- बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवात अर्नब देश के चौदह राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं के साथ प्रभाव डाल रहा है
- छत्तीसगढ़ में तीन दिनों से लगातार मूसलाधार बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है और कई इलाके जलमग्न हो गए हैं
- ओडिशा के मलकानगिरी जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो गया है और कई पुलों पर बाढ़ का पानी बह रहा है
बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवात अर्नब देश के 14 राज्यों को अपनी चपेट में लिए हुए है. इसका सबसे ज्यादा असर छत्तीसगढ़ में देखने को मिल रहा है. वहीं, उत्तर प्रदेश में बीते 48 घंटों में बारिश की वजह से अलग-अलग हादसों में 13 लोगों की मौत की खबर है. छह की मौत शनिवार को हुई है. चक्रवात अर्नब के असर से उत्तर प्रदेश, बिहार समेत आधा दर्जन से अधिक राज्यों में इन दिनों भारी बारिश हो रही है और 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं. यूपी, बिहार और छत्तीसगढ़ में नदी-नाले उफान पर हैं. विदा होता मानसून लौट आने से उत्तर प्रदेश के 30 से अधिक जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. मध्य प्रदेश और राजस्थान समेत 14 राज्यों में बारिश को लेकर मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है. बिहार के 19 जिलों में येलो अलर्ट है.
ओडिशा के मलकानगिरी में हालात गंभीर, NH-326 बंद
न्यूज एजेंसी आईएएनएस के अनुसार, ओडिशा के मलकानगिरी में चक्रवात 'अर्नब' ने काफी तबाही मचाई है. लगातार बारिश से मलकानगिरी जिले के कई इलाकों का संपर्क टूट गया है. कांकुरुकोंडा, कन्याश्रम, एमवी-90 और एमवी-96 पुलों के ऊपर तीन से चार फीट तक बाढ़ का पानी बह रहा है. इसके चलते मलकानगिरी से कालीमेला, मोटू और पोडिया के बीच आवागमन बंद हो गया है. यहां से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-326 पर पानी भर जाने के कारण जिला प्रशासन ने इसे बंद कर दिया है. एनएच पर कई स्थानों पर सैकड़ों वाहन फंसे हुए हैं. लोगों की सुरक्षा के लिए सभी पुलों के पास पुलिस तैनात की गई है.

चक्रवात अर्नब का असर: नदियां उफान पर, 14 राज्यों में अलर्ट, कई जिलों में बाढ़ का खतरा
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मलकानगिरी में दो दिन का रेड अलर्ट
मलकानगिरी के एडीएम बेदाबर प्रधान ने आईएएनएस को बताया कि अगले कुछ घंटे और भारी पड़ सकते हैं. इसके लिए जिला प्रशासन ने पूरी तैयारी कर रखी है. चक्रवात के कारण जिले में पहले से ही रेड अलर्ट लागू है. कई क्षेत्रों का संपर्क टूट चुका है.
तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और चेन्नई से आने वाले वाहन भी यहां फंसे हुए हैं. जिला प्रशासन और पंचायतों की ओर से प्रभावित लोगों तक भोजन और अन्य जरूरी सामग्री पहुंचाई जा रही है. एक स्थानीय निवासी ने बताया कि जिले में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही है, जिसके कारण कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बन गई है.
सात जिलों के लिए भारी बारिश का रेड अलर्ट
चक्रवात 'अर्नब' का असर केवल मलकानगिरी तक सीमित नहीं है, बल्कि गजपति समेत कई जिलों में हालात खराब हो गए हैं. ओडिशा सरकार में मंत्री गोकुलानंद मल्लिक ने कहा, "मैं गजपति जिले में हूं. चक्रवात और भारी बारिश को देखते हुए सात जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया था." बालासोर में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. फायर सर्विस की टीमों ने कई स्थानों पर गिरे पेड़ों को हटाया. वहीं, रेमुना में बुधवार को एक मकान गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई और एक बच्चा घायल हो गया.
