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कौन सा Home Loan होता है बेस्ट, फिक्स्ड, फ्लोटिंग या हाइब्रिड... जानें कौन सा चुनें

होम लोन के लिए बैंक फिक्सड होम लोन, फ्लोटिंग होम लोन और हाइब्रिड होम लोन का विकल्प देता है. इन तीनों होम लोन के विकल्प में ब्याज दर को लेकर शर्तें होती है.

कौन सा Home Loan होता है बेस्ट, फिक्स्ड, फ्लोटिंग या हाइब्रिड... जानें कौन सा चुनें
सही होम लोन को चुनने के लिए विकल्पों को समझें
NDTV इंडिया ग्राफिक्‍स

घर खरीदने से पहले होम लोन (Home Loan) को लेकर लोगों के मन में काफी सवाल होते हैं. वहीं होम लोन का चयन करना भी बड़ी चुनौती होती है. होम लोन लेना आसान प्रक्रिया नहीं है. इसके लिए काफी चीजों को देखा जाता है. इसमें सिविल स्कोर, आप कितना लोन ले रहे हैं और उस पर ब्याज कितना लगेगा यह सब सोचना जरूरी होता है. वहीं जब आप होम लोन लेने के लिए बैंक जाते हैं तो आपको तीन विकल्प दिये जाते हैं, जिसमें अलग-अलग ब्याज दर की शर्तें होती है.

होम लोन के लिए बैंक फिक्सड होम लोन, फ्लोटिंग होम लोन और हाइब्रिड होम लोन का विकल्प देता है. इन तीनों होम लोन के विकल्प में ब्याज दर को लेकर शर्तें होती है, जिसे समझना जरूरी है. आपको इनमें से एक का चुनाव करना होगा. आपको इसके चुनाव करने से पहले अपनी भविष्य की वित्तीय स्थिति का भी ध्यान रखना होगा. अगर आप सही विकल्प का चुनाव नहीं करते हैं तो आपको ज्यादा ब्याज भी चुकाना हो सकता है.

फिक्स्ड होम लोन क्या है

फिक्स्ड होम लोन में ब्याज दर फिक्स होती है. इसका मतलब है कि जब आप लोन लेते हैं तो आप जब तक लोन की EMI भरते हैं उस दौरान आपको फिक्स ब्याज देना होता है. अगर बाजार में ब्याज दर घट रहा है या बढ़ रहा है, इसका असर आपकी EMI पर नहीं होता है. जैसे अगर आपने 8.5 प्रतिशत ब्याज पर होम लोन लिया है और भविष्य में बाजार में ब्याज 9.5 प्रतिशत हो जाता है तो भी आपको पुराने ब्याज दर पर ही EMI देनी होती है.

इसमें आपको पता होता है कि आपको हर महीने कितनी EMI देनी है. इससे भविष्य में बजट पर असर नहीं पड़ता है. अगर बाजार में ज्यादा ब्याज दर होती है तो भी आप सुरक्षित रहते हैं.

फ्लोटिंग होम लोन क्या है?

होम लोन की अवधि ज्यादा होती है ऐसे में बाजार के फ्लोटिंग होने की ज्यादा संभावना होती है. ऐसे में होम लोन लेने वाले लोग ज्यादातर लोग फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन का चुनाव करते हैं. इसमें ब्याज दर फिक्स नहीं होती है. यह बाजार की स्थितियां और RBI के रेपो रेट पर निर्भर करती है. अगर रेपो रेट बढ़ता है तो EMI बढ़ जाती है और रेपो रेट घटता है तो EMI भी घट जाती है. 

फ्लोटिंग रेट में फायदा यह होता है कि इस पर फिक्स रेट के मुकाबले सस्ता होता है. इसमें RBI के नियम के मुताबकि, फ्लोटिंग रेट होम लोन में प्री-पेमेंट या फोरक्लोजर पर कोई पेनाल्टी नहीं लगती है. हालांकि इसमें अनिश्चितता बनी रहती है. अगर RBI रेपो रेट लगातार बढ़ता है तो EMI का बोझ या लोन की अवधि दोनों बढ़ सकते हैं.

हाइब्रिड होम लोन क्या है?

हाइब्रिड होम लोन फिक्स्ड और फ्लोटिंग रेट का मिला जुला रूप होता है. इसमें लोन की शुरुआत के कुछ सालों में ब्याज दर फिक्स्ड रहती है. वहीं फिक्स्ड पीरियर समाप्त होने के बाद लोन अपने आप फ्लोटिंग रेट में बदल जाता है. इसमें फायदा यह है कि जो लोग घर खरीदते वह शुरुआत में EMI का कोई रिस्क या बदलाव नहीं चाहते हैं तो यह उनके लिए अच्छा विकल्प है. हालांकि फिक्स्ड पीरियड खत्म होते ही आपकी EMI में अचानक बदलाव होता है. 

होम लोन लेते वक्त आपको अपनी भविष्य की वित्तीय स्थिति का ध्यान रखते हुए चुनाव करना होगा. आपके लिए कौन से ब्याज के विक्लप आसान और सही रहेंगे इसका ध्यान रखना होगा.

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