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Home Buying Survey: 50% खरीदार अगले 2 साल में लेना चाहते हैं घर, लेकिन EMI और जॉब का है डर! क्या बता रहे Experts?

Home Buying Sentiment Survey 2026 के मुताबिक 50% संभावित खरीदार अगले दो साल में घर खरीदना चाहते हैं. जानिए बजट, EMI, Job Security और 2-3 BHK को लेकर खरीदारों की पसंद और चुनौतियां. इसमें डेवलपर्स के लिए संदेश भी छिपा है.

Home Buying Survey: 50% खरीदार अगले 2 साल में लेना चाहते हैं घर, लेकिन EMI और जॉब का है डर! क्या बता रहे Experts?
Home Buying Plan: घर खरीदना है, लेकिन EMI का डर! Survey में सामने आई खरीदारों की नई सोच

Home Buying Survey 2026: अपना घर खरीदना आज भी बड़ी संख्या में भारतीयों का सपना है, लेकिन घर की बढ़ती कीमतें, होम लोन की ईएमआई और नौकरी की सुरक्षा को लेकर चिंता इस सपने के रास्ते में बड़ी चुनौती बन रही है. कोलियर्स की ताजा रिपोर्ट ‘होमबाइंग सेंटिमेंट सर्वे 2026: डिकोडिंग इंडियाज इवॉल्विंग बायर प्रेफरेंसेज' के मुताबिक, सर्वे में शामिल करीब 50% संभावित खरीदार अगले दो वर्षों में घर खरीदने की योजना बना रहे हैं.

हालांकि, घर खरीदने की इच्छा मजबूत है, लेकिन खरीदार अब पहले के मुकाबले ज्यादा सोच-समझकर फैसला ले रहे हैं. वे केवल घर की कीमत और लोकेशन नहीं देख रहे, बल्कि ये भी देख रहे हैं कि उनकी आय, नौकरी और भविष्य की वित्तीय स्थिति के हिसाब से घर खरीदना कितना सही रहेगा.

घर खरीदने में सबसे बड़ी परेशानी क्या?

करीब 31% उत्तरदाताओं ने संपत्ति की कीमत और अपने बजट को घर खरीदने में सबसे बड़ी चिंता बताया. यानी घर खरीदने की इच्छा होने के बावजूद कीमत खरीदारों के फैसले को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रही है.

इसके बाद नौकरी की सुरक्षा और आय की स्थिरता को लेकर चिंता सामने आई. घर खरीदना लंबे समय की वित्तीय जिम्मेदारी है. इसलिए खरीदार ये देख रहे हैं कि अगर आने वाले समय में आय पर दबाव आता है, तो क्या वे लगातार होम लोन की EMI चुका पाएंगे.

घर की कीमत के अलावा डाउन पेमेंट, ईएमआई और दूसरे खर्च भी खरीदारों के बजट पर असर डाल रहे हैं. यही वजह है कि संभावित खरीदार अलग-अलग प्रॉपर्टी और भुगतान विकल्पों की तुलना कर रहे हैं.

न्यूमैक्स सिटी के मैनेजिंग डायरेक्टर सुनील गोयल के मुताबिक, आज के खरीदार केवल प्रॉपर्टी की कीमत नहीं देखते. वे अपनी मासिक आय और बजट के हिसाब से निवेश की उपयुक्तता और भुगतान की शर्तों को भी समझना चाहते हैं. उनके मुताबिक, डेवलपर्स को अलग-अलग बजट और जरूरतों वाले ग्राहकों के हिसाब से विकल्प उपलब्ध कराने होंगे.

50 लाख से 1.5 करोड़ रुपये के घरों पर ज्यादा नजर

सर्वे के मुताबिक, 46% उत्तरदाता 50 लाख से 1.5 करोड़ रुपये तक की कीमत वाली प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं. इससे पता चलता है कि इस प्राइस सेगमेंट में संभावित खरीदारों की अच्छी दिलचस्पी बनी हुई है.

वहीं, मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े रियल एस्टेट बाजारों में ज्यादा कीमत वाली प्रॉपर्टी की मांग भी बनी हुई है. हालांकि, यहां भी खरीदार कीमत और मिलने वाली सुविधाओं के बीच संतुलन देख रहे हैं.

अब खरीदार सिर्फ बड़ा घर नहीं चाहते. घर का आकार, लेआउट, कनेक्टिविटी और आसपास की सुविधाएं भी उनके फैसले में महत्वपूर्ण हो गई हैं.

2 और 3 BHK सबसे पसंदीदा

सर्वे में करीब 62% संभावित खरीदारों ने 2 और 3 BHK अपार्टमेंट को प्राथमिकता दी है. यानी ज्यादातर खरीदार ऐसे घर चाहते हैं, जो परिवार की जरूरत पूरी करने के साथ उनके बजट में भी फिट बैठें.

नॉर्थविंड एस्टेट्स के चेयरमैन मनोज कुमार गर्ग के मुताबिक, घर खरीदारों की प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं. अब खरीदार सिर्फ बड़े घर के बजाय बेहतर कनेक्टिविटी, सुरक्षा और सामुदायिक सुविधाओं को भी महत्व दे रहे हैं.

