दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ईवी पॉलिसी 2026 को मंजूरी दे दी है. यह नीति 1 जुलाई 2026 से लागू होगी और 31 मार्च 2030 तक प्रभावी रहेगी. सरकार इस नीति पर अगले चार सालों में 7,000 करोड़ रुपये से अधिक का सीधा निवेश करेगी, जबकि अलग-अलग सुविधाओं और छूट को मिलाकर जनता को करीब 15,000 करोड़ रुपये का कुल लाभ मिलेगा. लेकिन एक्सपर्ट अब इस नई EV पॉलिसी पर सवाल खड़े कर रहे हैं.
लग्जरी EV कार खरीदने पर 5 लाख की सब्सिडी क्यों?
दिल्ली सरकार के पूर्व डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर अनिल छिकारा कहते हैं कि टैक्स पेयर का पैसा लग्जरी EV कार खरीदने पर 5 लाख की सब्सिडी देने पर क्यों खर्च किया जा रहा है. उनका यह भी कहना है कि नई नीति में समय से पहले गाड़ियों को कबाड़ करने का नियम BS6 CNG स्कूल बसों को प्रभावित करेगा, जिससे उनकी 15 साल की तय उम्र घटकर सिर्फ 5 साल जैसी रह जाएगी. इसके अलावा, छिकारा का कहना है कि बिना ठीक-ठाक चार्जिंग व्यवस्था बनाए अगर दोपहिया ईवी वाहनों की बिक्री का लक्ष्य रखा जाएगा, तो लोगों को परेशानी होगी. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर मजबूत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं होगा तो बिजली के स्थानीय ग्रिड पर ज्यादा दबाव पड़ेगा. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि दिल्ली में अर्थिंग ऑडिट किया जाना चाहिए और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को भी बढ़ावा देना जरूरी है.

क्या है नई ईवी पॉलिसी?
इस पॉलिसी के तहत 2027 से नए थ्री-व्हीलर और 2028 से सभी नए टू-व्हीलर सिर्फ इलेक्ट्रिक ही रजिस्टर होंगे. स्कूल बसों को भी चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बनाया जाएगा. इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर पहले तीन साल तक अलग-अलग सब्सिडी मिलेगी- दोपहिया पर पहले साल 30,000 रुपये, दूसरे साल 20,000 और तीसरे साल 10,000 रुपये तक प्रोत्साहन दिया जाएगा. तिपहिया पर पहले साल 50,000 रुपये, दूसरे साल 30,000 और तीसरे साल 20,000 रुपये तक मिलेंगे, जबकि एन-1 श्रेणी के इलेक्ट्रिक ट्रक पर 1 लाख रुपये तक की मदद दी जाएगी.
पुराने वाहनों को स्क्रैप करने पर भी प्रोत्साहन मिलेगा- पुराने दोपहिया पर 10,000 रुपये, तिपहिया पर 25,000 रुपये, चारपहिया पर 1 लाख रुपये, एन-1 ट्रक पर 50,000 रुपये और ग्रामीण सेवा वाहन पर 15,000 रुपये दिए जाएंगे. इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस पूरी तरह माफ होगी, हालांकि चारपहिया वाहनों के लिए यह छूट 30 लाख रुपये तक की कीमत वाले ईवी पर ही लागू होगी. सभी सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में डीबीटी के जरिए भेजी जाएगी.
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