Parents Rights: तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने हाल ही में घोषणा की है कि राज्य सरकार बजट सत्र में ऐसा विधेयक लाने जा रही है, जिसके तहत उन सरकारी कर्मचारियों के वेतन में 10–15% की कटौती की जाएगी, जो अपने बुजुर्ग माता‑पिता की देखभाल नहीं करते. यह फैसला इसलिए अहम है क्योंकि आज के समय में कई माता‑पिता अपने ही बच्चों द्वारा उपेक्षा का सामना कर रहे हैं. ऐसे में यह सवाल और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि आखिर ऐसी स्थिति में माता‑पिता के पास क्या कानूनी अधिकार होते हैं, जिनके आधार पर वे अपने बच्चों के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं या अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं. इसी मुद्दे पर NDTV से खास बातचीत में दिल्ली हाई कोर्ट के एडवोकेट दीपक ठुकराल ने बताया कि माता‑पिता किन कानूनों के तहत अपने हक की मांग कर सकते हैं और बच्चों के खिलाफ किस तरह की कानूनी कार्रवाई संभव है. आइए जानते हैं...
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CrPC Section 125
एडवोकेट दीपक बताते हैं, कि यह धारा स्पष्ट करती है कि यदि किसी व्यक्ति के पास पर्याप्त साधन हैं और वह अपने माता-पिता के भरण-पोषण (मेंटेनेंस) से इनकार करता है जो खुद अपना ख्याल रखने में असमर्थ हैं, तो अदालत हस्तक्षेप कर सकती है. ऐसे में माता-पिता कोर्ट में गुहार लगा सकते हैं कि उनके बच्चे (बेटा या बेटी) उन्हें महीने भर का भत्ता या पैसा दें. इसके लिए माता-पिता को यह साबित करना होता है कि बच्चे कमा रहे हैं लेकिन जानबूझकर उपेक्षा कर रहे हैं, और माता-पिता के पास आय का कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं है. ऐसे में मजिस्ट्रेट मामले की सुनवाई के बाद बच्चों को एक निश्चित राशि (Maintenance) हर महीने देने का आदेश दे सकते हैं. इसके अलावा एडवोकेट दीपक बताते हैं, कि माता-पिता पहले इसी धारा के तहत ही कोर्ट में अपना केस फाइल करते थे और अब Section 125 CrPC हट गया है.
BNSS Section 144
एडवोकेट दीपक बताते हैं कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), अब CrPC की जगह ले चुकी है. उसमें धारा 144 (Section 144 of BNSS) वही प्रावधान है जो पहले CrPC की धारा 125 हुआ करती थी. नए कानून के तहत अब बुजुर्ग माता-पिता अपने भरण-पोषण (Maintenance) के लिए इसी धारा का सहारा लेंगे.
Senior Citizen Act 2007
एडवोकेट दीपक के अनुसार माता-पिता की सुरक्षा और भरण-पोषण के लिए सबसे सशक्त कानून 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007' (Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007) है. यह कानून माता‑पिता को अपने बच्चों से भरण‑पोषण, देखभाल और सम्मानपूर्ण जीवन की मांग करने का कानूनी अधिकार देता है. उन्होंने बताया कि इस अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई और फैसला देने की जिम्मेदारी जिले के SDM (उप जिला मजिस्ट्रेट) और ADM (अपर जिला मजिस्ट्रेट) के पास होती है. इस कानून के तहत यदि बच्चे माता‑पिता की देखभाल नहीं करते, तो माता‑पिता सीधे SDM/ADM के पास जाकर भरण‑पोषण की मांग कर सकते हैं. साथ ही बच्चों को माता‑पिता के लिए हर महीने भरण‑पोषण राशि देना पड़ सकता है.
इसके अलावा, अगर माता‑पिता ने अपनी किसी संपत्ति, जमीन, घर या आवश्यक दस्तावेज बच्चों के नाम कर दिए हों और इसके बाद बच्चे उनके साथ खराब व्यवहार, उपेक्षा या दुर्व्यवहार करते हैं, तो माता‑पिता के पास पूरा अधिकार है कि वे वह संपत्ति या डॉक्यूमेंट वापस ले सकते हैं. इस कानून के अनुसार, अगर बच्चे माता‑पिता का सम्मान और देखभाल नहीं करते, तो माता‑पिता उस गिफ्ट डीड या संपत्ति ट्रांसफर को रद्द (Cancel) करवाने का हक रखते हैं. साथ ही पैरेंट्स बच्चों से अपनी प्रोपर्टी में रहने का अधिकार वापिस ले सकते हैं और अपनी संपत्ति या घर को खाली करवा सकते हैं.
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