Viral News: मुंह के कैंसर (Oral Cancer) ने 70 वर्षीय एक बुजुर्ग की बोलने की वह क्षमता छीन ली. इसके बाद हर जगह चाहे डॉक्टर हों, बैंक हो या अन्य लोग हों, सबके सामने बुजुर्ग की पत्नी ही आवाज बनती है. उसने एक्स पर पीएम मोदी, अश्निनी वैष्णव और @SarvamAI को टैग करते हुए लिखा कि वे बातचीत के लिए टेक्स्ट-टू-स्पीच AI टूल्स का सहारा लेते हैं. इस दौरान 70 वर्षीय ओरल कैंसर सर्वाइवर ने दिव्यांगजनों के लिए किफायती और अनलिमिटेड इस्तेमाल वाला मासिक सब्सक्रिप्शन लाने की मांग की, जिस पर Sarvam AI के CEO प्रत्युष कुमार ने उन्हें अपने AI मॉडल का लाइफटाइम एक्सेस मुफ्त देने का ऐलान कर दिया.
2015 में कैंसर से जीती जंग
दरअसल, एक्स पर 70 वर्षीय रघुनाथ एएस ने 05 नवंबर को एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने बताया कि 2015 से ओरल कैंसर (मुंह के कैंसर) को मात देकर जीवित हूं. कैंसर के कारण उनकी आवाज चली गई. अब उनकी पत्नी ही सहारा है, जो डॉक्टरों, बैंकों और अन्य लोगों के सामने उनकी आवाज हैं. रघुनाथ एक्स में लिखा कि मैंने कई साल लिखकर अपनी बात समझाने की कोशिश में बिताए हैं, लेकिन अक्सर लोग उन नोट्स को पढ़ते ही नहीं या उनका कोई जवाब नहीं देते.
टेक्स्ट-टू-स्पीच तकनीक नहीं, खोई हुई आवाज जैसी
उन्होंने बताया कि कैंसर अस्पताल में उनके जैसे कई लोग अपनी तकलीफ बताने के लिए संघर्ष करते हैं. रघुनाथ कहा कि हमारा दर्द हमारा अपना है, लेकिन हमारी आवाज़ अब किसी और की हो गई है. भारत में लगभग 19.9 लाख (1.99 मिलियन) लोग ऐसे हैं जिन्हें बोलने में अक्षमता है. हमारे लिए, 'टेक्स्ट-टू-स्पीच' (लिखे हुए को आवाज़ में बदलने वाली) AI तकनीक सिर्फ एक सुविधा नहीं है, बल्कि यह हमारी खोई हुई आवाज़ को वापस पाने जैसा है.

Sarvam AI CEO Pratyush Kumar Lifetime Access To Mouth Cancer Survivor
मासिक सब्सक्रिप्शन लाने की मांग की
रघुनाथ ने आगे लिखा कि हो सकता है कि कोई डॉक्टर मेरा 100 शब्दों का नोट न पढ़े, लेकिन अगर वही बात आवाज़ में सुनाई जाए, तो वे उसे एक मिनट से भी कम समय में सुन सकते हैं. लेकिन SarvamAI के प्रति कैरेक्टर (हर अक्षर के हिसाब से) कीमत इसे रोज़मर्रा के इस्तेमाल के लिए बहुत महंगा बना देती है. रघुनाथ ने इस दौरान अपनी एक्स पोस्ट में ChatGPT या GeminiAI जैसे अन्य AI मॉडल्स की तरह, दिव्यांगजनों के लिए कोई किफायती और अनलिमिटेड इस्तेमाल वाला मासिक सब्सक्रिप्शन लाने की मांग की.
Hello @SarvamAI, I am 70, an oral cancer survivor since 2015. Cancer took away my God-given gift of speech. Today, my wife is my voice before doctors, banks and the outside world. I have spent years communicating through written notes, often unread or unanswered. At cancer hospitals, I see countless patients struggling to express their suffering. Our pain is ours, but our voice has become someone else's. India has an estimated 1.99 million people with speech disabilities. For us, Text-to-Speech AI is not a convenience. It is our lost voice restored. A doctor may not read my 100-word note, but could listen to it in under a minute. Yet your per-character pricing makes regular use expensive. Could @SarvamAI introduce an affordable, unlimited-use Divyangjan monthly subscription like other AI models like #ChatGPT #GeminiAI? We are not asking for charity. We are asking for the dignity of speaking for ourselves. Waiting for your reply so that I can subscribe this tool right away. @narendramodi @AshwiniVaishnaw
— Raghunath AS 🇮🇳 (@asraghunath) November 5, 2026
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बुजुर्ग की मांग पर SarvamAI CEO ने किया ऐलान
जिस पर SarvamAI के फाउंडर प्रत्युष कुमार ने जवाब दिया. उन्होंने लिखा कि रघुनाथ जी, इस मुद्दे को हमारे ध्यान में लाने के लिए धन्यवाद. SarvamAI में हम जो काम कर रहे हैं, उसका मुख्य उद्देश्य यही है. हम आपकी बात से सहमत हैं कि AI का लाभ उठाने के लिए आपको अक्षरों (characters) को गिनने की ज़रूरत नहीं पड़नी चाहिए.
हमने आपके अकाउंट में अपने मॉडल्स का 'लाइफटाइम एक्सेस' (जीवन भर के लिए इस्तेमाल की सुविधा) जोड़ दिया है. इस घोषणा के बाद रघुनाथ ने प्रत्युष कुमार का आभार व्यक्त किया. उन्होंने लिखा कि प्रत्युष जी ने मुझे जो दिया है, वह तकनीक के मुफ्त एक्सेस से कहीं ज़्यादा कीमती है. उन्होंने मुझे मेरी खोई हुई आवाज़ वापस पाने की उम्मीद दी है.
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