साक्षी और उनके पति सत्यव्रत कादियान ने लखनऊ में अपने-अपने ट्रायल जीते...
नई दिल्ली:
ओलिंपिक कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक और प्रतिभावान बजरंग पूनिया नई दिल्ली में 10 से 14 मई तक होने वाली एशियाई कुश्ती चैम्पियनशिप में भारतीय चुनौती की अगुवाई करेंगे. भारत चैम्पियनशिप के लिए 24 सदस्यीय मजबूत टीम उतारेगा जिसमें तीन वर्ग फ्रीस्टाइल, महिला और ग्रीको रोमन में आठ-आठ खिलाड़ी मेजबान देश का प्रतिनिधित्व करेंगे. टूर्नामेंट में 112 फ्रीस्टाइल, 103 ग्रीको रोमन और 83 महिला पहलवान 24 स्वर्ण और इतने की रजत जबकि 48 कांस्य पदक के लिए चुनौती पेश करेंगे. विभिन्न कारणों से पिछले तीन ट्रायल में हिस्सा नहीं लेने वाली साक्षी (58 किग्रा) और उनके पति सत्यव्रत कादियान (120 किग्रा) ने लखनऊ में अपने-अपने ट्रायल जीते.
रियो ओलंपिक के दौरान गंभीर चोट का सामना करने वाली विनेश फोगाट इस प्रतियोगिता से वापसी करेंगी. डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को पहलवानों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है. इस बीच उन्होंने गीता और बबीता के अपने पिता महावीर फोगाट के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग के फैसले का भी बचाव किया. अब कोई नहीं जानता कि ये दोनों शिविर में वापस आएंगी. बृजभूषण ने कहा, "हम किसी को शिविर में हिस्सा लेने के लिए बाध्य नहीं कर सकते. वे सीनियर खिलाड़ी हैं और अगर वे अपना ट्रेनिंग कार्यक्रम तैयार करती है. जो हम स्वीकृति देते हैं. यही कारण है कि हम शिविर में जूनियर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हैं."
यह पूछने पर कि क्या डब्ल्यूएफआई फोगाट बहनों ने नाम की सिफारिश करेगा जबकि उनके पिता को भी उनका कोच होने के कारण सरकारी अनुदान मिल रहा है, डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष ने इस सवाल का कोई जवाब नहीं दिया. डब्ल्यूएफआई साथ ही ग्रीको रोमन और महिला वर्ग के लिए जापानी कोचों की तलाश में भी है. बृजभूषण ने कहा, "हम युवा विदेशी कोचों की तलाश में हैं. जो इच्छा दिखा रहे हैं वह उतने सक्षम नहीं हैं और जो अच्छे हैं वे इच्छुक नहीं हैं. यह अजीब स्थिति है."
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
रियो ओलंपिक के दौरान गंभीर चोट का सामना करने वाली विनेश फोगाट इस प्रतियोगिता से वापसी करेंगी. डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को पहलवानों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है. इस बीच उन्होंने गीता और बबीता के अपने पिता महावीर फोगाट के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग के फैसले का भी बचाव किया. अब कोई नहीं जानता कि ये दोनों शिविर में वापस आएंगी. बृजभूषण ने कहा, "हम किसी को शिविर में हिस्सा लेने के लिए बाध्य नहीं कर सकते. वे सीनियर खिलाड़ी हैं और अगर वे अपना ट्रेनिंग कार्यक्रम तैयार करती है. जो हम स्वीकृति देते हैं. यही कारण है कि हम शिविर में जूनियर खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हैं."
यह पूछने पर कि क्या डब्ल्यूएफआई फोगाट बहनों ने नाम की सिफारिश करेगा जबकि उनके पिता को भी उनका कोच होने के कारण सरकारी अनुदान मिल रहा है, डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष ने इस सवाल का कोई जवाब नहीं दिया. डब्ल्यूएफआई साथ ही ग्रीको रोमन और महिला वर्ग के लिए जापानी कोचों की तलाश में भी है. बृजभूषण ने कहा, "हम युवा विदेशी कोचों की तलाश में हैं. जो इच्छा दिखा रहे हैं वह उतने सक्षम नहीं हैं और जो अच्छे हैं वे इच्छुक नहीं हैं. यह अजीब स्थिति है."
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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