- AI सबके लिए: किसान, छात्र, दुकानदार और गृहिणी कैसे उठा सकते हैं फायदा?
- एक सवाल बदल सकता है पूरा जवाब, AI इस्तेमाल करने का सबसे आसान फॉर्मूला
- ChatGPT और AI से बेहतर जवाब कैसे पाएं? जानिए सही सवाल पूछने का तरीका
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से आम लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन रहा है, लेकिन AI से बेहतर नतीजे पाने का सबसे बड़ा राज सही सवाल पूछने में छिपा है. आज AI के दौर में सफलता इस बात पर कम और सवाल पूछने के तरीके पर ज्यादा निर्भर है. इस पर बात करने से पहले थोड़ा सा पीछे चलते हैं. अगस्त 2012. हज़ारीबाग कलेक्ट्रेट का सभागार दूर-दराज़ के गांवों से आए फ़रियादियों से भरा था. छत का पुराना पंखा चरमराता हुआ घूम रहा था. बाहर बारिश हो रही थी और अंदर जनसंवाद में अपनी समस्याएं लेकर आए लोगों की लंबी क़तार लगी थी. क़तार में एक बुज़ुर्ग खड़े थे. हाथ में प्लास्टिक की एक थैली, जिसमें बरसों के काग़ज़ ठुंसे थे. बारी आई तो बस इतना बोले, 'हुज़ूर, हमरा काम नहीं हो रहा.' मैंने पूछा, कौन-सा काम? किस दफ़्तर में? कब से? एक-एक बात समझने में दस मिनट से ज़्यादा लग गए. उनके ठीक पीछे एक युवा महिला खड़ी थीं. हाथ में तह किया हुआ एक काग़ज़. उन्होंने कहा, 'सर, पति के निधन के बाद मार्च में पारिवारिक लाभ योजना के लिए आवेदन दिया था. आवेदन संख्या यह है. फ़ाइल प्रखंड से ज़िले में आ चुकी है, लेकिन तीन महीने से कल्याण विभाग में अटकी है.' उस महिला का मामला उसी दिन आगे बढ़ गया. बुज़ुर्ग को दोबारा आना पड़ा. फ़र्क़ ईमानदारी का नहीं था, न ज़रूरत का. महिला ने अपनी समस्या साफ़ बताई और ज़रूरी काग़ज़ साथ लाईं. बुज़ुर्ग के पास न पूरे दस्तावेज़ थे, न वे अपनी परेशानी ठीक से समझा पाए. शायद किसी ने उन्हें यह सिखाया ही नहीं था कि अपनी बात कैसे रखें. आज आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है.
एक सवाल, दो जवाब
रांची में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं से अक्सर मुलाक़ात होती है. मान लीजिए, दो दोस्त JSSC की परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. पहला ChatGPT से पूछता है, 'सरकारी नौकरी की तैयारी कैसे करें?' जवाब आता है, मेहनत कीजिए, टाइम-टेबल बनाइए, अख़बार पढ़िए, नियमित अभ्यास कीजिए. वह सोचता है, यह तो मुझे पहले से पता था! दूसरा लिखता है, 'तुम एक अनुभवी परीक्षा कोच हो. मेरी उम्र 24 साल है. मैं बीए पास हूं और झारखंड में रहता हूं. मुझे JSSC की परीक्षा देनी है. रोज़ चार घंटे पढ़ सकता हूं. गणित कमज़ोर है. अगले तीन महीनों का हफ़्ते-दर-हफ़्ते अध्ययन कार्यक्रम बनाओ, सरल हिंदी में.'
औज़ार एक ही था. फ़र्क़ सिर्फ़ उसे चलाने के तरीक़े में था.
हार्वर्ड और बोस्टन बड़ा प्रयोग क्या बताता है?
2023 में हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल और बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप से जुड़े शोधकर्ताओं ने 758 कंसल्टेंट्स पर एक प्रयोग किया. जिन कामों में AI सक्षम था, वहां उसका इस्तेमाल करने वालों ने लगभग 12 प्रतिशत ज़्यादा काम पूरा किया, लगभग 25 प्रतिशत तेज़ी से काम किया और उनके काम की गुणवत्ता 40 प्रतिशत से भी अधिक बेहतर रही. लेकिन कहानी का दूसरा पहलू भी है. जिन कामों में AI की क्षमता सीमित थी, वहां उस पर आंख मूंदकर भरोसा करने वाले लोग बिना AI के काम करने वालों से भी ज़्यादा ग़लत साबित हुए. शोधकर्ताओं ने इसे AI की “टेढ़ी-मेढ़ी सरहद” कहा. कहीं वह कमाल करता है, कहीं ठोकर खाता है. समझदारी सिर्फ़ AI इस्तेमाल करने में नहीं, बल्कि यह पहचानने में भी है कि उससे कौन-सा काम लेना चाहिए और कहां उसके जवाब को परखना ज़रूरी है.
