UP Online Warasat Registration Process: उत्तर प्रदेश में जमीन और भू अभिलेखों के रखरखाव को पारदर्शी व आधुनिक बनाने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. राज्य में पुरानी 6 वर्षीय रोस्टर व्यवस्था को समाप्त कर लागू की गई रियल टाइम खतौनी प्रणाली का काम लगभग 99.86 प्रतिशत पूरा हो चुका है. वहीं, राजस्व विभाग के पोर्टल के जरिए अब तक 65 लाख से ज्यादा ऑनलाइन विरासत यानी उत्तराधिकार) दर्ज की जा चुकी हैं. अब घर बैठे मृतक भूस्वामी के वारिसों का नाम राजस्व रिकॉर्ड में चढ़वाने की सुविधा उपलब्ध है.
उत्तर प्रदेश में पहले खतौनी का निर्माण और संशोधन छह साल के लंबे रोस्टर के अनुसार ऑफलाइन हुआ करता था. विरासत दर्ज कराने, खसरा निर्माण और भू नक्शे की जांच के लिए आम नागरिकों को तहसील और लेखपाल के चक्कर काटने पड़ते थे. लेकिन, अब राजस्व विभाग ने तकनीक का सहारा लेते हुए पूरी व्यवस्था को डिजिटल कर दिया है. अब क्यूआर कोड और डिजिटल हस्ताक्षर युक्त रियल टाइम खतौनी तैयार की जा रही है, जिससे जमीन के रिकॉर्ड में धोखाधड़ी की गुंजाइश खत्म हो गई है.
डिजिटल भू नक्शे और अंश निर्धारण में हासिल की ये कामयाबी
- भूमि स्वामी की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारियों का नाम ऑनलाइन दर्ज कराने की प्रक्रिया से अब तक 65 लाख से अधिक परिवारों को सीधा लाभ मिला है.
- प्रदेश के सभी उपलब्ध भू नक्शों और शजरों यानी वंशावली का 100 प्रतिशत डिजिटलीकरण पूरा कर लिया गया है.
- 98 प्रतिशत डिजिटल भू नक्शों को सीधे खतौनी से लिंक कर दिया गया है, जिससे जमीन के रकबे और हिस्से की डिजिटल पहचान आसान हो गई है.
- 85 प्रतिशत से अधिक गाटों यानी जमीन के टुकड़ों में खातेदारों के हिस्से का स्पष्ट निर्धारण पूरा हो चुका है.
- वर्ष 2021 से लागू इस ऐप के जरिए खेतों से संबंधित विवरण अब सीधे डिजिटल रूप में दर्ज किए जा रहे हैं.
ऑनलाइन विरासत आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
- मृतक भू स्वामी का मूल मृत्यु प्रमाण पत्र
- सभी वारिसों के पहचान पत्र
- वारिसों का शपथ पत्र
- पुरानी खतौनी या अधिकार अभिलेख की डिजिटल नकल
- निवास प्रमाण पत्र या राशन कार्ड
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ऐसे ऑनलाइन दर्ज कराएं विरासत
अगर आपके परिवार में किसी भूस्वामी की मौत के बाद उनकी कृषि योग्य भूमि या अचल संपत्ति का वारिस के रूप में नाम दर्ज कराना है, तो राजस्व परिषद के वाद पोर्टल पर नीचे बताए गए प्रोसेस का पालन करना होगा.
- आधिकारिक वेबसाइट vaad.up.nic.in या राजस्व परिषद के वरासत पोर्टल पर जाएं.
- उत्तराधिकार या वरासत ऑनलाइन आवेदन विकल्प पर क्लिक करें. अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें और प्राप्त ओटीपी से लॉगिन करें.
- अपना नाम, पिता व पति का नाम, मोबाइल नंबर, पूरा पता, जनपद और तहसील का चयन करके डेटा सेव करें.
- मृतक भूस्वामी का नाम, मृत्यु की तारीख, संपत्ति प्राप्ति का स्रोत और पता दर्ज करें.
- जमीन का जनपद, तहसील, गांव और गाटा संख्या या खतौनी खाता संख्या भरें.
- सभी कानूनी उत्तराधिकारियों व वारिसों का नाम, उम्र, मृतक से संबंध और पता सही-सही भरें.
- जानकारी की जांच के बाद सबमिट करें. स्क्रीन पर मिले कंप्यूटरीकृत आवेदन संख्या को सुरक्षित नोट कर लें.
- आवेदन पत्र की कॉपी और जरूरी दस्तावेजों को संबंधित क्षेत्र के लेखपाल या तहसील कार्यालय में जमा करें. सत्यापन के बाद 5 से 15 दिनों के भीतर ऑनलाइन खतौनी में वारिसों का नाम दर्ज हो जाता है.
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