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प्रद्युत बोरदोलोई के जाने से असम कांग्रेस में एक अहम पुल टूट गया

बोरदोलोई का जाना उत्तरी असम में कांग्रेस को कमजोर करेगी क्योंकि बोरदोलोई सभी गुटों के बीच एक सेतु का काम करते थे.इससे हाशिए पर बैठे कांग्रेस नेताओं पर दबाव बढ़ेगा कि वो कांग्रेस में रहें या नहीं.

प्रद्युत बोरदोलोई के जाने से असम कांग्रेस में एक अहम पुल टूट गया
प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफा का कांग्रेस पर पड़ेगा असर
NDTV
  • असम के वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया है
  • बोरदोलोई ने पार्टी में अपमान और असम कांग्रेस के भीतर संपर्क करने वालों से दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है
  • उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत चुनाव में उन पर हमला कराया गया और कांग्रेस ने आरोपी को फिर टिकट दिया
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नई दिल्ली:

असम से कांग्रेस के सांसद और वरिष्ठ नेता प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है और BJP में शामिल हो गए हैं. बोरदोलोई से पहले भी कांग्रेस के एक और नेता भूपेन वोरा कांग्रेस छोड़ चुके हैं. कहने का मतलब है कि असम कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है.बोरदोलोई पुराने कांग्रेसी थे.1978 में असम में एनएसयूआई के अध्यक्ष रहे फिर 1998 से 2016 तक चार बार विधायक रहे और 2019 और 2024 में लोकसभा का चुनाव जीते मगर अब कांग्रेस छोड़ रहे है कह रहे हैं कि पार्टी में मेरा अपमान हो रहा है.

आज मैंने अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों में से एक को छोड़ दिया है और इसके लिए मैं खुश नहीं हूं. लेकिन मैंने यह निर्णय इसलिए लिया क्योंकि कांग्रेस पार्टी, विशेष रूप से असम कांग्रेस के भीतर, मुझसे संपर्क करने वाले लोग मुझे बार-बार अपमानित कर रहे थे.एनडीटीवी से बातचीत में प्रद्युत बोरदोलोई ने कहा कि जिसका नाम आसिफ नजर है ने उनके ऊपर पिछले पंचायत चुनाव में हमला करवाया जिसकी शिकायत उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष से की मगर कुछ नहीं हुआ और कांग्रेस उसे फिर से टिकट देने जा रही है.बोरदोलोई का आरोप है कि स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्य इमरान मसूद उन्हें शह दे रहे हैं इसलिए उनके पास कांग्रेस से इस्तीफा देने के अलावा कोई चारा नहीं है.

भूपेन वोरा और प्रद्युत बोरदोलोई का कांग्रेस से जाना उनका निजी मामला नहीं है ये कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ असंतोष को तो दर्शाता ही है साथ ही असम कांग्रेस में नेतृत्व की कमी को भी रेखांकित करता है.गौरव गोगोई जो प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपने आप को स्थापित करने में जुटे हैं मगर लगातार नेताओं का लगातार जाना उनकी कमजोरी को ही दिखाता है.

असम में कांग्रेस पार्टी पर इसका बहुत बुरा प्रभाव देखने को मिलेगा.इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरेगा,आपसी गुटबाजी बढ़ेगी खासकर परिवार से आए नेताओं और अपने दम पर बने नेताओं के बीच क्योंकि अब सबको लगने लगेगा कि नेतृत्व कमजोर है.बोरदोलोई का जाना उत्तरी असम में कांग्रेस को कमजोर करेगी क्योंकि बोरदोलोई सभी गुटों के बीच एक सेतु का काम करते थे.इससे हाशिए पर बैठे कांग्रेस नेताओं पर दबाव बढ़ेगा कि वो कांग्रेस में रहें या नहीं.यदि जल्दी ही कांग्रेस आलाकमान और प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई और प्रभारी जितेंद्र सिंह अपना रवैया और काम करेना का तरीका नहीं बदलते हैं तो असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा कांग्रेस में इसी तरह सेंध लगा कर कमजोर करते रहेंगे. 

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