बीमा नियामक आईआरडीएआई (IRDAI) ने बीमा कंपनियों के डिस्ट्रीब्यूशन और अन्य प्रबंधन खर्चों को कम करने के लिए पांच साल का एक नया रोडमैप प्रस्तावित किया है. इस कदम से वित्तीय सेवा क्षेत्र में हलचल मच गई है, क्योंकि नियामक का उद्देश्य अत्यधिक वितरक (distributor) भुगतानों पर अंकुश लगाना और पॉलिसीधारकों के लिए लागत को कम करना है. इसका असर कई बीमा कंपनियों पर पड़ सकती है.
क्या है IRDAI का प्रमुख प्रस्ताव और बदलाव
प्रबंधन खर्च की सख्त सीमा (Tighter EoM Limits)
- जीवन बीमा कंपनियों (Life Insurers) के लिए प्रबंधन खर्च (EoM) की सीमा को अगले दो वर्षों में घटाकर 15% और पांच वर्षों के भीतर 12.5% करने का प्रस्ताव है.
- सामान्य बीमा कंपनियों (General Insurers) के लिए इस सीमा को सकल प्रत्यक्ष प्रीमियम आय (GDPI) के आधार पर दो साल में 25% और पांच साल में घटाकर 20% करने का प्रस्ताव है.
कमीशन में भारी कटौती
- शुद्ध-अवधि (Pure-term) जीवन बीमा के पहले वर्ष के कमीशन को ओपन डिस्ट्रीब्यूशन संस्थाओं (बैंक, ब्रोकर, एग्रीगेटर) के लिए 25% और एजेंटों के लिए 30% तक सीमित करने का प्रस्ताव किया गया है.
- स्वास्थ्य और मोटर बीमा के कमीशन में भी भारी कटौती की बात कही गई है.
ब्रोकरेज की राय और बाजार पर असर
जेफरीज (Jefferies), मैकऑरी (Macquarie), बर्नस्टीन (Bernstein) और एचएसबीसी (HSBC) जैसे वैश्विक ब्रोकरेज हाउसों का मानना है कि इन प्रस्तावों से डिस्ट्रीब्यूटर कंपनियों-विशेषकर पीबी फिनटेक (Policybazaar) को निकट भविष्य में बड़ा झटका लग सकता है.
इसके विपरीत, एसबीआई लाइफ (SBI Life) और एलआईसी (LIC) जैसी कंपनियों को इस बदलाव में सुरक्षित माना जा रहा है, क्योंकि इनका मौजूदा खर्च अनुपात (EoM ratio) पहले से ही प्रस्तावित 10-12.5% के दायरे के करीब या उससे नीचे है.
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