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डार्क मोड, ईरानी तट के किनारे सफर...होर्मुज के खतरों के बीच से जहाज को कैसे भारत ले आया कप्तान

मुंबई के पोर्ट पर एक जहाज आज भारी मात्रा में तेल लेकर पहुंचा. 'Shenlong' ने युद्धग्रस्त स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरते हुए AIS बंद कर 'डार्क मोड' में यात्रा की और सऊदी अरब से 1.35 लाख टन कच्चा तेल लेकर सुरक्षित मुंबई पहुंचा. यह संघर्ष शुरू होने के बाद भारत पहुंचने वाला पहला जहाज है.

डार्क मोड, ईरानी तट के किनारे सफर...होर्मुज के खतरों के बीच से जहाज को कैसे भारत ले आया कप्तान
ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत का तेल टैंकर सुरक्षित मुंबई पहुंचा है. मौके से NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट.
  • ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत का तेल टैंकर सुरक्षित मुंबई पहुंचना महत्वपूर्ण सफलता है.
  • Shenlong जहाज ने युद्ध के दौरान AIS सिस्टम बंद कर रडार से अदृश्य होकर खतरनाक क्षेत्र पार किया.
  • जहाज पर 29 सदस्यों की टीम थी, जिसमें भारतीय कप्तान सुखशांत सिंह संधू के नेतृत्व में जोखिम भरा सफर पूरा हुआ.
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नई दिल्ली:

मिडिल ईस्ट में बढ़ती जंग, ईरान के लगातार हमलों और अमेरिकी‑इजरायली स्ट्राइक्स के बीच, दुनिया की सबसे खतरनाक मानी जाने वाली समुद्री पट्टी यानी स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज से भारत के लिए एक तेल टैंकर का सुरक्षित निकलना किसी चमत्कार से कम नहीं.

यह लाइबेरियन‑फ्लैग्ड सुएज़मैक्स टैंकर ‘Shenlong' है, जिसे एक भारतीय कैप्टन सुखशांत सिंह संधू चला रहे थे. जहाज ने बुधवार को सुरक्षित मुंबई पोर्ट पर दस्तक दी. युद्ध शुरू होने के बाद इस रास्ते से भारत पहुंचने वाला पहला जहाज है.

सबसे बड़ा सवाल: कैसे पार किया ‘मौत का दर्रा'?

28 फरवरी को अमेरिका‑इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे जोखिमभरा समुद्री मार्ग बन गया है. ईरान लगातार जहाजों को निशाना बना रहा है और ऊर्जा ढांचे पर हमले कर रहा है, जिससे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं. ऐसे माहौल में Shenlong का गुजरना आसान नहीं था.

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Going Dark: मौत के साए में अदृश्य होकर चलना

Shenlong ने 1 मार्च को सऊदी के रास तनुरा पोर्ट से कच्चा तेल लोड किया. Maritime tracking data के अनुसार, 8 मार्च को शेनलोंग का अंतिम सिग्नल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के भीतर देखा गया. इसके बाद उसका AIS (Automatic Identification System) बंद हो गया और जहाज रडार से गायब हो गया. यह कोई हादसा नहीं था, यह एक रणनीतिक कदम था.

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युद्ध के दौरान AIS बंद करके चलना यानी 'Going Dark' उन जहाजों का तरीका है जिससे वे ईरानी ड्रोन/मिसाइल या निगरानी से बच सकें.

अगले दिन जहाज फिर से ट्रैकिंग सिस्टम पर दिखाई दिया. इसका मतलब था कि उसने सबसे खतरनाक इलाका सफलतापूर्वक पार कर लिया.

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कप्तान और क्रू का साहस

Shenlong पर कुल 29 सदस्य थे. भारतीय, पाकिस्तानी और फिलीपीनो नागरिक. जहाज के कैप्टन सुखशांत सिंह संधू थे, जिनके नेतृत्व में यह जोखिमभरा सफर पूरा हुआ. यह जहाज 1,35,335 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर बुधवार दोपहर मुंबई पहुंचा और बाद में जवाहर दीप टर्मिनल पर लग गया.

भारत के लिए यह इतना बड़ा क्यों?

एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था यानी भारत का 50% से अधिक तेल और गैस आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आता है. युद्ध के कारण यह रूट लगभग बंद हो चुका था. शेनलोंग की सफलता से भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए उठी चिंताओं में थोड़ी राहत आई है.

भारत ने रास्ता क्यों पाया, बाकी देश क्यों नहीं?

जहां अमेरिका, यूरोप और इजरायल के जहाज लगातार ईरानी निशाने पर थे, वहीं भारत को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बढ़त मिली. विदेश मंत्री जयशंकर और ईरानी नेतृत्व के बीच हुई बातचीत के बाद, ईरान ने भारत‑झंडाधारी टैंकरों को सुरक्षित रास्ता देने के संकेत दिए थे.

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मिडिल ईस्ट के युद्ध में जहां जहाज डूब रहे हैं, हमले बढ़ रहे हैं और दुनिया की ऊर्जा सप्लाई खतरे में है. ऐसे में Shenlong का यह सफर बहादुरी, रणनीतिक कौशल और दृढ़ता का प्रतीक बनकर सामने आया है. यह सिर्फ एक तेल टैंकर का आने‑भर की खबर नहीं. यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री क्षमताओं का महत्वपूर्ण संकेत है.

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