विज्ञापन

HRA Rule Update: एचआरए नियम में हुए बदलाव, HRA क्लेम करने से पहले जान लें ये नए रूल

HRA Rule Update: इनकम टैक्स नियम 2026 के ड्राफ्ट के अनुसार, जो इनकम टैक्स एक्ट 2025 को लागू करने के लिए बनाए जा रहे हैं. अब कर्मचारियों को जिस मकान में वे किराए पर रह रहे हैं, उसके मालिक से अपना रिश्ता भी बताना होगा.

HRA Rule Update: एचआरए नियम में हुए बदलाव, HRA क्लेम करने से पहले जान लें ये नए रूल
HRA नियमों में बदलाव
file photo

HRA Rule Update: कई नौकरी करने वाले लोग अपने माता-पिता, रिश्तेदारों या पति/पत्नी को किराया देते हैं और पुराने टैक्स सिस्टम में HRA यानी हाउस रेंट अलाउंस का दावा करते हैं, लेकिन इनकम टैक्स नियम 2026 के ड्राफ्ट में ऐसे मामलों पर अब ज्यादा ध्यान दिया जा सकता है. अगर यह प्रस्ताव लागू हो गया, तो जो लोग रिश्तेदारों को किराया देकर HRA लेते हैं, उन्हें यह भी बताना होगा कि मकान मालिक उनसे किस रिश्ते में है. दरअसल, सरकार सैलरी पाने वाले लोगों के लिए HRA यानी हाउस रेंट अलाउंस से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव कर रही है.

यह भी पढ़ें:- Indian e-Passport Update: चिप वाला ई-पासपोर्ट बनवाएं? एयरपोर्ट पर नहीं लगानी पड़ेगी लंबी लाइनें, अभी अप्लाई करें

HRA नियमों में बड़ा बदलाव

इनकम टैक्स नियम 2026 के ड्राफ्ट के अनुसार, जो इनकम टैक्स एक्ट 2025 को लागू करने के लिए बनाए जा रहे हैं. अब कर्मचारियों को जिस मकान में वे किराए पर रह रहे हैं, उसके मालिक से अपना रिश्ता भी बताना होगा. यह नया नियम अप्रैल 2026 से लागू हो सकता है. पहले कर्मचारियों को सिर्फ किराए की रसीद और अगर सालाना किराया तय सीमा से ज्यादा है, तो मकान मालिक का PAN देना होता था, लेकिन अब HRA फॉर्म में ‘रिश्ता क्या है?' यह जानकारी भी भरनी पड़ेगी.

पहली नजर में यह बदलाव छोटा लग सकता है, लेकिन टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर खासकर उन लोगों पर पड़ेगा, जो माता-पिता, ससुराल वालों या अन्य रिश्तेदारों को किराया देकर HRA का दावा करते हैं. अब तक अगर किराए का एग्रीमेंट होता, बैंक के जरिये किराया भुगतान किया जाता और मकान मालिक अपनी इनकम टैक्स रिटर्न में यह किराया दिखाता, तो HRA क्लेम आमतौर पर मान लिया जाता था, लेकिन अब HRA फॉर्म में ‘रिश्ता' लिखने से टैक्स विभाग के लिए ऐसे मामलों को डेटा एनालिटिक्स के जरिये जल्दी ट्रैक करना आसान हो जाएगा.

नए नियम के फायदे

ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, अब टैक्स विभाग आसानी से जांच कर सकेगा कि जिसने किराया दिया है, क्या उसने यह जानकारी अपनी ITR और AIS में दिखाई है? क्या मकान सच में उसी व्यक्ति (लैंडलॉर्ड) के नाम पर है, जिसे किराया दिया जा रहा है? क्या किराया बैंक से ही दिया गया है या नकद? इसका मतलब है कि पहले जो चीजें बड़े स्तर पर पकड़ना मुश्किल था, अब तकनीक की मदद से बहुत आसानी से पकड़ा जा सकता है. यह कदम फर्जी या सिर्फ कागज पर बने किराए के समझौतों को रोकने के लिए उठाया गया है.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com