सिर्फ सस्ता घर नहीं, आसान भुगतान भी चाहिए

घर खरीदने के फैसले में कीमत के साथ पेमेंट की शर्तें भी महत्वपूर्ण हो गई हैं. सर्वे में 65% उत्तरदाताओं ने आकर्षक कीमत और भुगतान में लचीलेपन को तत्काल खरीदारी के फैसले में महत्वपूर्ण बताया.

इसका मतलब साफ है कि अगर घर की कीमत खरीदार के बजट में है, लेकिन भुगतान की शर्तें मुश्किल हैं, तो खरीदारी का फैसला टल सकता है.

डेवलपर्स के लिए भी ये एक महत्वपूर्ण संकेत है. घर की कीमत, भुगतान का समय और पजेशन की समयसीमा जितनी स्पष्ट होगी, खरीदार के लिए फैसला लेना उतना आसान हो सकता है.

कोलियर्स इंडिया के रेजिडेंशियल ट्रांजैक्शन सर्विसेज के प्रबंध निदेशक रवि शंकर सिंह के मुताबिक, भारत का आवासीय बाजार अब भी मुख्य रूप से जरूरत के लिए घर खरीदने वाले ग्राहकों पर आधारित है. हालांकि, खरीदारी की इच्छा को वास्तविक सौदे में बदलना अब पहले से ज्यादा जटिल हो गया है. सर्वे के मुताबिक, 50% संभावित खरीदार अगले दो वर्षों में घर खरीदना चाहते हैं, लेकिन वे कीमतों को लेकर ज्यादा संवेदनशील और जोखिम को लेकर सतर्क हैं.

रेडी टू मूव घरों की बढ़ी पसंद

खरीदारों की एक और बड़ी प्राथमिकता घर कब मिलेगा, इसे लेकर है. सर्वे के मुताबिक, 60% से ज्यादा संभावित खरीदार रेडी-टू-मूव या जल्द तैयार होने वाले घरों को निर्माणाधीन या हाल में लॉन्च हुई परियोजनाओं के मुकाबले प्राथमिकता दे रहे हैं.

इसकी बड़ी वजह पजेशन को लेकर निश्चितता है. निर्माणाधीन प्रोजेक्ट में खरीदार को घर मिलने के लिए इंतजार करना पड़ता है और निर्माण से जुड़े जोखिम भी होते हैं. इसके मुकाबले रेडी-टू-मूव घर में खरीदार को प्रॉपर्टी की स्थिति और पजेशन के बारे में ज्यादा स्पष्टता मिलती है.

हालांकि, युवा खरीदारों में निर्माणाधीन प्रोजेक्ट को लेकर रुचि ज्यादा है. सर्वे के मुताबिक, 30 साल से कम उम्र के करीब आधे खरीदार निर्माणाधीन परियोजनाओं में जोखिम लेने के लिए तैयार हैं.

अंसल हाउसिंग के डायरेक्टर कुशाग्र अंसल के मुताबिक, रेडी-टू-मूव घरों की बढ़ती पसंद बताती है कि खरीदार अपने निवेश को लेकर ज्यादा निश्चितता चाहते हैं. निर्माण की स्थिति, पजेशन की समयसीमा और प्रोजेक्ट की गुणवत्ता उनके फैसले में अहम भूमिका निभा रही है.

त्योहारों में बढ़ सकती है घरों की मांग

त्योहारी सीजन को आमतौर पर घर खरीदने के लिए महत्वपूर्ण समय माना जाता है. ऐसे में आने वाली तिमाहियों में आवासीय मांग को सहारा मिलने की उम्मीद है. लेकिन खरीदारों की बदलती प्राथमिकताओं को देखते हुए सिर्फ नए प्रोजेक्ट लॉन्च करना पर्याप्त नहीं होगा.

कोलियर्स इंडिया के नेशनल डायरेक्टर एवं हेड ऑफ रिसर्च विमल नाडर के मुताबिक, प्रमुख आवासीय बाजारों में करीब 62% संभावित खरीदार 2 और 3 BHK अपार्टमेंट पसंद कर रहे हैं. दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु और हैदराबाद में बड़े घरों की मांग ज्यादा है, जबकि मुंबई में कॉम्पैक्ट और जरूरत के हिसाब से घरों की मांग बनी हुई है.

खरीदार का फोकस अब सिर्फ 'घर' पर नहीं

सर्वे के आंकड़ों को देखें तो घर खरीदने की इच्छा बनी हुई है, लेकिन खरीदार अब ज्यादा सतर्क हैं. उनके लिए कीमत, EMI, डाउन पेमेंट, नौकरी की सुरक्षा, भुगतान की शर्तें, कनेक्टिविटी और पजेशन सभी महत्वपूर्ण हो गए हैं.

यानी रियल एस्टेट बाजार में मांग तो है, लेकिन खरीदार अब सिर्फ ये नहीं पूछ रहा कि ‘घर कितना बड़ा है?' बल्कि ये भी देख रहा है कि ‘घर खरीदने के बाद मेरी जेब पर कितना बोझ पड़ेगा और मुझे घर कब मिलेगा?'

आने वाले समय में यही बदलाव डेवलपर्स की रणनीति को भी प्रभावित कर सकता है. अलग-अलग बजट में घर, आसान भुगतान विकल्प, बेहतर कनेक्टिविटी और समय पर पजेशन जैसे फैक्टर संभावित खरीदारों को वास्तविक खरीदारी के फैसले तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

Source: NDTV Research, Colliers Homebuying Sentiment Survey 2026, Real Estate Experts

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