UP New Circle Rate: उत्तर प्रदेश में घर, प्लॉट या कोई भी अचल संपत्ति (Real Estate) खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए झटका देने वाली बड़ी खबर सामने आई है. दरअसल, राज्य सरकार 15 अगस्त 2026 से उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में सर्किल दर (Circle Rate) निर्धारण और स्टांप शुल्क की गणना के लिए एक समान (Uniform System) प्रणाली लागू करने जा रही है.
दरअसल, उत्तर प्रदेश में आज यानी 1 अगस्त से ही पूरे प्रदेश में एक समान मानकीकृत नए सर्किल रेट लागू होने का निर्देश था, लेकिन यह हर जिले में एक साथ अनिवार्य रूप से लागू नहीं हो पाया है, क्योंकि कई जिलों में अभी संशोधन और ड्राफ्ट की प्रक्रिया चल रही है. सरकार की ओर से कहा गया है कि स्टाम्प और पंजीकरण विभाग के इस कदम का मुख्य उद्देश्य पूरे राज्य में संपत्ति मूल्यांकन में पारदर्शिता लाना, भ्रम की स्थिति को खत्म करना और रजिस्ट्री में होने वाली विसंगतियों को दूर करना है.
तीन श्रेणियों में बंटेंगी संपत्तियां
मौजूदा वक्त में उत्तर प्रदेश का हर जिला सर्किल रेट तय करने के लिए अपने अलग-अलग पैमाने का पालन करता है, जिससे दो पड़ोसी जिलों में भी दरों का बड़ा अंतर देखने को मिलता है. नए मानकीकृत ढांचे के तहत अब पूरे प्रदेश की संपत्तियों को मुख्य रूप से शहरी, अर्ध शहरी और ग्रामीण जैसी तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा. इसके मुताबिक हर श्रेणी में क्षेत्र के विकास स्तर, कनेक्टिविटी और महत्व के आधार पर ज्यादा से ज्यादा 25 अलग-अलग सर्किल रेट बनाए जाएंगे. इन वर्गीकरणों के तहत आवासीय , वाणिज्यिक, औद्योगिक और कृषि भूमि के लिए अलग-अलग मानक दरें तय की जाएगी.
इन लोकेशन पर स्थित प्लॉट्स का मूल्यांकन होगा ज्यादा
नए नियमों के अनुसार, प्रीमियम और प्रमुख स्थानों पर स्थित संपत्तियों के मूल्यांकन में निश्चित प्रतिशत आधारित बढ़ोतरी का प्रावधान किया जाएगा. अगर आपकी प्रॉपर्टी नीचे दर्ज स्थानों पर स्थित है, तो उसका आधिकारिक मूल्यांकन अधिक होना तय है.
- एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) के किनारे
- राज्य राजमार्गों (SH) और प्रमुख जिला सड़कों पर
- पार्क या पार्क फेसिंग/खुले स्थानों के सामने
- कॉर्नर प्लॉट्स (एक से अधिक पक्की सड़कों से जुड़े भूखंड)
उदाहरण के लिए अगर कोई प्लॉट एक से ज्यादा मुख्य सड़कों से जुड़ा है, तो उसका मूल्यांकन सबसे ऊंची सर्किल दर वाली सड़क के आधार पर अब तय होगा. इसके अलावा कुछ मामलों में मूल्यांकन में लगभग 15% की अतिरिक्त वृद्धि तक की जा सकती है. ऐसे में बड़े शहरों खासकर नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ जैसे शहरों में सर्किल रेट में सबसे ज्यादा इजाफा देखने को मिल सकता है.
31 जुलाई तक था आपत्तियों के निस्तारण का वक्त
पंजीकरण महानिरीक्षक के निर्देशों के मुताबिक, सभी जिलों के उप पंजीयकों ने नई मानकीकृत गाइडलाइन्स के आधार पर सर्किल रेट सूचियां तैयार कर सार्वजनिक करके जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे. 31 जुलाई तक सभी आपत्तियों की समीक्षा और समाधान जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में पूरा करने के बाद जिला मजिस्ट्रेटों से अंतिम अनुमोदन मिलने के बाद नया सर्किल रेट ढांचा 1 अगस्त 2026 से पूरे राज्य में आधिकारिक तौर पर लागू करना था. हालांकि, कुछ तकनीकी कारणों से इसे बढ़ाकर अब 15 अगस्त कर दिया गया है.
एक्सप्रेसवे, जेवर एयरपोर्ट, औद्योगिक गलियारों और बुनियादी ढांचे के तेजी से हो रहे विकास के बीच इस नए नियम का संपत्ति खरीदारों और रियल एस्टेट बाजार पर सीधा असर पड़ेगा. इससे संपत्ति मूल्यांकन के तरीके पारदर्शी होंगे और खरीदारों को रजिस्ट्री खर्च का पहले से सटीक अनुमान रहेगा. जिन इलाकों में बुनियादी विकास हुआ है, वहां सर्किल रेट बढ़ने से स्टांप ड्यूटी और कुल पंजीकरण शुल्क में बढ़ोतरी होगी. संपत्ति का आधिकारिक सरकारी मूल्यांकन अधिक होने से संपत्ति बेचने वालों को बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी.
यह भी पढ़ें- मानेसर से जयपुर का सफर हुआ और आसान: NH48 पर शुरू हुआ बैरियरफ्री टोल सिस्टम, मिलेंगे ये 5 बड़े फायदे
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं