उत्तर प्रदेश में पैक्ड खाद्य पदार्थों (Packed Food) को लेकर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने अहम निर्देश जारी किए हैं. अब प्रदेश की सीमा में पैक किए जाने वाले खाद्य उत्पादों के पैकेट पर वास्तविक निर्माण (MFG) या प्रोसेसिंग की तारीख लिखना अनिवार्य होगा. सिर्फ पैकिंग या री-पैकिंग की तारीख को मैन्युफैक्चरिंग डेट बताकर काम नहीं चलेगा. विभाग के स्पेशल जांच में सामने आया कि कुछ निर्माता खाद्य पदार्थ तैयार करने के बाद उन्हें लंबे समय तक गोदाम में रखते थे. इसके बाद पुराने खाद्य पदार्थों को छोटे पैकेटों में भरकर उनकी पैकिंग की नई तारीख को ही निर्माण तारीख (MFG Date) के तौर पर दर्ज कर दिया जाता था. कुछ मामलों में री-लेबलर और री-पैकर की ओर से भी केवल पैकिंग की तारीख दर्ज किए जाने की बात सामने आई.
पुराने खाद्य पदार्थ को नया दिखाने पर रोक
विभाग के मुताबिक, किसी खाद्य पदार्थ की शेल्फ लाइफ उसकी वास्तविक निर्माण या प्रोसेसिंग तारीख से तय होती है. ऐसे में अगर कोई उत्पाद कई महीने तक गोदाम में रखा रहा और बाद में उसे नए पैकेट में भरकर नई तारीख डाल दी गई, तो उपभोक्ता को उसके वास्तविक निर्माण और स्टोरेज की अवधि की सही जानकारी नहीं मिल पाती.
इस व्यवस्था से उपभोक्ता यह समझ सकता है कि उत्पाद हाल ही में तैयार किया गया है, जबकि वास्तव में वह काफी पुराना हो सकता है. इससे उत्पाद की वास्तविक उम्र, स्टोरेज अवधि और गुणवत्ता को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है.
पैकेट पर अब क्या लिखना होगा?
नए निर्देश के मुताबिक खाद्य कारोबारियों को पैकेट पर उस तारीख का उल्लेख करना होगा, जिस दिन खाद्य पदार्थ का वास्तविक निर्माण या प्रोसेसिंग हुआ था. बाद में की गई पैकिंग की तारीख को मैन्युफैक्चरिंग डेट के रूप में दर्ज नहीं किया जा सकेगा. इसका मतलब है कि किसी खाद्य पदार्थ को बाद में छोटे पैकेट में भरने से उसकी निर्माण तारीख नहीं बदलेगी. री-पैकिंग की तारीख अलग बात होगी, लेकिन उसे निर्माण तारीख के तौर पर नहीं दिखाया जा सकेगा.
जांच में सामने आए मामलों के बाद फैसला
खाद्य सुरक्षा विभाग ने खाद्य विनिर्माण इकाइयों के स्पेशल जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर यह निर्देश जारी किए हैं. विभाग का कहना है कि यह कदम उपभोक्ताओं के हित और उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है. नई व्यवस्था से खाद्य उत्पादों की वास्तविक निर्माण तिथि को लेकर पारदर्शिता बढ़ेगी और उपभोक्ता पैकेट देखकर उत्पाद की वास्तविक उम्र का बेहतर अंदाजा लगा सकेंगे. रोशन जैकब सचिव एवं कमिश्नर, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने आदेश जारी किया है.
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