विज्ञापन

EPFO New Rule 2026: 15,000 से बढ़कर 25,000 रुपये हो सकती है PF सैलरी लिमिट, जानिए इन-हैंड सैलरी पर क्या होगा असर और जरूरी बातें

EPFO wage ceiling hike 2026: सरकार एम्पलाइज प्रोविडेंट फंड (EPF) में योगदान की सैलरी लिमिट बढ़ा सकती है. अभी यह लिमिट 15,000 रुपये प्रति महीने है, जिसे बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति महीने किया जा सकता है. अगर ऐसा होता है, तो ज्यादा कर्मचारी EPF के दायरे में आएंगे और उन्हें सोशल सिक्योरिटी का लाभ मिलेगा.

EPFO New Rule 2026: 15,000 से बढ़कर 25,000 रुपये हो सकती है PF सैलरी लिमिट, जानिए इन-हैंड सैलरी पर क्या होगा असर और जरूरी बातें
EPFO New Rule 2026: 25,000 रुपये हो सकती है PF सैलरी लिमिट

EPFO New Rule 2026: नौकरीपेशा लोगों के लिए एक बड़ी खबर आई है, कि सरकार एम्पलाइज प्रोविडेंट फंड (EPF) में योगदान की सैलरी लिमिट बढ़ा सकती है. अभी यह लिमिट 15,000 रुपये प्रति महीने है, जिसे बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति महीने किया जा सकता है. अगर ऐसा होता है, तो ज्यादा कर्मचारी EPF के दायरे में आएंगे और उन्हें सोशल सिक्योरिटी का लाभ मिलेगा. अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो इसे अगले महीने होने वाली EPFO (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) की सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की बैठक में रखा जा सकता है. द इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह नियम 1 अप्रैल से लागू हो सकता है.

यह भी पढ़ें: ATM PIN भूल गए हैं? बैंक जाने का नहीं है समय तो बस यह इस ट्रिक से म‍िनटों में करें नया प‍िन जनरेट

ज्यादा लोगों को मिलेगी सोशल सिक्योरिटी

फिलहाल EPF की सुविधा सिर्फ उन नौकरीपेशा लोगों के लिए है, जिनकी महीने की सैलरी 15,000 रुपये तक है, क्योंकि यह वेतन सीमा पिछले 12 सालों यानी 2014 से नहीं बदली गई, इसलिए पिछले कुछ सालों में जिन कम‑कुशल और मध्यम‑कुशल कर्मचारियों की सैलरी बढ़ी, वे अब EPF के दायरे से बाहर हो गए हैं. ऐसे में, अगर यह सीमा बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति महीने कर दी जाती है, तो काफी बड़ी संख्या में कर्मचारियों के लिए EPF में योगदान करना अनिवार्य हो जाएगा, जिससे ज्यादा लोगों को सोशल सिक्योरिटी का लाभ मिलेगा.

इन-हैंड सैलरी पर क्या होगा असर?

अगर सैलरी लिमिट बढ़ाई जाती है, तो 15,000 से 25,000 रुपये कमाने वाले कर्मचारियों की मासिक सैलरी में ज्यादा पैसा EPF में कटेगा, क्योंकि EPF का योगदान वेतन के एक तय प्रतिशत के हिसाब से होता है. इससे इन-हैंड सैलरी थोड़ी कम हो जाएगी, लेकिन रिटायरमेंट के लिए लॉन्ग टर्म रिटायरमेंट सेविंग्स बढ़ेगी, जो भविष्य में फायदेमंद होगी.

कंपनियों पर क्या होगा प्रभाव?

अगर सैलरी लिमिट बढ़ाई जाती है, तो कंपनियों पर भी ज्यादा खर्च का बोझ पड़ेगा, क्योंकि उन्हें कर्मचारी के EPF योगदान के बराबर अमाउंट खुद भी जमा करना होता है. इससे कंपनियों के सैलरी से जुड़े खर्च बढ़ सकते हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां वर्कफॉर्स की संख्या ज्यादा होती है.

अब क्यों हो रहा है बदलाव?

द इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार यह प्रस्ताव इसलिए तेजी से आगे बढ़ाया गया है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने चार महीने के अंदर वेतन सीमा में संशोधन करने का निर्देश दिया था. SC के मुताबिक वेतन बढ़ने और महंगाई बढ़ने की वजह से बड़ी संख्या में कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा के दायरे से बाहर हो गए हैं, इसलिए यह बदलाव जरूरी है.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com