- असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक तनाव के बीच सहयोगात्मक बातचीत भी देखने को मिली
- बीजेपी अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने कांग्रेस नेतृत्व पर कड़ी आलोचना करते हुए पार्टी के दरवाजे बंद होने का दावा किया
- कांग्रेस सांसद नासिर हुसैन ने बीजेपी पर नेताओं को डराकर और घूस देकर पार्टी में शामिल कराने का आरोप लगाया
असम विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में सियासी पारा काफी बढ़ गया है. लेकिन इस बीच कांग्रेस और बीजेपी नेता के बीच अलग नजारा देखने को मिला. NDTV पर एक बातचीत के दौरान असम बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप सैकिया और कांग्रेस सांसद नासिर हुसैन के बीच ऐसी 'फ्रेंडली फाइट' देखने को मिली, जिसने चुनावी दंगल की कड़वाहट को कैमरे के सामने ला दिया. बहस का केंद्र बने कांग्रेस के कद्दावर नेता प्रद्युत बोरदोलोई, जिनके पाला बदलने की अटकलों ने असम से लेकर दिल्ली तक हलचल मचा दी है.
'कांग्रेस के कई बड़े चेहरे होंगे बीजेपी में शामिल'
बीजेपी अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने सीधे तौर पर कांग्रेस के नेतृत्व को आड़े हाथों लिया. उन्होंने दावा किया कि अब कांग्रेस में उन लोगों के लिए कोई जगह नहीं बची है जो स्वाभिमानी हैं या असम के हित में सोचते हैं. सैकिया ने तंज कसते हुए कहा, 'असम की जनता ने राहुल गांधी और गौरव गोगोई को पूरी तरह नकार दिया है. आज गौरव गोगोई की हालत देखकर सचमुच दया आती है.' उन्होंने यह भी ऐलान कर दिया कि कांग्रेस के कई बड़े चेहरे जल्द ही बीजेपी का दामन थामेंगे और बीजेपी के उम्मीदवारों की लिस्ट कल सुबह तक सामने आ जाएगी.
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कांग्रेस का तीखा पलटवार
बीजेपी के इन हमलों का जवाब देते हुए कांग्रेस सांसद नासिर हुसैन ने आक्रामक रुख अपनाया. उन्होंने बीजेपी को 'नेताओं की चोर' करार देते हुए कहा कि सत्ताधारी दल के पास अपने खुद के जमीन से जुड़े कार्यकर्ता और नेता नहीं बचे हैं. हुसैन ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, 'बीजेपी अपनी पार्टी को मजबूत करने के लिए कांग्रेस से नेता चुरा रही है. ये नेताओं को डराकर, धमकाकर और घूस देकर जबरन अपनी तरफ खींच रहे हैं.'
बता दें कि कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने हाल ही में बीजेपी का दामन थाम लिया है. 1975 से कांग्रेस से जुड़े रहे और तरुण गोगोई सरकार में कद्दावर मंत्री रहे बोरदोलोई ने घुटन और अपमान का हवाला देते हुए पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया. उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलों ने असम कांग्रेस के भीतर मचे घमासान को सड़क पर ला दिया है, जहां गौरव गोगोई के नेतृत्व पर सवाल उठ रहे हैं और भाजपा इसे अपनी विकसित असम की रणनीति की बड़ी जीत मान रही है.
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