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थाइलैंड की जेल में दोस्ती, पाकिस्तान से दिल्ली को दहलाने की साजिश, बेहद खतरनाक थे आतंकियों के मंसूबे

आरोपियों के पास से पाकिस्तान ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में बने चार हैंड ग्रेनेड मिले हैं. इसके अलावा पाकिस्तान में बने दो ग्लॉक पिस्टल और 24 कारतूस भी बरामद किए गए हैं. इसके अलावा एक चोरी की पल्सर मोटरसाइकिल और एक चोरी की होंडा एक्टिवा भी बरामद हुई है.

थाइलैंड की जेल में दोस्ती, पाकिस्तान से दिल्ली को दहलाने की साजिश, बेहद खतरनाक थे आतंकियों के मंसूबे
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के गिरफ्त में आरोपी.
  • अगर यह मॉड्यूल समय रहते नहीं पकड़ा जाता तो दिल्ली, मुंबई, पंजाब और चंडीगढ़ में बड़ी वारदातें हो सकती थीं.
  • मॉड्यूल को पाकिस्तान व दुबई में बैठे हैंडलर अमीर भट्ट, शाहजाद भट्टी, मुन्ना झिंगाड़ा यावर खान ऑपरेट कर रहे थे.
  • आरोपियों के पास से पाकिस्तान ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में बने चार हैंड ग्रेनेड, दो ग्लॉक पिस्टल और 24 कारतूस मिले.
नई दिल्ली:

राजधानी दिल्ली को दहलाने की एक बड़ी साजिश को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने नाकाम कर दिया है. जांच एजेंसियों के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI, पाकिस्तान और दुबई में बैठे अंडरवर्ल्ड ऑपरेटिव और उनके भारत में मौजूद गुर्गे मिलकर देश के कई बड़े शहरों में आतंक फैलाने की तैयारी कर रहे थे. उनके निशाने पर सिर्फ आम लोग नहीं थे, बल्कि सुरक्षा प्रतिष्ठान, पुलिसकर्मी और देश की महत्वपूर्ण सरकारी संस्थाएं भी थीं. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक लंबे खुफिया ऑपरेशन के बाद इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया. इस कार्रवाई में देश के अलग-अलग हिस्सों से कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इनमें उत्तर प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र, पंजाब और नेपाल के लोग शामिल हैं.

पुलिस का दावा है कि अगर यह मॉड्यूल समय रहते नहीं पकड़ा जाता तो दिल्ली, मुंबई, पंजाब और चंडीगढ़ जैसे शहरों में बड़ी आतंकी वारदातें हो सकती थीं.

पाकिस्तान में बैठे चार हैंडलर चला रहे थे पूरा नेटवर्क

जांच में सामने आया है कि इस पूरे मॉड्यूल को पाकिस्तान और दुबई में बैठे कई हैंडलर ऑपरेट कर रहे थे. इनमें सबसे प्रमुख नाम अमीर भट्ट, शाहजाद भट्टी, मुन्ना झिंगाड़ा और यावर खान के हैं. ये लोग सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड ऐप्स और दूसरे डिजिटल माध्यमों के जरिए भारत में मौजूद युवाओं और अपराधियों से संपर्क कर रहे थे.

इनका तरीका बेहद खतरनाक था. पहले ऐसे युवकों की पहचान की जाती थी जिनका आपराधिक बैकग्राउंड हो या जो पैसों के लालच में आसानी से फंस सकते हों. फिर उन्हें छोटे-मोटे काम देकर नेटवर्क से जोड़ा जाता था. भरोसा बनने के बाद उन्हें हथियार, पैसे और टारगेट दिए जाते थे.

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दिल्ली पुलिस को कैसे मिली भनक?

स्पेशल सेल पिछले कुछ समय से शाहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़े कुछ लोगों की गतिविधियों पर नजर रख रही थी. खुफिया एजेंसियों से भी इनपुट मिल रहे थे कि पाकिस्तान और दुबई में बैठे कुछ लोग भारत में नई भर्ती कर रहे हैं. तकनीकी निगरानी, मोबाइल सर्विलांस, सोशल मीडिया गतिविधियों और मानव स्रोतों से मिली जानकारी को जोड़कर पुलिस ने कई संदिग्ध लोगों की पहचान की. इसके बाद एक-एक कड़ी को जोड़ते हुए जांच आगे बढ़ाई गई.

