सतर्क करना चाहिए कि और वो इसपर कड़ी निगरानी रखें कि कहीं इस तरह का कोई गिरोह सक्रिय तो नहीं है या कोई अन्य गिरोह तो सक्रिय नहीं है जो महिलाओं का इस्तेमाल करके (Honey Trap) 'हनीट्रैप' में फँसाकर या किसी अन्य तरीके से निर्दोष लोगों को ब्लैकमेल कर रहा हो. 

कोर्ट ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि इस तरह के अपराधों को जारी रहने दिया गया तो एक सभ्य समाज में रहना मुश्किल हो जाएगा. कोर्ट ने इस मामले में याचियों की याचिका को वापिस लेने की अनुमति देते हुए याचिका को खारिज कर दिया लेकिन कोर्ट ने अपनी ओर से सख्त निर्देश जारी किए है. कोर्ट ने रजिस्ट्रार (कम्प्लायंस) को निर्देश दिया है कि वो यह ऑर्डर लखनऊ और मेरठ के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के ज़रिए डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस, इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस, मेरठ ज़ोन और एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम), गवर्नमेंट ऑफ़ उत्तर प्रदेश को भेज दें ताकि पूरे प्रदेश में ऐसे गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके. यह आदेश जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की डबल बेंच ने दिया है. 

मामले के अनुसार 24 जनवरी 2026 को बिजनौर के किरतपुर थाने में याचिकाकर्ताओं के खिलाफ एक युवक ने एफआईआर दर्ज कराई थी. एफआईआर में पांच नामजद आरोपी बनाए गए थे जिसमें एक महिला भी शामिल थी. इसके अलावा आरोपियों में दो पुलिसकर्मी भी शामिल थे. पीड़ित युवक ने आरोप लगाया था कि जनवरी में एक महिला ने उससे मीठी–मीठी बात करके उसको फोन के जरिए मैसेज भेजकर एक होटल में बहाने से मिलने के लिए बुलाया था. होटल में महिला ने युवक के साथ यौन संबंध बनाए.

महिला को युवक ने कुछ पैसे भी दिए थे. युवक ने आरोप लगाया है कि इस दौरान महिला ने ब्लैकमेल करने की नीयत से युवक का चुपके से वीडियो भी बना लिया था. इसके बाद पीड़ित युवक को एक अन्य पड़ोसी युवक ने फोन करके अपने घर बुलाया और युवक के घर पहुंचने पर दो पुलिसकर्मी पहले से वहां मौजूद थे. दोनों पुलिसकर्मियों ने पीड़ित युवक को डरा कर कहा कि तुम्हारे खिलाफ एक महिला ने एप्लीकेशन दिया है और तुम्हारा गलत वीडियो दिखाया है इसलिए महिला मामले को दस लाख रुपए देकर जल्दी से निपटा दो. 

इस मामले में दोनों पुलिस कर्मियों ने इससे निपटने के लिए पीड़ित युवक को एक मेडिएटर का नाम भी बताया जो कि उसका पहले से जानकार था. सभी ने मिलकर पीड़ित युवक से मामले को निपटने के लिए पैसों की मांग रखी. पीड़ित युवक ने एफआईआर में आरोप लगाया कि महिला के साथ सभी ने मिलकर उसे षड्यंत्र कर फंसाया और पैसों की मांग की थी. इस मामले में पीड़ित युवक ने दोनों पुलिसकर्मियों समेत पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया जिसमें ब्लैकमेल करने वाली महिला भी शामिल थी. सभी पांचों आरोपियों ने अपने खिलाफ हनीट्रैप और ब्लैकमेल करने के आरोप में दर्ज एफआईआर को रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. कोर्ट में सुनवाई के दौरान इस मामले पर काफी देर तक बहस होने के बाद याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट से याचिका वापस लेने का अनुरोध किया जिसमें शिकायतकर्ता के वकील ने भी उनका साथ दिया. 

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि यह एक ऐसा मामला है जो समाज में बहुत खराब हालात को दिखाता है. यहां पहली याची, तीसरे प्रतिवादी यानी शिकायतकर्ता तक उसके WhatsApp पर पहुंची और मीठी-मीठी बातें करके उसे हनीट्रैप में फंसा लिया. फिर उसे होटल में ले गई जहां उसने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए. इस दौरान, उसने शिकायतकर्ता के कुछ वीडियो क्लिप बना लिए और ब्लैकमेल करने लगी. बाकी सभी याचिकाकर्ता भी पहली याचिकाकर्ता के साथ मिले हुए थे. सभी पुरुष है और इसमें पुलिसवाले भी है. कोर्ट ने कहा कि वीडियो कैप्चर होने के बाद शिकायतकर्ता को दिखाया गया जो धोखे से कैप्चर की गई थी. फिर मामले को निपटने के लिए दस लाख रुपये की मांग की गई. 

शिकायतकर्ता को डरा धमकाकर यह भी कहा गया कि मामला आठ लाख रुपये में तय हो सकता है. कोर्ट ने माना कि इस मामले में पीड़ित यानी शिकायतकर्ता बहुत ज़्यादा चिंता में था, डर और शर्म की भावनाओं से भरा हुआ था. जैसे-जैसे यह ब्लैकमेलिंग बढ़ती गई शिकायतकर्ता ने पैसे नहीं दिए बल्कि पुलिस को मामले की रिपोर्ट कर दी. कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के वकील द्वारा याचिका को वापिस लेने वाली प्रार्थना को स्वीकार तो कर लिया लेकिन अपनी ओर से सख्त निर्देश जारी किया.

वहीं कोर्ट ने याचिका को वापिस लेने के आधार पर खारिज करते हुए टिप्पणी की और कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है.इलाहाबाद हाईकोर्ट में कहा कि अगर हनी ट्रैप जैसे अपराधों को जारी रहने दिया गया तो एक सभ्य समाज में रहना मुश्किल हो जाएगा. हाईकोर्ट ने सख्त होते हुए मेरठ जोन के आईजी को ऐसे मामलों में जांच का आदेश दिया कि अगर इस तरह का कोई गैंग काम कर रहा है या दूसरे गैंग  भी काम कर रहे हैं जो हनी ट्रैप के लिए महिलाओं का इस्तेमाल करके या किसी और तरीके से निर्दोष लोगों को ब्लैकमेल कर रहे हैं तो इसपर कड़ी निगरानी रखी जाए और ऐसे गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.

यह भी पढ़ें: नमाज के लिए घर पर जुटते थे 50-60 लोग, पुलिस ने रोका तो अदालत पहुंचा शख्स; अब इलाहाबाद HC ने दिया ये फैसला

लेखक के बारे में
img
Deepak Gambhir
पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Allahabad Hight Court, Honeytrap
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com