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क्रिकेटर बनने का सपना टूटा, लेकिन भारत को मिल गया रिकॉर्डतोड़ एथलीट, जानें कौन है तेजस्विन शंकर?

तेजस्विन शंकर डेकाथलॉन में भारत के राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक हैं और उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई गेम्स में पदक जीते हैं और अब इस बार भी उनके मेडल की उम्मीद है.

क्रिकेटर बनने का सपना टूटा, लेकिन भारत को मिल गया रिकॉर्डतोड़ एथलीट, जानें कौन है तेजस्विन शंकर?
Who is Tejaswin Shankar: चोटें, चुनौतियां और फिर इतिहास; तेजस्विन शंकर ने कभी नहीं मानी हार

तेजस्विन शंकर का सफर हिम्मत, खुद को नए सिरे से ढालने और पक्के इरादे की कहानी है. भारत के बेहतरीन ट्रैक और फील्ड एथलीटों में से एक बनने से पहले, तेजस्विन को क्रिकेट का बहुत शौक था. भारत के कई युवाओं की तरह, वह भी बैट और बॉल के साथ बड़ा नाम कमाना चाहते थे. हालांकि, उनकी कुदरती एथलेटिक काबिलियत और शानदार कद-काठी उन्हें एथलेटिक्स की ओर ले गई, जहां उन्हें अपनी असली मंजिल मिली. शुरुआत में उन्होंने हाई जंप में अपनी पहचान बनाई, सीमित संसाधनों और कड़े मुक़ाबले का सामना करते हुए वह भारत के सबसे अच्छे जंपर्स में से एक बनकर उभरे. उनका यह सफर आसान नहीं था. चोटों, मुश्किलों और सबसे ऊंचे लेवल पर अच्छा प्रदर्शन करने के दबाव ने बार-बार उनके हौसले की परीक्षा ली. फिर भी, तेजस्विन ने हार नहीं मानी.

एक बड़ा मोड़ तब आया जब वह आगे की पढ़ाई और ट्रेनिंग के लिए अमेरिका गए,  वहां उन्हें वर्ल्ड-क्लास कोचिंग और सुविधाएं मिलीं, जिससे उनके प्रदर्शन को बेहतर बनाने में मदद मिली. हाई जंपर के तौर पर कंफर्ट जोन में बने रहने के बजाय, तेजस्विन ने डेकाथलॉन में जाकर एक और भी बड़ी चुनौती स्वीकार की. यह एथलेटिक्स के सबसे मुश्किल इवेंट्स में से एक है जिसमें 10 अलग-अलग खेल शामिल होते हैं.

यह फैसला जोखिम भरा था, लेकिन इसका फायदा मिला. लगातार कड़ी मेहनत और अनुशासन के जरिए, तेजस्विन एक रिकॉर्ड-तोड़ने वाले डेकाथलीट और इंटरनेशनल लेवल पर भारत के लिए मेडल जीतने के दावेदार बन गए. उनकी कामयाबी ने साबित कर दिया कि बदलाव को अपनाकर और अपनी आरामदायक स्थिति से बाहर निकलकर बड़ी काबिलियत को सामने लाया जा सकता है. 

आज, तेजस्विन शंकर पूरे भारत के युवा एथलीटों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं.  क्रिकेट के शौकीन से हाई जंपर और फिर एक सफल डेकाथलीट बनने तक का उनका सफर दिखाता है कि सपने भले ही बदल जाएं, लेकिन लगन और लगातार कोशिश हमेशा कामयाबी का रास्ता बनाती है. 

मुख्य उपलब्धियां

  • कॉमनवेल्थ गेम्स में पहले भारतीय डेकाथलॉन मेडलिस्ट: घुटने की चोट के बावजूद ग्लासगो में 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में ऐतिहासिक ब्रॉन्ज़ मेडल जीता.
  •  बेहतरीन हाई जम्पर: बर्मिंघम 2022 में कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का पहला हाई जंप मेडल ब्रॉन्ज जीतने में सफल रहे. 
  •  नेशनल रिकॉर्ड होल्डर: 2026 में रांची में फेडरेशन कप में डेकाथलॉन में 8057 पॉइंट्स के साथ भारतीय नेशनल रिकॉर्ड बनाया और 8000 पॉइंट्स का आंकड़ा पार करने वाले पहले भारतीय बने.
  •  एशियन मेडल्स: हांग्जो में 2022 एशियन गेम्स में डेकाथलॉन में सिल्वर मेडल और 2025 एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में एक और सिल्वर मेडल जीता.

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