पुलिस को पता चला कि कुछ लोग दिल्ली और दूसरे शहरों में बड़े हमलों की तैयारी कर रहे हैं. इसके बाद कई राज्यों में एक साथ ऑपरेशन शुरू किया गया.

सबसे पहले जाल में फंसा विजय उर्फ शूटर

जांच के दौरान पुलिस की नजर उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर निवासी 23 साल के विजय उर्फ शूटर पर गई. पुलिस को जानकारी मिली कि विजय लगातार पाकिस्तान और दुबई में बैठे हैंडलरों के संपर्क में था. 14 मई को स्पेशल सेल ने उसे पुणे से गिरफ्तार कर लिया. विजय की गिरफ्तारी इस पूरे ऑपरेशन का टर्निंग पॉइंट साबित हुई.

विजय ने पूछताछ में किए कई खुलासे

पूछताछ में विजय ने कई अहम खुलासे किए. उसने बताया कि उसे दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में आतंक और आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने के निर्देश दिए गए थे. इतना ही नहीं, उसे दिल्ली-NCR में नए लड़कों की भर्ती कर उन्हें नेटवर्क से जोड़ने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी.  पुलिस अधिकारियों के मुताबिक विजय का काम सिर्फ खुद वारदात करना नहीं था, बल्कि नए लोगों को तैयार कर पूरे नेटवर्क को फैलाना भी था.

विजय से पूछताछ के बाद झारखंड से पकड़ा गया साथी

विजय से पूछताछ के दौरान झारखंड के साहिबगंज निवासी नितीश पासवान का नाम सामने आया. पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर 17 मई को उसे भी गिरफ्तार कर लिया. नितीश इस नेटवर्क का सक्रिय सदस्य था और विजय के संपर्क में रहकर कई गतिविधियों में शामिल था.

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मुंबई से सामने आया बड़ा आतंकी कनेक्शन

विजय और नितीश से पूछताछ के बाद जांच का दायरा मुंबई तक पहुंच गया. वहां पुलिस ने 27 मई को तौकीर रिजवान अहमद शेख और साजिद महबूब शेख उर्फ अरबाज खान को गिरफ्तार किया. दोनों आरोपी सीधे तौर पर ISI हैंडलर यावर खान और मुन्ना झिंगाड़ा के संपर्क में थे. जांच में पता चला कि इन्हें मुंबई के रहने वाले हुजैफा नाम के व्यक्ति ने भर्ती किया था. अब मुंबई पुलिस ने हुजैफा को पकड़ लिया है. 

जांच एजेंसियों के मुताबिक तौकीर और अरबाज को दिल्ली और मुंबई में ग्रेनेड हमले और फायरिंग की जिम्मेदारी दी गई थी. उन्हें संभावित टारगेट की रेकी करने और सही समय का इंतजार करने को कहा गया था.

पंजाब मॉड्यूल को दिल्ली पहुंचने से पहले पकड़ा गया

मुंबई के आरोपियों से पूछताछ के दौरान पुलिस को एक और बड़ी जानकारी मिली. पता चला कि पंजाब से तीन युवक दिल्ली पहुंच रहे हैं और उन्हें भी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने का काम दिया गया है. इसके बाद स्पेशल सेल ने पूरी तैयारी के साथ जाल बिछाया. 30 मई की रात करीब एक बजे महरौली-बदरपुर रोड पर पुलिस ने इन तीनों को रोक लिया.

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पंजाब के लुधियाना से पकड़े गए तीन बदमाश

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हरविंदर सिंह, गगनदीप सिंह और मनजीत सिंह के रूप में हुई. तीनों पंजाब के लुधियाना  के रहने वाले हैं.स्पेशल सेल के स्पेशल सीपी का कहना है कि इनके पास मौजूद हथियारों और विस्फोटकों को देखकर साफ लग रहा था कि ये किसी साधारण अपराध के लिए नहीं बल्कि बड़ी आतंकी कार्रवाई के लिए दिल्ली पहुंचे थे.