गांव से स्कूल तक, बदलती तस्वीर
2023 में हरियाणा के नूंह ज़िले के बिवां गांव में एक दिलचस्प प्रयोग हुआ. IIT मद्रास के AI4Bharat और माइक्रोसॉफ़्ट सहित कई साझेदारों की पहल “जुगलबंदी” के ज़रिए गांव के लोग WhatsApp पर अपनी भाषा में सरकारी योजनाओं की जानकारी लेने लगे. इसी गांव की 18 वर्षीय छात्रा वंदना ने हिंदी में पूछा कि उसके लिए कौन-कौन सी छात्रवृत्तियां उपलब्ध हैं. उसने अपने विषय भी बताए, राजनीति शास्त्र, हिंदी और इतिहास. जवाब में योजनाओं की जानकारी मिली. आगे पूछने पर पात्रता की शर्तें और ज़रूरी दस्तावेज़ भी बताए गए. गांव के किसान भी सरकारी सहायता योजनाओं की जानकारी लेने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे थे. जिस जानकारी के लिए कभी कई दफ़्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे, उस तक पहुंचने का एक नया रास्ता खुल रहा था.
क्योंकि मशीन चलाना सीखना एक बात है, और उससे अपने काम की बात निकलवाना दूसरी.
अच्छे सवाल की चार अहम बातें
हज़ारीबाग के उस जनसंवाद में महिला ने अपनी बात कुछ इस तरह रखी थी कि समस्या, संदर्भ और ज़रूरत सब स्पष्ट थे. AI से अच्छा जवाब पाने के लिए भी चार बातें याद रखिए.
- पहली, भूमिका: AI से कहिए कि वह किस भूमिका में मदद करे. शिक्षक, परीक्षा कोच, कृषि सलाहकार या किसी विषय के जानकार सहायक की तरह.
- दूसरी, काम: आपको ठीक-ठीक क्या चाहिए? पढ़ाई की योजना, आवेदन का मसौदा, किसी विषय की सरल व्याख्या या कारोबार बढ़ाने के सुझाव?
- तीसरी, संदर्भ: अपनी परिस्थितियां बताइए. उम्र, स्थान, बजट, उपलब्ध समय और ज़रूरत. जवाब जितना आपके हालात के अनुरूप होगा, उतना उपयोगी बन सकता है.
- चौथी, प्रारूप: जवाब किस रूप में चाहिए? पांच बिंदुओं में, एक तालिका में, सरल हिंदी में या सिर्फ़ सौ शब्दों में?
और एक छोटी-सी तरकीब, जो बहुत काम आ सकती है. अपने सवाल के आख़िर में लिखिए, 'जवाब देने से पहले मुझसे वे पांच सवाल पूछो, जिनसे तुम मेरी ज़रूरत बेहतर समझ सको.'
AI आपसे और जानकारी मांगेगा. ठीक वैसे ही, जैसे जनसंवाद में एक अच्छा अधिकारी किसी फ़रियादी की समस्या को समझने के लिए सवाल पूछता है. और हां, पहले जवाब पर रुकिए मत. कहिए, 'इसे और सरल बनाओ.' 'मेरे बजट के हिसाब से बदलो.' 'किसी दसवीं पास विद्यार्थी को समझाने लायक लिखो.' बातचीत आगे बढ़ाइए. पहला जवाब अक्सर सिर्फ़ मसौदा होता है, आख़िरी नहीं.
एक ज़रूरी सावधानी
AI कभी-कभी पूरे आत्मविश्वास से ग़लत जानकारी भी दे सकता है. दवा, क़ानून, पैसे या सरकारी नियमों से जुड़ी बात हो, तो जवाब को संबंधित विशेषज्ञ या आधिकारिक स्रोत से ज़रूर मिलाइए. अपनी निजी या संवेदनशील जानकारी भी बिना ज़रूरत साझा न करें.
सलाह AI की हो सकती है, ज़िम्मेदारी आपकी ही रहेगी.
आज ही इसे ऐसे आज़माइए
- चार ईंटें जोड़िए: भूमिका, काम, संदर्भ और प्रारूप.
- पहले AI को पूछने दीजिए: 'मुझसे पांच सवाल पूछो, ताकि तुम मेरी ज़रूरत समझ सको.'
- अपनी भाषा में बोलिए: माइक का बटन दबाकर हिंदी या अपनी सहज भाषा में सवाल पूछिए. टाइप करना हमेशा ज़रूरी नहीं.
- बातचीत जारी रखिए: पहला जवाब पसंद न आए, तो उसे बेहतर बनाने के लिए दोबारा कहिए.
साफ और स्पष्ट सवाल से समस्या होगी हल
हज़ारीबाग के उस बुज़ुर्ग का चेहरा आज भी याद आता है. उनकी ज़रूरत सच्ची थी. परेशानी भी वास्तविक थी. बस किसी ने उन्हें यह नहीं सिखाया था कि अपनी बात कैसे कहें और कौन-से काग़ज़ साथ रखें. AI के साथ भी यही चुनौती है.
इस दरवाज़े की चाबी कोई डिग्री नहीं है. चाबी है, एक साफ़ सवाल. आज ही अपनी किसी असली परेशानी को इन चार ईंटों में ढालिए और AI से पूछिए. फ़र्क़ ख़ुद दिख जाएगा.
डॉ. मनीष रंजन, लेखक भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस पर आठ पुस्तकों के लेखक हैं. वे यूनिवर्सिटी ऑफ़ ऑक्सफ़ोर्ड और यूसी बर्कले के पूर्व छात्र हैं तथा प्रधानमंत्री पुरस्कार और राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार से सम्मानित हैं. उन्हें 2025 में भारत के 'शीर्ष 25 चेंजमेकर्स' में चुना गया. लेख में व्यक्त विचार निजी हैं.
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