फायर ऑफिसर अजय ने आईएएनएस को बताया, "बांकेश्वर में तीन जगहों पर पेड़ गिरे, जिनमें से दो पेड़ घरों पर गिरे थे. वहां फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला गया. राजाबगीचा जंक्शन पर फ्लडलाइट की मदद से मलबा हटाने का कार्य किया गया." उन्होंने बताया कि बालासोर के सभी फायर स्टेशन पूरी तरह तैयार हैं. 12 स्टेशनों पर एक-एक नाव तैनात है, जबकि चार अतिरिक्त नावों को स्टैंडबाय पर रखा गया है.
छत्तीसगढ़ में तीन दिन से मूसलाधार बारिश
न्यूज एजेंसी आईएएनएस के अनुसार, चक्रवात अर्नब की वजह से पिछले तीन दिनों से छत्तीसगढ़ में मूसलाधार बारिश हो रही है. रायपुर, बिलासपुर, बस्तर, दुर्ग और सरगुजा संभागों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. कई सड़कें जलमग्न हो गई हैं, अनेक मार्गों पर यातायात ठप है और कई इलाकों का संपर्क टूट गया है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जिला कलेक्टरों और संबंधित विभागों को राहत एवं बचाव कार्यों में उच्च सतर्कता बरतने तथा निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं.

UP, बिहार से ओडिशा तक बारिश का संकट, चक्रवात अर्नब ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें
महासमुंद में बाढ़ का बढ़ा खतरा
महासमुंद जिले में पिछले दो दिनों से हो रही भारी बारिश से व्यापक नुकसान हुआ है. गंगरेल बांध से पानी छोड़े जाने के कारण महानदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है. बम्हानी गांव में सरकारी शराब की दुकान पूरी तरह बाढ़ के पानी में डूब गई, जिसमें दो सुरक्षा गार्ड छगन लाल कुर्रे और ईद कुमार टंडन फंस गए थे. दोनों ने वीडियो जारी कर अपनी सुरक्षा की जानकारी दी. बाद में बचाव दल ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया. प्रशासन ने नदी किनारे बसे 18 गांवों के लिए अलर्ट जारी किया है.
बस्तर मंडल सबसे ज्यादा प्रभावित
चक्रवात का सबसे ज्यादा असर बस्तर मंडल और आसपास के जिलों पर पड़ा है. लगातार भारी बारिश के कारण अधिकांश नदियां और नाले उफान पर हैं. मुख्य सड़कें जलमग्न हो गई हैं और अंतर-जिला संपर्क लगभग पूरी तरह टूट गया है. धमतारी स्थित गंगरेल बांध के सभी 14 गेट खोल दिए गए हैं, क्योंकि जलाशय 98 प्रतिशत से अधिक भर चुका है. रुद्री बैराज के जरिए महानदी में करीब 50 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है.
सैकड़ों गांवों पर बाढ़ का खतरा
मुरुमसिल्ली बांध अपनी 100 प्रतिशत क्षमता तक भर चुका है, जबकि बलोद जिले के दुधवा और सोंधुर बांध 90 प्रतिशत से अधिक भर गए हैं. धमतारी मुख्यालय के पास उफनती हटकुल नदी ने आसपास के कई गांवों का संपर्क काट दिया है. कोरबा में बंगो बांध और ओडिशा के खातीगुड़ा बांध से भी पानी छोड़ा गया है, जिससे बड़ी मात्रा में पानी निचले क्षेत्रों की ओर बह रहा है और इंद्रावती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है. ओडिशा के कालाहांडी क्षेत्र से बड़े पैमाने पर पानी छोड़े जाने के बाद सुकमा, कांकेर, बीजापुर, जगदलपुर, नारायणपुर और दंतेवाड़ा के सैकड़ों गांवों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है.
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