बरामद हथियारों ने बढ़ाई चिंता

स्पेशल सेल की कार्रवाई में जो हथियार बरामद हुए हैं, उन्होंने जांच एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है. आरोपियों के पास से पाकिस्तान ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में बने चार हैंड ग्रेनेड मिले हैं. इसके अलावा पाकिस्तान में बने दो ग्लॉक पिस्टल और 24 कारतूस भी बरामद किए गए हैं. पुलिस के मुताबिक कि भारत के भीतर पाकिस्तान में बने हथियारों का मिलना इस बात का बड़ा संकेत है कि सीमा पार से संचालित नेटवर्क सक्रिय रूप से काम कर रहा था.

इसके अलावा एक चोरी की पल्सर मोटरसाइकिल और एक चोरी की होंडा एक्टिवा भी बरामद हुई है. माना जा रहा है कि इन वाहनों का इस्तेमाल रेकी और वारदात के दौरान भागने के लिए किया जाना था.

मोबाइल चैट ने खोले कई राज

आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों के साथ हुई कई बातचीत मिली हैं. पुलिस को ऐसे चैट, ऑडियो मैसेज और डिजिटल सबूत मिले हैं जो सीधे तौर पर इस नेटवर्क को पाकिस्तान स्थित हैंडलरों से जोड़ते हैं. जांच एजेंसियां अब इन मोबाइल फोन और डिजिटल डिवाइस से डाटा रिकवर कर पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं.

नेपाल कनेक्शन ने चौंकाया

पूरी जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाला खुलासा नेपाल कनेक्शन का रहा. पुलिस ने नेपाल के नागरिक अंग कामी लामा को गिरफ्तार किया है. उसकी भूमिका बेहद अहम बताई जा रही है. जांच में सामने आया कि दिल्ली में आतंकियों के ठहरने के लिए सुरक्षित ठिकानों की व्यवस्था करना और उन्हें पैसे पहुंचाना उसकी जिम्मेदारी थी. यानी वह इस पूरे मॉड्यूल का लॉजिस्टिक और फाइनेंस मैनेजर बनकर काम कर रहा था.

थाईलैंड की जेल से शुरू हुई थी दोस्ती

अंग कामी लामा की कहानी भी बेहद दिलचस्प है. जांच में पता चला है कि वह 2001 से 2018 तक थाईलैंड की जेल में एक ड्रग्स मामले में बंद रहा था. उसी जेल में उसकी मुलाकात पाकिस्तान के एजाज रसूल और मोहम्मद सलीम उर्फ मुन्ना झिंगाड़ा से हुई थी. जेल में बनी यही पहचान बाद में गहरी दोस्ती में बदल गई. जेल से बाहर आने के बाद भी लामा लगातार मुन्ना झिंगाड़ा के संपर्क में रहा और धीरे-धीरे उसके नेटवर्क का हिस्सा बन गया.

आखिर कौन है मुन्ना झिंगाड़ा

मुन्ना झिंगाड़ा का नाम भारतीय और अंतरराष्ट्रीय अंडरवर्ल्ड में लंबे समय से चर्चा में रहा है. जांच एजेंसियों के मुताबिक वह दाऊद इब्राहिम के नेटवर्क का पुराना सदस्य है. साल 2000 में बैंकॉक में छोटा राजन पर हुए हमले में भी उसका नाम सामने आया था. बताया जाता है कि उसने दाऊद इब्राहिम के इशारे पर यह हमला किया था.

  • इस मामले में गिरफ्तारी के बाद उसने करीब 17 साल थाईलैंड की जेल में बिताए. जेल से बाहर आने के बाद उसने फिर से अपने पुराने संपर्क सक्रिय कर लिए और अब पाकिस्तान में बैठकर नेटवर्क चला रहा है.
  • दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है. पूछताछ में कई और नाम सामने आए हैं. नेपाल समेत दूसरे देशों और भारत के कई राज्यों में फैले नेटवर्क की जांच की जा रही है.
  • जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर इस मॉड्यूल को फंडिंग कहां से मिल रही थी, हथियार भारत तक कैसे पहुंचे और इस साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल थे.
  • फिलहाल सभी आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस कार्रवाई ने एक बड़े आतंकी नेटवर्क को समय रहते बेनकाब कर दिया है और संभवतः कई बड़ी वारदातों को होने से रोक दिया गया है.

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