NDTV World Summit में केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार जल्द ही AI पर कानून लाएगी. उन्होंने बताया कि अगले कुछ हफ्तों में AI रेगुलेशन पर कंसल्टेशन पेपर लाया जाएगा.
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार आने वाले हफ्तों में कंसल्टेशन पेपर जारी करेगी. उन्होंने आगे कहा, 'हमारे उद्योगों ने AI को बहुत तेजी से अपनाया है. हर जगह लोग तेजी से AI का इस्तेमाल कर रहे हैं.'
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उन्होंने कहा, 'लोगों को अच्छी तरह पता है कि AI से क्या फायदे हो सकते हैं और इससे क्या नुकसान भी हो सकते हैं. हम हर सेक्टर से इनपुट लेना चाहते हैं. हमने टेक कंपनियों के साथ काफी चर्चा की है. अब हमें उन स्टेकहोल्डर्स के साथ चर्चा करने की जरूरत है जो इसका इस्तेमाल करते हैं.'
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AI को लेकर क्या है भारत का प्लान?
NDTV World Summit में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने AI को लेकर भारत के प्लान के बारे में विस्तार से बताया.
उन्होंने कहा कि भारत एक AI रेगुलेटरी फ्रेमवर्क पर काम कर रहा है. उन्होंने तर्क दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े जोखिम अब उस स्तर पर पहुंच गए हैं, जहां नए कानूनों की जरूरत है.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत का रुख हमेशा से ही बहुत ज्यादा रेगुलेशन के बजाय इनोवेशन को बढ़ावा देने का रहा है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि ऐसे सुरक्षा उपाय जरूरी हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि AI इंसानों पर केंद्रित रहे और इंसानों के नियंत्रण में रहे.
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अब क्यों जरूरी है AI पर कानून?
उन्होंने बताया कि AI के कानून को लेकर दुनिया भर में दो अलग-अलग विचार हैं. एक पक्ष का मानना है कि सरकारों को नियम लागू करने से पहले इस तकनीक को पूरी तरह विकसित होने देना चाहिए, जबकि दूसरा पक्ष शुरुआत से ही कड़ी निगरानी का समर्थन करता है.
वैष्णव ने कहा कि भारत का झुकाव आमतौर पर इनोवेशन को बढ़ावा देने की ओर रहा है, लेकिन AI से जुड़े बढ़ते जोखिमों को देखते हुए अब इसके लिए कानून लाना जरूरी हो गया है.
उन्होंने यह भी कहा कि AI गवर्नेंस को वैश्विक स्तर पर एक समान होना चाहिए, क्योंकि डिजिटल तकनीकें राष्ट्रीय सीमाओं से परे होती हैं.
परमाणु उद्योग का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि AI के क्षेत्र में अग्रणी देश और इकोसिस्टम आगे चलकर एक साथ आएंगे और इस तकनीक को नियंत्रित करने के लिए कुछ साझा सिद्धांत तैयार करेंगे.
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