होम लोन और रेपो रेट से लिंक्ड दूसरे कर्ज की EMI बढ़ने का खतरा एक बार मंडरा रहा है. ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज फर्म नोमुरा के ग्लोबल मैक्रो रिसर्च प्रमुख रॉब सुब्बारमन के मुताबिक, बढ़ती महंगाई के दबाव को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस साल की अपनी अगली दोनों मौद्रिक नीति बैठकों में ब्याज दर बढ़ा सकता है.
उनका अनुमान है कि RBI अक्टूबर और दिसंबर, दोनों बैठकों में ब्याज दर में बढ़ोतरी कर सकता है. अगर ऐसा होता है तो होम लोन, कार लोन और दूसरे कर्ज की लागत बढ़ सकती है.
महंगाई 6% के पार जाने का अनुमान
नोमुरा का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी हुई है. वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की GDP ग्रोथ 7% रहने का अनुमान है. वहीं आने वाले महीनों में महंगाई 6% के पार जा सकती है.
महंगाई में बढ़ोतरी का दबाव RBI पर ब्याज दरों को सख्त करने के लिए दबाव बढ़ा सकता है. सुब्बारमन ने कहा कि अगर महंगाई का दबाव बना रहता है तो अक्टूबर और दिसंबर में दर बढ़ोतरी की संभावना है.
आपकी EMI पर क्या होगा असर?
अगर RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंकों और दूसरे कर्जदाताओं की फंडिंग लागत बढ़ सकती है. इसका असर नए होम लोन की ब्याज दरों पर पड़ सकता है. फ्लोटिंग रेट वाले मौजूदा होम लोन ग्राहकों की EMI या लोन की अवधि भी बढ़ सकती है.
हालांकि, असल असर इस बात पर निर्भर करेगा कि RBI कितनी बढ़ोतरी करता है और बैंक उस बढ़ोतरी को ग्राहकों तक किस हद तक पहुंचाते हैं.
भारत की ग्रोथ मजबूत, निवेश की उम्मीद
सुब्बारमन के मुताबिक भारत के पास वैश्विक निवेश आकर्षित करने और ग्लोबल वैल्यू चेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के बड़े अवसर हैं. उन्होंने कहा कि भारत अलग-अलग क्षेत्रों में पूंजी आकर्षित कर सकता है.
उन्होंने FCNR-B जमा में उम्मीद से बेहतर प्रवाह और मजबूत भुगतान संतुलन अधिशेष की संभावना का भी जिक्र किया.
अमेरिका में भी ब्याज दर बढ़ने का अनुमान
सुब्बारमन ने अमेरिकी मौद्रिक नीति पर भी बात की. उनके मुताबिक इस साल अमेरिकी फेडरल रिजर्व की कम से कम एक और ब्याज दर बढ़ोतरी हो सकती है, जिसकी संभावना दिसंबर में है.
उन्होंने बताया कि फेड के 18 नीति निर्माताओं में से 12 ने इस साल एक और दर बढ़ोतरी का अनुमान जताया है. चार ने दो और बढ़ोतरी की संभावना जताई, जबकि सिर्फ दो ने आगे किसी बढ़ोतरी का अनुमान नहीं लगाया.
वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों और ऊर्जा कीमतों का रुख भी आगे महंगाई और मौद्रिक नीति के लिए अहम रहेगा.
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